भारतीय स्टेट बैंक के बाद देश में ग्राहक संख्या के मामले में दूसरा स्थान रखने वाला सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक अपने खाताधारकों को सावधि जमा पर आकर्षक लाभ दे रहा है। बैंक की अलग-अलग समयावधि वाली जमा योजनाओं में ब्याज की सीमा 3.00 प्रतिशत से लेकर 7.40 प्रतिशत के बीच तय की गई है। सुरक्षित रिटर्न और निश्चित आय चाहने वाले निवेशकों के बीच बैंक की विशेष अवधि वाली योजनाएं काफी लोकप्रिय रहती हैं, जिनमें 666 दिनों का विकल्प मुख्य आकर्षण बना हुआ है।
जमा अवधि और समय सीमा के विकल्प
बैंक में बचतकर्ताओं के लिए कम से कम 7 दिनों की सबसे छोटी अवधि से लेकर अधिकतम 10 सालों की लंबी अवधि तक सावधि जमा खाता खोलने की सुविधा मौजूद है। विभिन्न लक्ष्यों के अनुसार लोग अपने पैसे को छोटी या लंबी मियाद के लिए लॉक कर सकते हैं। विशेष रूप से 666 दिनों की अवधि वाले खाते में निवेशकों को उनकी उम्र के वर्ग के आधार पर 6.50 प्रतिशत से लेकर 7.30 प्रतिशत तक का सालाना ब्याज दिया जा रहा है।
666 दिनों के निवेश पर उम्र के हिसाब से रिटर्न
पंजाब नेशनल बैंक में 666 दिनों के विकल्प के तहत अलग-अलग आयु वर्ग के लिए ब्याज दरें अलग रखी गई हैं। 59 साल तक की उम्र वाले सभी सामान्य नागरिकों को इस खाते पर 6.50 प्रतिशत का सालाना ब्याज मिल रहा है। वहीं 60 साल या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक ने इसी 666 दिनों की जमा पर 7.00 प्रतिशत की ब्याज दर निर्धारित की है। सबसे अधिक फायदा 80 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग में आने वाले अति वरिष्ठ नागरिकों को दिया जा रहा है, जिन्हें इस अवधि पर 7.30 प्रतिशत का ब्याज ऑफर किया गया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी आकर्षक दरें 3 करोड़ रुपये से कम के कुल जमा पर प्रभावी हैं।
वरिष्ठ और अति वरिष्ठ नागरिकों को अतिरिक्त लाभ
वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बैंक अपनी नियमित दरों से अतिरिक्त मार्जिन देता है। सामान्य नागरिकों के मुकाबले 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को 0.50 प्रतिशत अधिक ब्याज मिलता है। इसके साथ ही अति वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य वरिष्ठ नागरिकों की तुलना में भी 0.30 प्रतिशत अतिरिक्त मुनाफा प्रदान किया जाता है। बैंक ने अपने फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े नियमों और ब्याज दरों की समीक्षा करते हुए आखिरी बार 1 जून, 2026 को इनमें संशोधन लागू किया था।
रेपो रेट और बैंक जमा दरों का सीधा संबंध
बैंकों द्वारा अपनी जमा योजनाओं पर तय की जाने वाली ब्याज दरें पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं होतीं, बल्कि वे सीधे तौर पर भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट से जुड़ी होती हैं। देश का केंद्रीय बैंक हर दो महीने में अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक करता है। इस बैठक में देश की व्यापक आर्थिक स्थिति, महंगाई के आंकड़े और बाजार में नकदी के प्रवाह जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की समीक्षा के बाद रेपो दर तय होती है, जिसके आधार पर पंजाब नेशनल बैंक सहित सभी वाणिज्यिक बैंक अपनी ऋण और जमा दरों में बदलाव करते हैं।





















