अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में गुरुवार को मौद्रिक नीतियों के बड़े फैसलों और प्रमुख भू-राजनीतिक गतिविधियों के चलते व्यापक उथल-पुथल देखने को मिली। वैश्विक केंद्रीय बैंकों की आगामी ब्याज दर नीतियों और दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्षों के बीच होने वाले उच्चस्तरीय संवाद से ठीक पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। एक तरफ जहां कनाडा का केंद्रीय बैंक अपने नीतिगत दर संशोधन को लेकर महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों का बारीक आकलन कर रहा है, वहीं एशिया और यूरोप के केंद्रीय बैंकों ने अपनी दिशा स्पष्ट करते हुए मौद्रिक कदम उठाए हैं। इसके अलावा विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार और बहुमूल्य धातुओं के व्यापार पर भी इन घटनाक्रमों का सीधा असर साफ नजर आ रहा है।
बैंक ऑफ कनाडा के समक्ष नीतिगत चुनौतियां और आगामी समीक्षा
बैंक ऑफ कनाडा की अक्टूबर में होने वाली मौद्रिक नीति बैठक को लेकर आर्थिक विश्लेषकों का ध्यान श्रम और उत्पादन क्षमता के आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है। नीति निर्माताओं के दृष्टिकोण से, पिछली अवधियों के जनसंख्या वृद्धि अनुमानों में की गई बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता पूर्व अनुमानों की तुलना में अधिक मजबूत थी। हालांकि, नीति निर्धारण के दौरान केवल जनसंख्या के संशोधन ही अंतिम आधार नहीं बनते। वास्तविक समय में अर्थव्यवस्था की शिथिलता को मापने वाले अन्य प्रमुख संकेतकों पर इन संशोधनों का सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है।
अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त क्षमता को लेकर व्यावसायिक सर्वेक्षणों से मिलने वाली प्रतिक्रियाएं, बेरोजगारी दर और कोर मुद्रास्फीति के रुझान पूरी तरह अप्रभावित बने हुए हैं। यही कारण है कि केंद्रीय बैंक अक्टूबर के अपने अगले नीतिगत फैसले से पहले इन सभी वास्तविक संकेतकों की बेहद बारीकी से निगरानी करेगा। ब्याज दरों में वृद्धि अथवा ठहराव का निर्णय इन ठोस आंकड़ों के समग्र अध्ययन के आधार पर ही तय होगा, जिससे आर्थिक स्थिरता को बिना नुकसान पहुंचाए मूल्य वृद्धि पर काबू पाया जा सके।
बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि और स्विस नेशनल बैंक का रुख
एशियाई बाजारों में केंद्रीय बैंकों की सक्रियता स्पष्ट दिखी, जहां बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया। बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से लिए गए फैसले के तहत अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। नीति को सामान्य बनाने के क्रम में उठाया गया यह कदम काफी समय से वित्तीय बाजारों की अपेक्षाओं के बिल्कुल अनुरूप रहा। जापानी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी आने से संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिमों के बीच येन को सहारा मिला है। इसके चलते एशियाई सत्र में यूएसडी/जेपीवाई तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से गिरकर 158.00 के आसपास सिमट गया, जबकि अमेरिकी डॉलर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के चलते दो महीने के उच्च स्तर की बढ़त को बनाए रखने में सफल रहा।
दूसरी ओर, यूरोप में स्विस नेशनल बैंक ने वित्तीय विश्लेषकों की अपेक्षाओं के अनुसार अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को 0% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। स्विस नेशनल बैंक के मौद्रिक नीति मूल्यांकन के प्रमुख बिंदुओं के अनुसार, केंद्रीय बैंक के पास रखे बैंकों के साइट डिपॉजिट्स पर एक निश्चित सीमा तक नीतिगत दर के हिसाब से प्रतिफल दिया जाएगा। इसके अलावा, स्विस नेशनल बैंक ने वर्ष 2026 के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को पिछले 0.6% से संशोधित कर 0.7% कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने यह भी रेखांकित किया कि स्विट्जरलैंड के आर्थिक परिदृश्य के लिए सबसे बड़ा जोखिम वैश्विक अर्थव्यवस्था में होने वाले घटनाक्रमों से जुड़ा हुआ है।
ऑस्ट्रेलियाई रोजगार आंकड़े और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में नरमी
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान गुरुवार को एयूडी/यूएसडी में दबाव देखा गया और यह फिसलकर 0.7000 के स्तर की तरफ बढ़ता नजर आया। यह गिरावट ऑस्ट्रेलिया के अगस्त माह के रोजगार आंकड़े जारी होने के बाद दर्ज की गई। जारी आंकड़ों के मुताबिक बेरोजगारी दर अनुमानित 4.5% की तुलना में बढ़कर 4.6% पर पहुंच गई। यद्यपि रोजगार सृजन के मोर्चे पर प्रदर्शन अपेक्षाओं से बेहतर रहा और रोजगार परिवर्तन 39.5 हजार दर्ज किया गया, फिर भी बेरोजगारी दर में हुई वृद्धि ने मुद्रा पर दबाव बना दिया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक चिंताओं ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के प्रति निवेशकों के उत्साह को थामे रखा।
सोने की कीमतों में गिरावट और ट्रंप-शी बैठक पर वैश्विक निगाहें
कमोडिटी बाजार में बहुमूल्य धातु सोने में लगातार दूसरे दिन नकारात्मक रुझान देखने को मिला। यूरोपीय कारोबारी सत्र के पूर्वार्द्ध में सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसल गया, जो कि एक सप्ताह का निचला स्तर है। सर्राफा बाजार में यह दबाव मुख्य रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित बैठक से पहले बना हुआ है।
व्यापारियों और बाजार सहभागियों में इस बैठक से किसी बहुत बड़ी घोषणा की उम्मीदें यद्यपि कम हैं, फिर भी निवेशक दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की आपूर्ति, प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों के नियमों और अमेरिका एवं चीन के बीच मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम के विस्तार से जुड़ी प्रगति पर करीब से नजर रख रहे हैं। जब तक इन वैश्विक वार्ताओं का परिणाम स्पष्ट नहीं होता, तब तक कमोडिटी और मुद्रा बाजारों में सतर्कता और उतार-चढ़ाव की स्थिति बने रहने की संभावना है।
















