पिछले कुछ दिनों से भारतीय रिजर्व बैंक और देशभर के कई बैंक अपने ग्राहकों के वॉट्सऐप पर सीकेवाईसी से जुड़ा एक मैसेज भेज रहे हैं। कुछ ग्राहकों तक यही जानकारी सामान्य टेक्स्ट मैसेज के जरिए भी पहुंच रही है। मैसेज पढ़ते ही ज्यादातर लोगों के मन में एक ही सवाल कौंधता है, आखिर सीकेवाईसी होता क्या है और इससे जुड़ा यह मैसेज कितना गंभीर है। दरअसल बहुत से ग्राहकों ने इससे पहले सीकेवाईसी शब्द के बारे में सुना ही नहीं था, इसलिए उनके मन में इसे लेकर कई तरह के सवाल आना स्वाभाविक है। यहां हम इन सभी सवालों के जवाब सिलसिलेवार तरीके से बता रहे हैं।
सीकेवाईसी नंबर आखिर होता क्या है
सीकेवाईसी यानी सेंट्रल नो योर कस्टमर एक ऐसा केंद्रीकृत सिस्टम है, जिसमें हर ग्राहक को 14 अंकों का एक यूनिक नंबर मिलता है। यह नंबर सिर्फ एक बार बनता है, लेकिन पूरे देश में किसी भी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट में इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे ही किसी ग्राहक की केवाईसी डिटेल्स एक बार वेरिफाई हो जाती हैं, उन्हें एक सुरक्षित डेटाबेस में स्टोर कर लिया जाता है और उसी के साथ यह 14 अंकों वाला सीकेवाईसी नंबर जारी होता है। यह नंबर हमेशा के लिए ग्राहक के केवाईसी रिकॉर्ड्स से जुड़ा रहता है, इसलिए दोबारा वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं पड़ती।
सीकेवाईसी को जरूरी क्यों बनाया गया
सीकेवाईसी असल में भारत सरकार की शुरू की गई एक बार होने वाली केंद्रीकृत केवाईसी प्रक्रिया है, जिसका मकसद फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन को आसान और तेज बनाना है। केवाईसी की तरह ही सीकेवाईसी का भी मुख्य लक्ष्य फाइनेंशियल फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों पर लगाम कसना है। इसके जरिए हर ग्राहक का फाइनेंशियल रिकॉर्ड एक ही जगह सुरक्षित रहता है, जिससे बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और भरोसा बना रहता है।
सीकेवाईसी से ग्राहकों को क्या फायदा मिलता है
सीकेवाईसी की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह सिर्फ एक बार होने वाली प्रक्रिया है। इसका मतलब है कि अलग-अलग बैंकों में बार-बार केवाईसी कराने की झंझट खत्म हो जाती है। अगर किसी ग्राहक के पास सीकेवाईसी नंबर मौजूद है, तो उसे हर बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट में दोबारा दस्तावेज इकट्ठा करके जमा कराने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे न सिर्फ समय की बचत होती है, बल्कि दस्तावेजों के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने से भी छुटकारा मिलता है। इसके अलावा जब किसी को नया बैंक खाता खुलवाना हो या पुराने खाते की केवाईसी डिटेल्स अपडेट करानी हो, तब भी अलग से कागजात जमा करने की जरूरत नहीं होती, सिर्फ 14 अंकों वाला सीकेवाईसी नंबर बताने से ही काम बन जाता है।
सीकेवाईसी नंबर कैसे हासिल करें
सीकेवाईसी नंबर पाने के तीन आसान तरीके हैं। सबसे पहला तरीका यह है कि ग्राहक सीधे अपने बैंक से संपर्क करके यह नंबर मांग सकते हैं। दूसरा तरीका है 7799022129 नंबर पर कॉल करना, जहां से भी सीकेवाईसी नंबर प्राप्त किया जा सकता है। तीसरा और सबसे सीधा तरीका है ckycindia.in पोर्टल पर जाकर वहां से सीकेवाईसी नंबर हासिल करना।
सीकेवाईसी के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होती है
सीकेवाईसी के लिए मुख्य रूप से तीन तरह के दस्तावेज मांगे जाते हैं। पहचान के प्रूफ के तौर पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस में से कोई एक दस्तावेज देना होता है। पते के प्रूफ के लिए बिजली बिल, पानी बिल, लैंडलाइन बिल, ब्रॉडबैंड बिल, रेंट एग्रीमेंट या ग्राहक के पते वाला कोई भी सरकारी दस्तावेज मान्य होता है। इसके साथ ही हाल-फिलहाल खिंचवाया गया एक पासपोर्ट साइज फोटो भी जमा करना जरूरी होता है।
ऑनलाइन सीकेवाईसी स्टेटस कैसे चेक करें
अपना सीकेवाईसी स्टेटस चेक करने के लिए सबसे पहले ckycindia.in पोर्टल पर जाना होता है। वहां अपना पैन नंबर या सीकेवाईसी नंबर डालने के बाद स्टेटस दिख जाता है। इस दौरान यह जरूर देख लेना चाहिए कि पोर्टल पर दर्ज सारी जानकारी अप-टू-डेट है या नहीं, ताकि आगे किसी भी बैंकिंग काम में दिक्कत न आए।
केवाईसी और सीकेवाईसी में फर्क क्या है
केवाईसी किसी एक खास बैंक या फाइनेंशियल कंपनी द्वारा की गई वेरिफिकेशन प्रक्रिया होती है, जिसे किसी दूसरे बैंक या फाइनेंशियल कंपनी में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। वहीं सीकेवाईसी एक केंद्रीय सिस्टम के जरिए होने वाली वेरिफिकेशन है, जिसे देश के किसी भी बैंक या फाइनेंशियल कंपनी में मान्यता मिलती है। यही वजह है कि सीकेवाईसी नंबर बनने के बाद ग्राहकों को बार-बार वेरिफिकेशन की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता।




















