शिलोंग में जारी भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वोत्तर राज्य मेघालय ने आर्थिक मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन करते हुए वित्त वर्ष 2024-25 में 12.03 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है। इस अवधि में राज्य का प्रदर्शन देश के कुल 9.78 प्रतिशत के जीडीपी विकास दर से काफी आगे रहा है। राज्य की इस आर्थिक छलांग ने वित्तीय जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, हालांकि इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इस मजबूत आर्थिक वृद्धि के बावजूद राज्य के राजस्व संग्रह में कुछ मोर्चों पर गिरावट आई है जिसका मुख्य कारण केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड में कमी आना है।
सकल राज्य घरेलू उत्पाद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
कैग की स्टेट फाइनेंसेस ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, मेघालय का कुल सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 53,223 करोड़ रुपये था जो बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 59,626 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस रिपोर्ट को आधिकारिक रूप से 28 अगस्त को मेघालय विधानसभा के पटल पर रखा गया था। इस रिपोर्ट में राज्य के आर्थिक आंकड़ों का विस्तार से लेखा-जोखा पेश किया गया है, जिससे यह साफ होता है कि उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों के मामले में राज्य ने तेज गति पकड़ी है।
केंद्रीय अनुदानों में भारी गिरावट से राजस्व प्रभावित
आर्थिक मोर्चे पर मजबूत विस्तार के उलट मेघालय की राजस्व प्राप्तियों में इस दौरान 4.58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कुल प्राप्ति 17,977.86 करोड़ रुपये से घटकर 17,153.91 करोड़ रुपये रह गई। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण केंद्र की तरफ से मिलने वाले सहायता अनुदान में आई 40.15 प्रतिशत की भारी कमी थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र से मिलने वाले अनुदान 2023-24 के 5,574.86 करोड़ रुपये से घटकर 2024-25 में 3,336.37 करोड़ रुपये पर आ गए जो पिछले पांच वर्षों में राज्य द्वारा दर्ज किया गया सबसे निचला स्तर है। इसके अलावा गैर-कर राजस्व में भी 9.40 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 523.25 करोड़ रुपये से घटकर 474.08 करोड़ रुपये पर सिमट गया।
केंद्रीय करों में हिस्सेदारी से मिली कुछ राहत
केंद्र से मिलने वाले सहायता अनुदान में आई भारी कमी की भरपाई आंशिक रूप से केंद्रीय करों और शुल्कों में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ने से हुई। इस मद के तहत मेघालय को वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 9,870.40 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 13.93 प्रतिशत की अधिक वृद्धि को दर्शाता है। वहीं कर और गैर-कर दोनों को मिलाकर मेघालय का अपना राजस्व 5.54 प्रतिशत बढ़कर 3,947.14 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसके बावजूद राज्य अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए केंद्र से मिलने वाले ट्रांसफर्स पर काफी हद तक निर्भर बना रहा।
केंद्रीय फंड्स पर उच्च निर्भरता और कैग की सिफारिशें
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान मेघालय की कुल राजस्व प्राप्तियों में केंद्रीय हस्तांतरण का हिस्सा 76.99 प्रतिशत रहा, जबकि राज्य के अपने संसाधनों का योगदान केवल 23.01 प्रतिशत ही दर्ज किया गया। कैग ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया है कि राज्य की आर्थिक वृद्धि की गति और राजस्व जुटाने की क्षमता के बीच एक बड़ा अंतर बनता जा रहा है। राजस्व प्राप्तियों और जीएसडीपी का अनुपात 2023-24 के 33.78 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 28.77 प्रतिशत पर आ गया। ऑडिट रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि राज्य के अपने कर राजस्व में वृद्धि आमतौर पर उसकी जीएसडीपी के विस्तार की तुलना में पीछे रही है। मेघालय की वित्तीय स्थिति को अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कैग ने कर के दायरे को व्यापक करने, अनुपालन में सुधार लाने और राजस्व वसूली प्रक्रिया को और अधिक कुशल बनाने की महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं ताकि राज्य केंद्र पर अपनी निर्भरता घटा सके।



















