उत्तराखंड में मानसून का मिजाज एक बार फिर आक्रामक हो चुका है, जिसके चलते पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक जनजीवन बुरी तरह प्रभावित नजर आ रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने 5 सितंबर को प्रदेश के कई प्रमुख जिलों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और पहाड़ों से लगातार मलबा गिरने का सिलसिला जारी है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
देहरादून और नैनीताल समेत इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 5 सितंबर को देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर, उत्तरकाशी और उधम सिंह नगर जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा राज्य के सभी तेरह जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और तेज बौछारें पड़ने का येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पिछले तीन दिनों से पहाड़ों पर रुक-रुक कर हो रही बरसात ने तापमान में भी भारी गिरावट ला दी है, जिससे मैदानी और पर्वतीय दोनों ही क्षेत्रों में हल्की ठंडक महसूस की जा रही है।
चमोली और पिथौरागढ़ में रास्ते बंद, संपर्क कटा
सीमांत जिलों में हालात सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। चमोली जिले में पिछले बहत्तर घंटों से जारी बारिश के कारण बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर नंदप्रयाग के पास पहाड़ी से भारी बोल्डर और मलबा लगातार गिर रहा है, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। हालांकि नेशनल हाईवे अथॉरिटी और लोक निर्माण विभाग की मशीनें मलबा हटाने के काम में जुटी हैं, लेकिन गिरते पत्थरों के कारण राहत कार्यों में बाधा आ रही है। इसके अलावा गोपेश्वर-चोपता मोटर मार्ग और लीसा फैक्ट्री बाईपास पर सड़क धंसने से वाहनों की आवाजाही रुक गई है। कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ जिले में भी सोलह महत्वपूर्ण सड़कें मलबे की चपेट में आने से बंद हो चुकी हैं, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।
नैनीताल में स्कूल बंद और मैदानी जिलों में सतर्कता
खराब मौसम और संभावित भूस्खलन को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। नैनीताल जिले में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन ने 5 सितंबर को सभी सरकारी, गैर-सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित कर दिया है। संवेदनशील पहाड़ी ढलानों पर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। उधर, उधम सिंह नगर के रुद्रपुर और काशीपुर जैसे मैदानी इलाकों में तेज बारिश के कारण निचले हिस्सों में जलभराव की आशंका जताई गई है, जिससे प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। राजधानी देहरादून और हरिद्वार में भी आकाशीय बिजली चमकने और तीव्र बौछारें पड़ने की चेतावनी के बीच गंगा नदी के जलस्तर पर पैनी नजर रखी जा रही है।
10 सितंबर तक राहत के कोई आसार नहीं
मौसम विभाग का कहना है कि उत्तराखंड के लोगों को फिलहाल इस मानसूनी आपदा से राहत मिलने वाली नहीं है। छह सितंबर को बागेश्वर, नैनीताल, पौड़ी, चमोली, देहरादून और हरिद्वार में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद सात सितंबर को भी नैनीताल, बागेश्वर, उधम सिंह नगर, पौड़ी, चमोली और पिथौरागढ़ के लिए तेज बारिश का अलर्ट है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक आठ, नौ और दस सितंबर को भी राज्य के अनेक हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और गर्जन के साथ बौछारें पड़ने का सिलसिला लगातार बना रहेगा।


















