सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी सिंटा (CINTAA) के भीतर चल रहा विवाद अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। संस्था की पूर्व महासचिव उपासना सिंह ने हाल ही में सिंटा पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने संगठन की अध्यक्ष पूनम ढिल्लों और उपाध्यक्ष पद्मिनी कोल्हापुरे पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप जड़ा था। अब इन दोनों दिग्गज अभिनेत्रियों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और उपासना सिंह के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दो टूक जवाब दिया। दोनों ने साफ शब्दों में कहा कि संगठन को किसी भी तानाशाही या गैर-लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चलाया जा रहा है।
फैसलों की प्रक्रिया और नियमों का खुलासा
पद्मिनी कोल्हापुरे ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि सिंटा जैसी संस्था में कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से कोई भी फैसला अकेले नहीं ले सकता है। उन्होंने प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक शुरू करने के लिए कम से कम 8 सदस्यों का कोरम होना अनिवार्य होता है। इसके बाद किसी भी अहम मुद्दे पर निर्णय सिर्फ और सिर्फ बहुमत के आधार पर ही लिया जाता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यहां तक कि प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने जैसे फैसले भी व्यक्तिगत तौर पर नहीं किए जा सकते, बल्कि इसके लिए भी पूरी कमेटी के भीतर विस्तार से चर्चा करना जरूरी होता है।
अनुभवी सदस्यों के होने पर दिया जोर
पद्मिनी कोल्हापुरे ने उन सभी आरोपों पर भी कड़े सवाल उठाए जिनमें यह कहा गया था कि कमेटी के बाकी सदस्य पूनम ढिल्लो या उनके नेतृत्व के दबाव में आकर काम करते हैं। उन्होंने साफ किया कि कमेटी में पिंटू, राकेश बेदी और यशपाल शर्मा जैसे नामचीन और बेहद अनुभवी कलाकार शामिल हैं। उनका तर्क था कि इतने वरिष्ठ और समझदार कलाकार किसी के भी कहने पर आंख बंद करके कोई फैसला नहीं ले सकते। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इतने अनुभवी सदस्यों से सजी हुई इस कमेटी में आखिर कोई दो लोग मिलकर तानाशाही कैसे चला सकते हैं।
वर्तमान कमेटी की कानूनी वैधता पर सफाई
पद्मिनी कोल्हापुरे ने मौजूदा कमेटी की वैधता को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि यह कमेटी पूरी तरह से कानूनी है और इसे न तो कभी भंग किया गया है और न ही समाप्त किया गया है। उनके मुताबिक, वर्तमान कमेटी के सभी सदस्य संस्था के संविधान में तय नियमों के अनुसार ही अपना काम कर रहे हैं और उनका एकमात्र मुख्य उद्देश्य सिंटा से जुड़े सभी सदस्यों के हितों की पूरी तरह से रक्षा करना है।
प्रतिष्ठा को नुकसान पर जताया दुख
दूसरी तरफ, अध्यक्ष पूनम ढिल्लों ने इस पूरे विवाद को लेकर अपना गहरा दुख और नाराजगी खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा कि पिछली कमेटी और उसकी पूर्व महासचिव की तरफ से संस्था के बारे में सार्वजनिक रूप से जो बातें कही गई हैं, उससे सिंटा की वर्षों पुरानी प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा है। उनका मानना था कि समय रहते लोगों तक सही और सटीक जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी था, क्योंकि अगर एक पक्ष अपनी बात सामने नहीं रखता तो लोग आरोपों को ही सच मान लेते।
कमेटी के बड़े इस्तीफे और पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद तब और ज्यादा गहरा गया था जब सिंटा की 21 सदस्यीय एग्जीक्यूटिव कमेटी के कुल 11 सदस्यों ने अचानक अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इन इस्तीफा देने वाले सदस्यों में 8 निर्वाचित सदस्य भी शामिल थे। इन सभी ने संस्था के मौजूदा कामकाज पर से अपना भरोसा कम होने का हवाला दिया था और जल्द से जल्द नए सिरे से चुनाव कराने की मांग उठाई थी।


















