अहमदाबाद में नवरात्रि उत्सव को लेकर गरबा की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन इस बार उत्सव की तैयारी केवल पारंपरिक परिधानों, मेकअप और डांडिया तक सीमित नहीं रह गई है। जेन जी युवाओं के बीच एक अनोखा वेलनेस तरीका तेजी से चर्चा में आ रहा है। त्योहार की शुरुआत से पहले कई युवा सीधे अपनी नसों में IV ड्रिप थेरेपी ले रहे हैं। इस थेरेपी का मुख्य उद्देश्य शरीर में पानी की कमी न होने देना, लंबे समय तक चलने वाले गरबा के दौरान थकान से बचना और चेहरे की चमक बनाए रखना है। गरबा के आयोजनों में कई-कई घंटे लगातार नाचना पड़ता है और ये कार्यक्रम अक्सर देर रात तक जारी रहते हैं। इसी वजह से युवाओं को लगता है कि केवल सामान्य स्किनकेयर या कॉस्मेटिक मेकअप के दम पर नौ रातों की थकान छिपाई नहीं जा सकती, जिससे इस मेडिकल थेरेपी का चलन बढ़ गया है।
सीधे नसों में पहुंचाए जाते हैं पोषक तत्व और विटामिन
IV ड्रिप थेरेपी के जरिए आवश्यक तरल पदार्थ और पोषक तत्वों को नसों के माध्यम से सीधे रक्त प्रवाह में पहुंचाया जाता है। स्थानीय वेलनेस और ब्यूटी क्लीनिक ग्राहकों की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग मिश्रण पेश कर रहे हैं। इन ड्रिप्स में मुख्य रूप से विटामिन C, विटामिन B, जिंक, मैग्नीशियम और ग्लूटाथियोन जैसे घटक शामिल किए जाते हैं। क्लीनिक इन कॉकटेल ड्रिप्स को तुरंत हाइड्रेशन, भरपूर ऊर्जा और स्किन ग्लो देने वाले उपाय के तौर पर पेश करते हैं। पारंपरिक तौर पर लोग त्योहारों में ऊर्जा बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, भरपूर पानी, पर्याप्त नींद और नियमित स्किनकेयर पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब कई युवा इस ड्रिप को अपनी फेस्टिव तैयारी की आवश्यक सूची में शामिल कर चुके हैं।
मैराथन जैसे नौ दिन और सोशल मीडिया का असर
अहमदाबाद शहर में नवरात्रि केवल नौ रातों का धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि युवाओं के लिए यह रातभर नाचने, लगातार जागने और हर दिन बिल्कुल नए अंदाज में दिखने की एक लंबी मैराथन जैसी होती है। गरबा के शौकीन अब केवल नए स्टेप्स सीखने पर ही ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि उनकी प्राथमिकता यह भी है कि लगातार नौ दिनों तक शरीर की ऊर्जा का स्तर गिरने न पाए और चेहरा बिल्कुल भी थका हुआ न दिखे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने भी इस तरह के आधुनिक वेलनेस ट्रेंड्स को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है। त्योहार के दौरान आकर्षण का केंद्र बनने और शारीरिक फिटनेस बनाए रखने की होड़ में IV ड्रिप एक नया जरिया बनकर उभरी है।
फेस्टिवल बजट पर पड़ता है भारी खर्च
यह आधुनिक ब्यूटी और वेलनेस प्रक्रिया किसी भी लिहाज से सस्ती नहीं है। ड्रिप का खर्च उसमें मिलाए जाने वाले पोषक तत्वों के मिश्रण और क्लीनिक के स्तर के अनुसार तय होता है। एक सामान्य सेशन की फीस 4,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये के बीच बैठती है। यदि कोई तीन सेशन का पूरा पैकेज चुनता है, तो यह खर्च 12,000 रुपये से 15,000 रुपये तक पहुंच जाता है। नतीजतन, जहां पहले युवाओं का मुख्य खर्च गरबा की पोशाक और मेकअप पर होता था, वहीं अब उनके नवरात्रि बजट का एक बड़ा हिस्सा इन क्लीनिकल ड्रिप्स में जा रहा है।
ट्रेंड के पीछे भागने से पहले मेडिकल सलाह जरूरी
इस पूरे चलन के बीच सबसे गंभीर पहलू स्वास्थ्य सुरक्षा का है। IV ड्रिप कोई आम कॉस्मेटिक क्रीम या लोशन नहीं है जिसे बिना सोचे-समझे इस्तेमाल किया जाए, बल्कि इसमें सीधे नस के जरिए शरीर के अंदर कैमिकल और लिक्विड पहुंचाए जाते हैं। महज सोशल मीडिया पर चल रही रील्स या साथियों की देखा-देखी इस तरह की ड्रिप लगवाना सुरक्षित नहीं है। हर व्यक्ति के शरीर को ऐसी ड्रिप की जरूरत बिल्कुल नहीं होती। किसी भी तरह की ड्रिप लेने से पहले डॉक्टर से व्यक्तिगत परामर्श लेना बेहद आवश्यक है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे हों या नियमित दवाएं ले रहे हों। नौ रातों तक गरबा खेलने के लिए केवल कृत्रिम चमक काफी नहीं होती, बल्कि शरीर को पर्याप्त मात्रा में सादा पानी, पौष्टिक भोजन और जरूरी विश्राम मिलना ही असली फिटनेस का आधार है। फिलहाल यह ट्रेंड दिखाता है कि जेन जी के लिए त्योहार की तैयारी का मतलब अब सिर्फ कपड़े पहनना नहीं, बल्कि लुक और वेलनेस को एक पैकेज में समेटना बन चुका है।



















