ITR फाइलिंग में सिर्फ फॉर्म-16 पर भरोसा पड़ेगा भारी, AIS और 26AS से मिलान न करने पर आ सकता है इनकम टैक्‍स का नोटिसमनी
3 घंटे पहले· 0

ITR फाइलिंग में सिर्फ फॉर्म-16 पर भरोसा पड़ेगा भारी, AIS और 26AS से मिलान न करने पर आ सकता है इनकम टैक्‍स का नोटिस

इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने से पहले फॉर्म-16 के आंकड़ों को AIS और फॉर्म 26AS से मिलाना जरूरी है, वरना नोटिस और रिफंड अटकने की नौबत आ सकती है। जानिए तीनों दस्‍तावेजों का मिलान कैसे करें।

नया वित्‍त वर्ष शुरू होते ही इनकम टैक्‍स रिटर्न दाखिल करने का सिलसिला चल पड़ा है और अब इसकी आखिरी तारीख भी ज्‍यादा दूर नहीं रही। नौकरी करने वालों के लिए यह बात खास तौर पर मायने रखती है, क्‍योंकि उन्‍हें हर हाल में 31 जुलाई तक अपना रिटर्न जमा करना है। ज्‍यादातर कंपनियां अपने कर्मचारियों को फॉर्म-16 सौंप चुकी हैं, यानी रिटर्न भरने का रास्‍ता खुल चुका है। लेकिन अगर आपकी सोच यह है कि अकेला फॉर्म-16 ही पूरा काम कर देगा, तो यहीं चूक हो सकती है।

सिर्फ फॉर्म-16 क्‍यों नाकाफी है

रिटर्न भरने से पहले अपने सभी आंकड़ों को AIS और फॉर्म 26AS से मिलाना उतना ही जरूरी है जितना खुद रिटर्न भरना। ऐसा न करने पर इनकम टैक्‍स विभाग की ओर से नोटिस आ सकता है। दरअसल विभाग ने कुछ बरस पहले ही एनुअल इन्‍फॉर्मेशन स्‍टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS की व्‍यवस्‍था लागू की थी। इन दोनों दस्‍तावेजों में टैक्‍सपेयर से जुड़ी तमाम जानकारी दर्ज रहती है, इसीलिए विभाग हर करदाता से कहता है कि वह अपने आंकड़े इनसे जरूर मिला ले। अगर इनमें कहीं भी आंकड़ों का अंतर पकड़ा गया, तो संबंधित करदाता को नोटिस थमाया जा सकता है। इतना ही नहीं, रिटर्न भर देने के बाद भी आपका रिफंड बीच में अटक सकता है।

AIS में क्‍या-क्‍या दर्ज होता है

एनुअल इन्‍फॉर्मेशन स्‍टेटमेंट को आप पूरे साल के लेनदेन का बारीक हिसाब-किताब कह सकते हैं। नाम से ही साफ है कि इसमें करदाता की सालभर की कमाई और खर्च का पूरा ब्‍योरा रहता है। इसके दायरे में आपकी सैलरी और दूसरे स्रोतों से होने वाली आमदनी, बैंक में जमा सेविंग, एफडी पर मिला ब्‍याज, शेयर तथा म्‍यूचुअल फंड में लगाया गया पैसा और उस पर हासिल रिटर्न, डिविडेंड के साथ-साथ प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्‍त तक का लेखा-जोखा शामिल होता है।

फॉर्म 26AS की भूमिका

इनकम टैक्‍स विभाग की ओर से जारी होने वाला फॉर्म 26AS आपके पैन से जुड़ा टैक्‍स स्‍टेटमेंट है। इसमें आपकी आमदनी पर कटे टीडीएस और टीसीएस की पूरी जानकारी तो रहती ही है, साथ ही आपकी ओर से चुकाए गए एडवांस टैक्‍स या सेल्‍फ असेसमेंट टैक्‍स का भी पूरा हिसाब दर्ज होता है। जब आप रिटर्न भरने बैठेंगे तो यही सारी जानकारी आपके फॉर्म-16 में भी मौजूद मिलेगी। इसलिए समझदारी इसी में है कि रिटर्न भरने से पहले फॉर्म-16 की हर जानकारी को इन दोनों फॉर्म से मिला लें और आईटीआर फॉर्म में केवल सही जानकारी ही दर्ज करें।

नोटिस से बचने का तरीका

रिटर्न दाखिल करने से पहले फॉर्म-16, फॉर्म 26AS और AIS में दिए गए विवरणों को आपस में मिलाना सबसे पहला कदम है।

  • जब तीनों दस्‍तावेजों में आमदनी और टैक्‍स कटौती एक जैसी दिखे, तभी वह जानकारी आईटीआर में भरें।
  • अगर AIS में कोई ऐसी एंट्री या डिटेल दिखे जो आपने की ही नहीं है, तो पहले इनकम टैक्‍स पोर्टल पर मौजूद AIS फीडबैक फीचर के जरिए उसे ठीक करा लें।
  • अगर आपकी कोई कमाई AIS में दर्ज नहीं हो रही, तब भी उसकी जानकारी आईटीआर में जरूर दें, ताकि आगे चलकर कोई दिक्‍कत न हो और नोटिस का सामना न करना पड़े।
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