प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो के मजबूत होने के बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। मौसम विज्ञानियों के अनुसार आने वाले महीनों में सर्दियों के दौरान तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। हालांकि इस वैश्विक फिनोमिना का असर अभी तक भारतीय उपमहाद्वीप पर पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाया है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिमालयी क्षेत्र में लगातार नए स्थानीय मौसम तंत्र सक्रिय हो रहे हैं। इसी वजह से देश के कई राज्यों में झमाझम बारिश का दौर जारी है।
उत्तर भारत में सक्रिय मौसम प्रणालियां
मध्य प्रदेश के मध्य भागों और उससे सटे दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक स्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके प्रभाव से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लगातार बारिश हो रही है। जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड की ऊंची पहाड़ियों से लेकर मैदानी इलाकों तक मौसम का मिजाज बदला हुआ है। बिहार और उत्तर प्रदेश में कई नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार कुछ क्षेत्रों में चालीस से पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
राज्यों के हिसाब से बारिश का अनुमान
राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छह सितंबर तक और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छह से आठ सितंबर के बीच मानसूनी गतिविधियां सक्रिय रहेंगी। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी राजस्थान में भी तीव्र वर्षा का अनुमान है। मध्य प्रदेश में इस नए सिस्टम का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिल रहा है, जहां पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में आठ सितंबर तक कई स्थानों पर भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। छत्तीसगढ़ और विदर्भ में भी दस सितंबर तक छिटपुट से लेकर व्यापक बारिश हो सकती है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों का हाल
पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल और सिक्किम में दस सितंबर तक बारिश का सिलसिला थमने वाला नहीं है। पश्चिम बंगाल में आठ और नौ सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। झारखंड में नौ सितंबर को जबकि बिहार में पांच से आठ सितंबर के बीच तेज बौछारें पड़ने की उम्मीद है। ओडिशा में नौ और दस सितंबर को भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी दस सितंबर तक कई स्थानों पर भारी मानसूनी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
पश्चिमी और दक्षिणी तटों का हाल
पश्चिमी भारत के कोंकण और गोवा में दस सितंबर तक लगातार बारिश का अनुमान लगाया गया है। इसके विपरीत गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र-कच्छ में हल्की और छिटपुट बारिश ही दर्ज की जाएगी, हालांकि मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। दक्षिण भारत में अगले छह से सात दिनों के दौरान मानसूनी गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहने की संभावना है। तटीय कर्नाटक में दस सितंबर तक गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है, जबकि तटीय आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्यों में इस दौरान छिटपुट बारिश की ही उम्मीद है।


















