लाल सागर के मुहाने पर स्थित दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्गों में से एक बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य पर यमन की सरकारी सेना ने अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। सऊदी अरब के समर्थन से आगे बढ़ रही सरकारी सैन्य टुकड़ियों ने ईरान समर्थित हूती आंदोलन के कब्जे वाले इलाकों को वापस हासिल करने के मकसद से एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की है। इस रणनीतिक बढ़त के साथ ही यमन के तटीय और आंतरिक मोर्चों पर संघर्ष एक बार फिर बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है।
धुबाब में हूती लड़ाकों की घेराबंदी और हवाई हमले
एक यमनी सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, जायंट्स ब्रिगेड्स और नेशनल शील्ड बलों ने रणनीतिक जलमार्ग के ठीक सामने स्थित लाल सागर के तटीय कस्बे धुबाब में मौजूद हूती विद्रोहियों को पूरी तरह घेर लिया है। सरकारी बलों ने कस्बे के हवाई अड्डे को अपने कब्जे में लेने के बाद बंदरगाह शहर मोखा की तरफ जाने वाली मुख्य सड़क का संपर्क भी काट दिया है। हालांकि, हूती संचालित मीडिया ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि सरकारी सेना को धुबाब क्षेत्र में कोई सैन्य कामयाबी नहीं मिली है।
इसी बीच, जमीनी अभियान को मजबूती देने के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के लड़ाकू विमानों ने व्यापक बमबारी की है। गठबंधन के अनुसार, सरकारी बलों की मदद के लिए की गई इन एयर स्ट्राइक में हूती लड़ाकों के 300 से अधिक उच्च-मूल्य वाले ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है।
पूरे देश को मुक्त कराने का ऐलान
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख रशाद अल-अलिमी ने रविवार को इस व्यापक सैन्य अभियान का औपचारिक ऐलान किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने के सभी रास्ते अब पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं।
हूती नियंत्रण वाले सभी क्षेत्रों को वापस अपने अधिकार में लेने के लक्ष्य को रेखांकित करते हुए रशाद अल-अलिमी ने सभी सशस्त्र बलों, सुरक्षा इकाइयों और सैन्य टुकड़ियों को निर्देश दिया कि वे अनुमोदित योजनाओं के अनुसार सौंपे गए अभियानों को अंजाम दें, जब तक कि मुल्क को हूती मिलिशिया के चंगुल से पूरी तरह आजाद न करा लिया जाए।
ताइज़ में घेराबंदी और अरामको पर जवाबी हमले
सरकारी बलों का यह बड़ा हमला उस घटनाक्रम के बाद सामने आया है, जिसमें हूती लड़ाकों ने दक्षिण-पश्चिमी शहर ताइज़ के पास एक अहम पहाड़ी रास्ते को बंद कर दिया था। इस सड़क के कट जाने से वहां मौजूद सरकारी सैनिक और स्थानीय नागरिक चारों तरफ से घिर गए थे।
दूसरी ओर, हूती गुट ने सऊदी अरब की तरफ से किए गए दर्जनों हवाई हमलों का बदला लेने का दावा करते हुए जवाबी कार्रवाई की है। हूती प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और खुरैस क्षेत्र में सऊदी अरामको के तेल प्रतिष्ठानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं।
चार साल का अनौपचारिक संघर्षविराम टूटा
यमन में गृहयुद्ध की शुरुआत 2014 में हुई थी, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना से तत्कालीन सरकार को बेदखल कर दिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में अरब देशों के गठबंधन ने सरकार की बहाली के लिए सीधा सैन्य हस्तक्षेप किया, जिससे यह टकराव विनाशकारी युद्ध में तब्दील हो गया।
करीब चार वर्षों से चला आ रहा अनौपचारिक संघर्षविराम इस साल जुलाई में उस वक्त बिखर गया, जब हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा कर दी। इसके बाद हूती गुट ने लाल सागर में सऊदी हवाई अड्डों, तेल संयंत्रों और तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए थे। हूतियों का कहना था कि वे अपने नियंत्रण वाले बंदरगाहों व हवाई अड्डों पर सऊदी नाकाबंदी तथा सना हवाई अड्डे पर हुए हवाई हमले का जवाब दे रहे हैं, जिसका आरोप उन्होंने सऊदी अरब पर लगाया था।
सामरिक तट पर दोबारा नियंत्रण की होड़ और मानवीय संकट
बीते महीने हूती विद्रोहियों ने यमन के दक्षिण-पश्चिमी लाल सागर तट पर अचानक धावा बोलकर सरकारी सेना को चौंका दिया था। उस वक्त विद्रोहियों ने बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य के पास स्थित धुबाब, मोखा और पेरीम (मय्यून) द्वीप जैसे रणनीतिक इलाकों से सरकारी सुरक्षाबलों को पीछे खदेड़ दिया था। हूतियों ने उस समय यह बयान दिया था कि वे इस जलमार्ग से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए कोई खतरा पैदा नहीं करेंगे, लेकिन सऊदी अरब के जहाजों को निशाना बनाना जारी रखेंगे। अब सरकारी सेना उन्हीं इलाकों को दोबारा जीतने के लिए व्यापक हमला कर रही है।
राजधानी सना सहित कई अन्य मोर्चों पर भी सरकारी अभियान शुरू होने की पुष्टि की गई है। राजधानी सना पिछले 12 वर्षों से हूतियों के नियंत्रण में है। इस ताजा सैन्य टकराव ने यमन में भारी मानवीय तबाही मचाई है। सरकारी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 6 अगस्त से जारी भीषण लड़ाई में कम से कम 959 लोगों की जान जा चुकी है और 5,000 लोग घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस नए संघर्ष के कारण अब तक 197,000 से अधिक लोग बेघर होकर विस्थापित होने को मजबूर हुए हैं।



















