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प्रॉपर्टी की केवल रजिस्ट्री नहीं है काफी, मालिकाना हक के लिए जरूरी हैं ये 5 अहम दस्तावेजमनी
28 जुल॰ 2026, 1:22 am (6 घंटे पहले)· 1

प्रॉपर्टी की केवल रजिस्ट्री नहीं है काफी, मालिकाना हक के लिए जरूरी हैं ये 5 अहम दस्तावेज

नया घर या प्लॉट खरीदने के बाद सिर्फ सेल डीड करवाना पूर्ण स्वामित्व की गारंटी नहीं देता। जानिए वे कौन से पांच अनिवार्य दस्तावेज हैं जो आपको धोखाधड़ी से बचाते हैं।

नया मकान, प्लॉट या फ्लैट खरीदने और उसकी रजिस्ट्री पूरी होते ही अधिकतर लोग मान लेते हैं कि संपत्ति पूरी तरह से उनके नाम हो चुकी है। हालांकि, भारतीय संपत्ति कानून का ढांचा यह स्पष्ट करता है कि केवल सेल डीड या रजिस्ट्री करवाना ही मालिकाना हक का अंतिम साक्ष्य नहीं होता। वास्तव में रजिस्ट्री केवल इस बात का कानूनी प्रमाण प्रस्तुत करती है कि विक्रेता ने तय राशि प्राप्त करके संपत्ति हस्तांतरित करने का करार स्वीकार कर लिया है। यदि आप कोर्ट-कचहरी, बैंक ऋण प्रक्रिया और भविष्य में होने वाले किसी भी वित्तीय या कानूनी विवाद से बचना चाहते हैं, तो आपके पास कुछ अन्य अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेजों का होना भी अनिवार्य है।

1. म्यूटेशन सर्टिफिकेट या दाखिल-खारिज

प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री निष्पादित होने के तुरंत पश्चात सबसे पहला कार्य दाखिल-खारिज अथवा म्यूटेशन प्रक्रिया को संपन्न कराना होता है। इस प्रशासनिक कार्यवाही के माध्यम से स्थानीय राजस्व विभाग या नगर निगम के सरकारी अभिलेखों में पुराने स्वामी का नाम निरस्त करके नए खरीदार का नाम दर्ज किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति म्यूटेशन नहीं करवाता, तो सरकारी रिकॉर्ड में पुराना मालिक ही पंजीकृत रहता है। ऐसी स्थिति में वह व्यक्ति उस प्रॉपर्टी पर बैंक से लोन प्राप्त कर सकता है अथवा नए खरीदार को धोखाधड़ी का शिकार बना सकता है।

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2. पजेशन लेटर या कब्जा पत्र

संपत्ति के पूर्ण हस्तांतरण के समय विक्रेता या बिल्डर द्वारा जारी किया जाने वाला पजेशन लेटर एक लिखित साक्ष्य की भांति कार्य करता है। यह पत्र आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि करता है कि संपत्ति का भौतिक कब्जा भौतिक रूप से खरीदार को सौंप दिया गया है। बिना पजेशन लेटर के केवल कागजी रजिस्ट्री को कानूनी दृष्टि से अधूरा माना जाता है।

3. एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट (भारमुक्त प्रमाण पत्र)

यह प्रमाण पत्र इस तथ्य को सत्यापित करता है कि विचाराधीन संपत्ति पर पूर्व का कोई बकाया ऋण, बैंक बंधक या न्यायिक विवाद लंबित नहीं है। एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट प्राप्त करने से यह सुनिश्चित हो जाता है कि संपत्ति पूरी तरह से भारमुक्त है और इस पर कोई कानूनी रोड़ा मौजूद नहीं है।

4. संपत्ति कर की रसीद

रजिस्ट्री एवं म्यूटेशन के पश्चात नगर निगम अथवा स्थानीय विकास प्राधिकरण में अपने नाम से प्रॉपर्टी टैक्स अकाउंट खुलवाना आवश्यक होता है। जब खरीदार स्वयं के नाम से नियमित रूप से संपत्ति कर का भुगतान करता है और उसकी प्रामाणिक रसीद संभालकर रखता है, तो यह दस्तावेज अदालती कार्रवाइयों के दौरान निर्विवाद मालिकाना हक सिद्ध करने में अत्यंत महत्वपूर्ण साक्ष्य बनता है।

5. एनओसी और बिजली-पानी कनेक्शन ट्रांसफर

यदि कोई व्यक्ति किसी हाउसिंग सोसाइटी या बहुमंजिला अपार्टमेंट में फ्लैट खरीद रहा है, तो उसे रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) अथवा संबंधित बिल्डर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट प्राप्त करना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही, संपत्ति पर अपना अधिकार मजबूत करने के लिए बिजली और पानी के बिलों को भी अविलंब अपने नाम पर स्थानांतरित करा लेना चाहिए।

सवाल-जवाब

क्या केवल रजिस्ट्री कराने से मकान का मालिकाना हक मिल जाता है?
नहीं, रजिस्ट्री केवल इस बात का कानूनी प्रमाण है कि संपत्ति ट्रांसफर का समझौता हुआ है। पूर्ण मालिकाना हक के लिए म्यूटेशन, पजेशन लेटर और टैक्स रसीद जैसे दस्तावेज आवश्यक हैं।
म्यूटेशन या दाखिल-खारिज करवाना क्यों जरूरी है?
म्यूटेशन से नगर निगम या राजस्व विभाग के सरकारी रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम हटकर नए खरीदार का नाम दर्ज होता है, जिससे भविष्य की धोखाधड़ी रुकती है।
एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट का क्या महत्व है?
एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट यह प्रमाणित करता है कि खरीदी जा रही संपत्ति पर कोई पुराना बकाया लोन, बैंक बंधक या कानूनी विवाद नहीं है।
क्या प्रॉपर्टी टैक्स रसीद अदालत में मालिकाना हक साबित कर सकती है?
हां, अपने नाम से नियमित संपत्ति कर का भुगतान करना और उसकी रसीद रखना अदालतों में मालिकाना हक का एक मजबूत साक्ष्य माना जाता है।
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