अमेरिकी अर्थव्यवस्था से रोजगार के मोर्चे पर राहत देने वाले संकेत आए हैं, जहां निजी क्षेत्र की कंपनियों में नौकरियों की नई भर्तियों ने गति पकड़ी है। अगस्त 22 को समाप्त हुए चार हफ्तों की अवधि के दौरान अमेरिकी नियोक्ताओं ने प्रति सप्ताह औसतन 12,000 नई नौकरियां जोड़ी हैं। एनईआर पल्स के आंकड़ों के अनुसार, यह आंकड़ा पिछली रिपोर्ट में दर्ज 10,000 नौकरियों प्रति सप्ताह के मुकाबले बेहतर सुधार को दर्शाता है। हालांकि, रोजगार वृद्धि में इस तेजी के बाद भी विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर दबाव लगातार बना हुआ है और वह अपने हालिया कारोबारी दायरे के निचले स्तर पर टिका हुआ है।
डॉलर इंडेक्स पर दबाव और चार महीने के निचले स्तर की चुनौती
निजी क्षेत्र में भर्ती प्रक्रिया में मामूली सुधार दिखने के बावजूद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में मजबूती दर्ज नहीं की गई। डॉलर इंडेक्स 98.60 के आसपास अपने चार महीने के निचले स्तर के क्षेत्र को चुनौती दे रहा है। करेंसी मार्केट में निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक व्यापक आर्थिक परिस्थितियों के कारण ग्रीनबैक अपनी हालिया गिरावट को आगे बढ़ा रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि केवल रोजगार के सीमित आंकड़े ही डॉलर को मजबूती देने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि महंगाई और भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ग्लोबल करेंसी मार्केट में हलचल और USD/JPY का हाल
अमेरिकी डॉलर की कमजोरी का सीधा असर प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के जोड़े पर दिखाई दे रहा है। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) में भारी मंदी का रुख बना हुआ है। हाल ही में सात महीने के निचले स्तर के करीब पहुंचने के बाद यह करेंसी पेयर 153.00 के स्तर के पास आ चुका है। लाइव मार्केट आंकड़ों के मुताबिक USD/JPY 153.42 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 153.85 से लगभग 0.28 प्रतिशत नीचे है। जापान में हाल ही में जारी तन्कन व्यावसायिक सर्वेक्षण के मजबूत आंकड़ों ने बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की उम्मीदों को मजबूत किया है, जिससे येन को दोहरा सहारा मिला है।
तकनीकी संकेतकों के संदर्भ में, USD/JPY की स्थिति निम्नलिखित है
- रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI): 14-दिवसीय RSI वर्तमान में 25 के स्तर पर है, जो अत्यधिक बिकवाली (oversold) की स्थिति को दर्शाता है।
- मूविंग एवरेज कॉनवर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD): -1.28 पर बना हुआ है, जो -0.73 के सिग्नल लाइन से नीचे है और मंदी के रुझान को स्पष्ट करता है।
- मूविंग एवरेज (EMA & SMA): 20-दिवसीय EMA 157.93 पर है, जबकि 50-दिवसीय EMA 159.22 और 200-दिवसीय EMA 157.76 पर स्थित है। मूल्य वर्तमान में बोलिंजर बैंड के निचले स्तर 154.55 से भी नीचे बना हुआ है।
- महत्वपूर्ण सपोर्ट एवं रेजिस्टेंस स्तर: निकटतम 20-दिवसीय सपोर्ट 152.90 के आसपास है, जबकि तात्कालिक रेजिस्टेंस 160.38 पर देखा जा रहा है। Pivot स्तर 153.44 पर स्थित है, जिसमें R1 153.95 तथा S1 सपोर्ट 152.91 पर मौजूद है।
ऑस्ट्रेलियन डॉलर और एशियाई बाजारों का समीकरण
दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) में एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान 0.7200 के स्तर से ऊपर समेकन (consolidation) देखा गया। चीन में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के आंकड़े उम्मीद से अधिक गर्म रहने के बाद भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर कोई खास नकारात्मक असर नहीं पड़ा। इसके विपरीत, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने ऑसी (Aussie) को समर्थन प्रदान किया है। अमेरिकी डॉलर की चौतरफा कमजोरी ने इस मुद्रा जोड़े के लिए टेलविंड के रूप में काम किया है। व्यापारी अब आने वाले अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं ताकि बाजार की भावी दिशा स्पष्ट हो सके।
डिजिटल एसेट्स में रिकवरी और पाई नेटवर्क का प्रदर्शन
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में पाई नेटवर्क (PI) ने अपने सुधार के सिलसिले को आगे बढ़ाया है। 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के आसपास मजबूत सपोर्ट पाने के बाद यह डिजिटल टोकन $0.098 के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है। पाई कोर टीम की ओर से जारी संदेशों में डेवलपर इकोसिस्टम को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नेटवर्क पर एप्लिकेशन-स्तरीय उपयोगिता को बढ़ाने के लिए नए डेवलपर टूल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है, जिससे निवेशकों का विश्वास लौटता दिख रहा है।
ऊर्जा बाजार में नया रिकॉर्ड और डीजल क्रैक स्प्रेड में उछाल
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भले ही पिछले महीनों की तुलना में स्थिर लग रही हों, लेकिन डीजल का बाजार एक अलग कहानी बयां कर रहा है। अमेरिकी अल्ट्रा लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड के बीच का अंतर, जिसे डीजल क्रैक स्प्रेड कहा जाता है, पहली बार $100 प्रति बैरल की सीमा को पार कर गया है। इंट्राडे कारोबार के दौरान यह प्रीमियम रिकॉर्ड $102.00 प्रति बैरल से अधिक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव और मध्यवर्ती ईंधनों की भारी मांग को उजागर करता है।
श्रम बाजार, वेतन वृद्धि और केंद्रीय बैंकों की नीतियां
अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य और मुद्रा के मूल्यांकन को समझने के लिए श्रम बाजार की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण पैमाना होती है। जब रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और बेरोजगारी दर कम रहती है, तब उपभोक्ता खर्च में इजाफा होता है, जिससे आर्थिक वृद्धि को बल मिलता है। हालांकि, अत्यधिक तंग श्रम बाजार (tight labor market), जहां योग्य कर्मचारियों की कमी होती है, वहां कंपनियों को अधिक वेतन की पेशकश करनी पड़ती है।
वेतन वृद्धि का यह रुझान केंद्रीय बैंकों के लिए बेहद संवेदनशील होता है। वेतन में वृद्धि होने पर परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ती है, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में तेजी आती है। ऊर्जा या खाद्य पदार्थों जैसी परिवर्तनशील वस्तुओं की तुलना में वेतन वृद्धि से पैदा होने वाली महंगाई अधिक टिकाऊ और दीर्घकालिक मानी जाती है, क्योंकि एक बार बढ़े हुए वेतन को वापस घटाना लगभग असंभव होता है।
इसी कारण वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों को तय करते समय श्रम बाजार और वेतन आंकड़ों पर गहरी नजर रखते हैं
- फेडरल रिजर्व (Fed): अमेरिकी केंद्रीय बैंक के पास दोहरे जनादेश (dual mandate) की जिम्मेदारी है। इसे न केवल मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना है, बल्कि अधिकतम रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देना होता है।
- यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB): इसके विपरीत, ईसीबी का मुख्य और एकमात्र उद्देश्य केवल मुद्रास्फीति को नियंत्रित सीमा के भीतर बनाए रखना है।
नीतिगत प्राथमिकताओं में अंतर के बावजूद, दोनों ही संस्थान आर्थिक मजबूती के प्रमुख सूचक के रूप में श्रम बाजार के रुझानों का गहन विश्लेषण करते हैं। आने वाले समय में अमेरिकी मुद्रास्फीति और रोजगार के नए आंकड़े यह तय करेंगे कि केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दर प्राथमिकताओं में किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।



















