जीवन के चौथे दशक में पहुंचने के बाद अक्सर लोग यह सोचने लगते हैं कि आर्थिक रूप से मजबूत होने या रिटायरमेंट फंड तैयार करने के लिए बहुत देर हो चुकी है। हालांकि वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि 40 की उम्र के बाद भी एक बड़ा और सुरक्षित फंड बनाया जा सकता है। रिटायरमेंट के लिए 15 से 20 साल का समय पर्याप्त माना जाता है, बशर्ते निवेश की योजना पूरी तरह से स्पष्ट, अनुशासित और नियमित हो। इस उम्र में ज्यादातर पेशेवरों की कमाई अपने उच्चतम स्तर पर होती है, जिसका सही इस्तेमाल करके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
महीने की कमाई और घरेलू खर्चों का सटीक आकलन
एक मजबूत वित्तीय नींव रखने के लिए सबसे पहला कदम अपने बजट को समझना है। निवेश शुरू करने से पहले अपनी हर महीने की कुल आय और अनिवार्य खर्चों की एक विस्तृत सूची बनाना बेहद जरूरी है। इसमें घर का किराया या होम लोन की ईएमआई, कार लोन, बच्चों की पढ़ाई का खर्च, मेडिकल और जीवन बीमा का प्रीमियम, बिजली और पानी का बिल, राशन तथा अन्य दैनिक खर्च शामिल होने चाहिए। जब आप इन सभी खर्चों को अपनी आय से घटाते हैं, तो हर महीने की वास्तविक बचत का पता चलता है। यही बचा हुआ पैसा आपके भावी निवेश का आधार बनता है।
रिटायरमेंट प्लानिंग को पहली प्राथमिकता देना
40 की उम्र में किसी भी व्यक्ति के सामने बच्चों की उच्च शिक्षा, उनकी शादी या नया मकान खरीदने जैसे कई बड़े लक्ष्य खड़े होते हैं। इन पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करते समय अक्सर लोग अपनी रिटायरमेंट की तैयारी को नजरअंदाज कर देते हैं। यह एक बड़ी वित्तीय भूल साबित हो सकती है। बच्चों की पढ़ाई के लिए बैंकों से एजुकेशन लोन मिल सकता है और घर खरीदने के लिए होम लोन उपलब्ध रहता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद दैनिक जीवन के खर्चों को चलाने के लिए कोई बैंक लोन नहीं देता। 40 से 60 वर्ष की आयु के बीच व्यक्ति की आय सबसे अधिक होती है, इसलिए इस समयावधि का अधिकतम लाभ उठाकर रिटायरमेंट कॉर्पस को प्राथमिक लक्ष्य बनाना चाहिए।
मार्केट के उतार-चढ़ाव का इंतजार छोड़ नियमित एसआईपी शुरू करना
निवेश के मामले में एक आम धारणा यह है कि जब शेयर बाजार में गिरावट आएगी, तब पैसा लगाना शुरू करेंगे। इस इंतजार में कई महीने और साल बीत जाते हैं, जिससे समय का अमूल्य फायदा हाथ से निकल जाता है। बाजार की सटीक दिशा का अनुमान लगाना किसी के लिए भी संभव नहीं है। बाजार के सही समय पर होने का इंतजार करने के बजाय म्यूचुअल फंड में व्यवस्थित निवेश योजना यानी SIP के जरिए हर महीने नियमित रकम लगाना एक समझदारी भरा निर्णय होता है। एसआईपी के माध्यम से बाजार के उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम हो जाता है, जिसे कॉस्ट एवेरेजिंग कहते हैं, और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
इक्विटी और फिक्स्ड इनकम के बीच सही संतुलन बनाना
बढ़ती उम्र के साथ कई निवेशक शेयर बाजार से पूरी तरह दूरी बना लेते हैं और सुरक्षित माने जाने वाले विकल्पों की ओर झुक जाते हैं। हालांकि यदि रिटायरमेंट में अभी 15 से 20 साल का समय बचा है, तो पोर्टफोलियो में इक्विटी की भागीदारी बहुत जरूरी है। केवल फिक्स्ड डिपॉजिट या पारंपरिक योजनाओं में पैसा रखने से महंगाई दर को हराना मुश्किल हो जाता है। इसके विपरीत, पूरा पैसा इक्विटी में लगाना भी जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए अपनी उम्र, जोखिम सहने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार इक्विटी, डेट फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट के बीच एक संतुलित एसेट एलोकेशन बनाना चाहिए।
बीमा सुरक्षा और आपातकालीन फंड का निर्माण
संपत्ति बनाने के साथ-साथ बने बनाए फंड की सुरक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। 40 की उम्र के आसपास परिवार की निर्भरता सबसे अधिक होती है। ऐसे में पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस और एक सही टर्म लाइफ इंश्योरेंस कवर होना अनिवार्य है। इसके अलावा, कम से कम 6 महीने के पारिवारिक खर्च के बराबर एक आपातकालीन फंड अलग रखना चाहिए। यह फंड किसी तरल एसेट में होना चाहिए ताकि नौकरी जाने या किसी चिकित्सीय आपात स्थिति के समय इसका इस्तेमाल किया जा सके। आपातकालीन फंड रहने से आपको अपने लंबी अवधि के निवेश को असमय बेचने की जरूरत नहीं पड़ती।
प्रतिवर्ष निवेश की राशि में वृद्धि करना
निवेश की शुरुआत करने के बाद राशि को स्थिर छोड़ देने के बजाय उसमें समय-समय पर बढ़ोतरी करनी चाहिए। जब भी आपकी सैलरी में इंक्रीमेंट हो या कोई वार्षिक बोनस मिले, तो अपनी एसआईपी या निवेश राशि में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का नियम बनाएं। इसे स्टेप-अप निवेश कहा जाता है। हर साल थोड़ा सा अतिरिक्त निवेश लंबी अवधि में कंपाउंडिंग की ताकत से आपके अंतिम कॉर्पस को बहुत बड़ा बना देता है। इसके साथ ही, वर्ष में कम से कम एक बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा अवश्य करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपका निवेश आपके तय लक्ष्यों के अनुरूप दिशा में आगे बढ़ रहा है।
व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार फंड का निर्धारण
हर व्यक्ति के लिए रिटायरमेंट फंड की एक निश्चित रकम तय नहीं की जा सकती। किसी के लिए 1 करोड़ रुपये पर्याप्त हो सकते हैं, तो किसी अन्य के लिए 5 करोड़ रुपये भी कम पड़ सकते हैं। रिटायरमेंट के लिए आवश्यक कुल कॉर्पस आपकी वर्तमान जीवनशैली, शहर के खर्च, स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं और अनुमानित जीवन प्रत्याशा पर निर्भर करता है। वित्तीय रूप से स्वतंत्र होने का कोई एक जादुई आंकड़ा नहीं होता। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निवेश शुरू करने के लिए कल का इंतजार न किया जाए। 40 की उम्र के बाद भी सही योजना, अनुशासित बचत और निरंतरता के साथ एक बेहद सुरक्षित आर्थिक भविष्य तैयार किया जा सकता है।



















