भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 में बुधवार, 30 सितंबर को एक ऐतिहासिक बदलाव प्रभावी हो गया। देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज, बीएसई ने दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो की जगह लेते हुए पहली बार इस 50 शेयरों वाले प्रमुख बेंचमार्क में प्रवेश किया। इस बड़े मील के पत्थर के बावजूद बाजार में स्टॉक की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही। एनएसई पर बीएसई के शेयर तीन प्रतिशत की कमजोरी के साथ 3,103 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर कारोबार करते दिखे। पिछले पांच कारोबारी सत्रों की बात करें तो इस शेयर में कुल 5.29% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। अर्धवार्षिक सूचकांक फेरबदल के औपचारिक अमल के बीच निवेशकों की मुनाफावसूली और ब्रोकरेज रिपोर्टों ने कारोबारी रुख को प्रभावित किया है।
इंडेक्स में शामिल होने के लिए ऐसे तय हुई पात्रता
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई ने इस फेरबदल की घोषणा 10 अगस्त को की थी, जिसे 29 सितंबर को बाजार बंद होने के बाद प्रभावी बनाया गया। बीएसई की निफ्टी 50 में एंट्री के पीछे का मुख्य आधार उसका तेजी से बढ़ता फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन रहा है। पिछले एक साल के दौरान एक्सचेंज के मूल्यांकन में जबरदस्त उछाल देखा गया था। नवीनतम इंडेक्स समीक्षा आंकड़ों के अनुसार, बीएसई का छह महीने का औसत फ्री-फ्लोट मार्केट कैप करीब 1,40,879 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि इसकी तुलना में विप्रो का छह महीने का औसत आंकड़ा 55,930 करोड़ रुपये था। इंडेक्स चयन पद्धति के सख्त नियमों के तहत, किसी मौजूदा शेयर को बदलने के लिए नए पात्र शेयर का छह महीने का औसत फ्री-फ्लोट मार्केट कैप बाहर होने वाले शेयर से कम से कम 1.5 गुना अधिक होना अनिवार्य होता है। बीएसई इस पैमाने पर पूरी तरह खरा उतरा और उसने बेंचमार्क में अपनी जगह पक्की कर ली।
विप्रो निफ्टी नेक्स्ट 50 में हुआ शिफ्ट, शेयरों में उछाल
एक तरफ जहां बीएसई ने मुख्य सूचकांक में कदम रखा, वहीं दूसरी तरफ आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी विप्रो को मुख्य बेंचमार्क से बाहर होना पड़ा। विप्रो अब निफ्टी 50 से निकलकर निफ्टी नेक्स्ट 50 का हिस्सा बन गई है। बाजार के विश्लेषक पहले से ही विप्रो को निफ्टी 50 में बने रहने के लिहाज से कमजोर उम्मीदवारों में गिन रहे थे। मुख्य सूचकांक से हटने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि विप्रो व्यापक बाजार से बाहर हो गई है, वह अब भी निफ्टी 100 के दायरे में मजबूती से बनी हुई है। दिलचस्प बात यह रही कि जहां बीएसई के शेयर दबाव में दिखे, वहीं विप्रो के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। बुधवार की सुबह एनएसई पर विप्रो का शेयर 2.3% की तेजी के साथ 160.39 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा था। इस फेरबदल की वजह से निफ्टी 50 को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस कर रहे हैं, जिससे विप्रो से पूंजी निकासी देखने को मिल सकती है।
पैसिव इनफ्लो का अनुमान और ब्रोकरेज की बंटी हुई राय
निफ्टी 50 का हिस्सा बनने से बीएसई के शेयरों की संस्थागत मांग में बड़ा इजाफा होने का अनुमान है। एक्सिस कैपिटल के आकलन के मुताबिक, निफ्टी 50 को ट्रैक करने वाले इंडेक्स फंड करीब 1.57 करोड़ बीएसई शेयर खरीद सकते हैं, जिसका कुल मूल्य लगभग 657 मिलियन डॉलर बैठता है। हालांकि, शेयर में हालिया तेज रैली और इंडेक्स में आधिकारिक प्रवेश के बावजूद प्रमुख ब्रोकरेज हाउस निकट भविष्य के दृष्टिकोण पर एकमत नहीं हैं। मैक्वेरी ने बीएसई के आउटलुक पर भरोसा जताते हुए कहा है कि एक्सचेंज के सामने मौजूद व्यावसायिक अवसर वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2030 के बीच लगभग 16% राजस्व वृद्धि को सहारा दे सकते हैं। इसके विपरीत, जेफरीज और नुवामा ने नियामक बदलावों, सीएएस और ट्रेडिंग से जुड़े जोखिमों को रेखांकित किया है। नुवामा ने पिछले महीने ही बीएसई की रेटिंग 'बाय' से घटाकर 'होल्ड' कर दी थी और इसके टारगेट प्राइस को 4,090 रुपये से घटाकर 3,240 रुपये कर दिया था। उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 की समीक्षा के दौरान नुवामा ने बीएसई के निफ्टी 50 में शामिल होने की संभावना को शून्य आंका था और यहां तक कहा था कि एक्सचेंज का निफ्टी नेक्स्ट 50 में भी आना लगभग असंभव है।
निफ्टी 100 और निफ्टी नेक्स्ट 50 में भी बड़े बदलाव
इस अर्धवार्षिक फेरबदल का असर अन्य प्रमुख सूचकांकों पर भी व्यापक रूप से पड़ा है। बीएसई अब निफ्टी मिडकैप 150 से बाहर होकर निफ्टी 100 का हिस्सा बन चुका है। निफ्टी 100 इंडेक्स में बीएसई के साथ हिताची एनर्जी इंडिया, पॉलीकैब इंडिया, वेदांता एल्युमिनियम मेटल और वोडाफोन आइडिया को नए सदस्यों के रूप में जोड़ा गया है। वहीं, निफ्टी नेक्स्ट 50 के ढांचे में भी पांच बड़े परिवर्तन किए गए हैं। इस सूचकांक में विप्रो के अलावा हिताची एनर्जी इंडिया, पॉलीकैब इंडिया, वेदांता एल्युमिनियम मेटल और वोडाफोन आइडिया ने आधिकारिक तौर पर प्रवेश किया है। इन बदलावों के चलते पैसिव फंडों द्वारा संबंधित कंपनियों के शेयरों में बड़े पैमाने पर पोर्टफोलियो एडजस्टमेंट किए जा रहे हैं।



















