अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ नए आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी किए जाने के बीच, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को एक अहम कूटनीतिक मिशन के तहत ईरान भेजा गया है। मुनीर को डोनाल्ड ट्रंप के दूत की भूमिका में भेजा गया है ताकि तेहरान को इस बात के लिए राजी किया जा सके कि वह रुकी हुई शांति वार्ताओं को दोबारा शुरू करे और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में जारी तनाव को कम करने की दिशा में कदम उठाए।
हालांकि इस राजनयिक प्रयास के समांतर क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं, क्योंकि लाल सागर के तटीय इलाके के पास सऊदी अरब के एक तेल टैंकर को निशाना बनाकर हमला किया गया है। इस हमले के परिणामस्वरूप पोत के मुख्य डेक पर आग लग गई। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए इसकी जानकारी सार्वजनिक की है। यह घटना ऐसे संवेदनशील समय पर सामने आई है जब यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब से जुड़े समुद्री जहाजों और रणनीतिक ठिकानों को लगातार धमकियां दी जा रही हैं और हमले तेज किए जा रहे हैं।
इस कूटनीतिक पहल के पीछे की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी सामने आई है कि डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से फोन पर सीधी बातचीत की थी। पाकिस्तान के तीन अलग-अलग सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि यह फोन कॉल अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से ही की गई थी, जिससे इस राजनयिक संदेश की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पाकिस्तानी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस उच्चस्तरीय बातचीत का सबसे केंद्रीय और महत्वपूर्ण मुद्दा वाशिंगटन और तेहरान के बीच लंबे समय से ठप पड़ी वार्ताओं को फिर से पटरी पर लाना था। एक सूत्र ने विस्तार से बताया कि अमेरिका यह चाहता है कि पाकिस्तान क्षेत्रीय स्तर पर ईरान के साथ अपने कूटनीतिक प्रभाव का पूरी तरह से इस्तेमाल करे, ताकि ईरानी नेतृत्व को एक बार फिर से बातचीत की मेज पर लाया जा सके।
दूसरी ओर समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी यूकेएमटीओ ने बताया है कि सऊदी टैंकर को किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल यानी प्रक्षेपास्त्र से हिट किया गया। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह हमला किसी आत्मघाती अटैक ड्रोन के जरिए किया गया था या फिर किसी मिसाइल का उपयोग किया गया था। इस प्रोजेक्टाइल के सीधे टकरानों से पोत के मुख्य डेक पर आग भड़क उठी।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे राहत भरी बात यह रही कि टैंकर पर सवार सभी क्रू सदस्य पूरी तरह से सुरक्षित हैं और किसी भी जनहानि की सूचना नहीं है। यह घटना सऊदी अरब के यानबू शहर से लगभग 116 किलोमीटर पश्चिम दिशा में समुद्र के भीतर हुई। यानबू का यह क्षेत्र लाल सागर के तट पर स्थित है और भौगोलिक रूप से यमन से कई सौ किलोमीटर की दूरी पर है।
ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा कंपनी वैनगार्ड टेक ने इस मामले में अतिरिक्त विवरण देते हुए बताया कि जिस पोत पर यह हमला हुआ, वह सऊदी अरब के झंडे वाला एक कमर्शियल टैंकर था। कंपनी का दावा है कि इस जहाज पर मिसाइल से हमला किया गया था, जिसके तुरंत बाद उसमें आग लग गई। हालांकि, आधिकारिक ब्रिटिश समुद्री एजेंसी ने फिलहाल इसे केवल एक प्रोजेक्टाइल हमला बताया है, जिसका मतलब यह है कि इस हमले के असली perpetrator या साजिशकर्ता की आधिकारिक तौर पर पुष्टि होना अभी बाकी है।
क्या हूती विद्रोहियों का हाथ है?
इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक यमन के हूती विद्रोहियों की तरफ से आधिकारिक तौर पर नहीं ली गई है। इसके बावजूद, इस घटना का समय बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तब हुई है जब हूती गुट और सऊदी अरब के बीच का तनाव चरम पर पहुंच चुका है। ईरान समर्थित हूती विद्रोही समूह पिछले कुछ हफ्तों से लगातार सऊदी अरब के हितों और ठिकानों को निशाना बनाने की धमकियां दे रहा है, जिससे इस हमले के पीछे उन्हीं के होने की आशंका जताई जा रही है।



















