अमेरिकी इक्विटी वायदा कारोबार में बुधवार के सत्र के दौरान भारी उथल-पुथल देखने को मिली। अमेरिका में संपन्न हुए मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी को मिली व्यापक सफलता के तुरंत बाद वॉल स्ट्रीट इंडेक्स फ्यूचर्स में तेज बिकवाली देखी गई। हालांकि, शुरुआती झटके के कुछ ही घंटों बाद बाज़ार ने असाधारण वापसी की। निचले स्तरों से खरीदारी लौटने के चलते नैस्डैक 100 फ्यूचर्स अपने दिन के सबसे निचले बिंदु से लगभग 950 अंक ऊपर चढ़ गया। इसी रुझान पर चलते हुए डाउ जोन्स और एसएंडपी 500 फ्यूचर्स भी शुरुआती नुकसान की भरपाई करते हुए हरे निशान में बंद होने की दिशा में बढ़ गए। इस मजबूत वैश्विक रिकवरी की सीधी अनुगूंज भारतीय बाजार में भी सुनाई दी, जहां गिफ्ट निफ्टी लगभग 190 अंक की बढ़त बनाकर 23,950 के स्तर को छूने में कामयाब रहा, जिसने घरेलू सूचकांकों के लिए एक सकारात्मक शुरुआत का मजबूत आधार तैयार कर दिया।
शुरुआती घबराहट के बाद अमेरिकी फ्यूचर्स में तूफानी उछाल
बुधवार के कारोबारी सत्र में अमेरिकी बेंचमार्क सूचकांकों के फ्यूचर्स ने पहले एक तेज गोता लगाया और फिर अप्रत्याशित रफ्तार से वापसी की। नैस्डैक 100 ई-मिनी फ्यूचर्स 250 अंक यानी करीब 0.88 फीसदी की तेजी दर्ज करते हुए 28,555 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। चुनाव परिणाम स्पष्ट होने के तुरंत बाद नैस्डैक फ्यूचर्स लगभग 2.4 फीसदी तक टूट चुका था, लेकिन निचले स्तर से इसमें करीब 950 अंकों का भारी सुधार देखने को मिला।
इसी तरह डाउ जोन्स ई-मिनी फ्यूचर्स में 676 अंकों यानी 1.3 फीसदी की तगड़ी उछाल दर्ज की गई, जिससे यह 52,571 के स्तर तक पहुंच गया। व्यापक बाजार का प्रतिनिधित्व करने वाला एसएंडपी 500 ई-मिनी फ्यूचर्स भी 67 अंक यानी 0.89 फीसदी बढ़कर 7,664 के स्तर पर पहुंच गया। यह सूचकांक भी दिन के सबसे निचले स्तर से लगभग 1.4 फीसदी की तेज गिरावट झेलने के बाद संभलने में कामयाब रहा। वायदा कारोबार में आए इस बड़े बदलाव से साफ संकेत मिले कि निवेशकों ने शुरुआती राजनीतिक अनिश्चितता को किनारे कर व्यापक अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से मिल रहे सकारात्मक संकेतों पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया।
डेमोक्रेट्स की जीत से क्यों सहम गया था वॉल स्ट्रीट?
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के जो नतीजे सामने आए, उनमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए अमेरिकी संसद के दोनों सदनों, सीनेट और प्रतिनिधि सभा, पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया। संसद के दोनों अंगों पर विपक्षी डेमोक्रेट्स का कब्जा होने से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक स्थिति को गहरा झटका लगा और वाशिंगटन में नीतिगत स्तर पर खींचतान की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई।
नतीजे घोषित होते ही वॉल स्ट्रीट के प्रतिभागियों के बीच यह चिंता गहराई कि दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक नियंत्रण बढ़ने के बाद बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर नियामकीय शिकंजा कड़ा हो सकता है। खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, क्रिप्टोकरेंसी और तेजी से पैर पसार रहे उभरते तकनीकी क्षेत्रों पर कड़े सरकारी नियम और निगरानी थोपे जाने का डर पैदा हो गया था।
इसके साथ ही निवेशकों को यह अंदेशा भी सताने लगा कि नई कांग्रेस तकनीकी कंपनियों पर टैक्स की दरें बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकती है। ऐसी नीतियों का सीधा और प्रतिकूल प्रभाव उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पूंजीगत खर्च पर पड़ सकता है, जो आधुनिक AI बुनियादी ढांचे में अरबों डॉलर का भारी निवेश कर रही हैं। इन्हीं आशंकाओं ने शुरुआती कारोबार में घबराहट फैलाई और सूचकांक वायदा में तेज बिकवाली का दौर शुरू कर दिया।
डोनाल्ड ट्रंप के बयान और बॉन्ड यील्ड में गिरावट से पलटा रुख
बाजार में फैली शुरुआती बेचैनी के बीच अचानक तब बदलाव देखने को मिला जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान सामने आया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि वह चुनाव परिणामों को पूरी तरह स्वीकार करेंगे। इस रुख से चुनाव के बाद लंबे समय तक चलने वाले राजनीतिक गतिरोध और कानूनी विवाद की आशंकाएं काफी हद तक खत्म हो गईं।
इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने भी इक्विटी बाजारों को नीचे गिरने से बचाया। बॉन्ड यील्ड के नरम पड़ने से उच्च मूल्यांकन वाली प्रौद्योगिकी और ग्रोथ कंपनियों के शेयरों को सीधा सहारा मिलता है। वित्तीय विश्लेषकों और बड़े फंड प्रबंधकों ने यह गणित लगाना शुरू किया कि भले ही अमेरिकी सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मतभेद बने रहें, लेकिन बुनियादी आर्थिक स्थिरता और कंपनियों की मजबूत आय का आधार बाजार की रफ्तार को बरकरार रखने के लिए पर्याप्त है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी शेयरों पर टिकी नजरें
अमेरिकी शेयर बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियां अभी भी निवेशकों की प्राथमिक नजरों में बनी हुई हैं। हालांकि चुनाव परिणामों के तुरंत बाद नियामकीय पाबंदियों की आशंका ने हलचल मचाई थी, लेकिन नैस्डैक फ्यूचर्स में आई लगभग 950 अंकों की रिकवरी ने यह साबित किया कि बाजार केवल चुनावी शोर पर प्रतिक्रिया देने के बजाय कंपनियों के वास्तविक वित्तीय प्रदर्शन और कमाई की ताकत को तौल रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक एएमडी जैसी प्रमुख सेमीकंडक्टर और हार्डवेयर कंपनियों के बिजनेस आउटलुक और प्रदर्शन का असर भी इस पूरे क्षेत्र की धारणा पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। बाजार अब इस बात की बारीकी से पड़ताल कर रहा है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहे अरबों डॉलर के निवेश से कंपनियों के राजस्व में कितनी वास्तविक बढ़ोतरी हो रही है और वाशिंगटन में होने वाले किसी भी संभावित विधायी बदलाव का इन कंपनियों की विस्तार योजनाओं पर क्या असर पड़ता है।



















