पश्चिम एशिया में सुरक्षा संकट एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जहां सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने सीधे तौर पर तेहरान पर यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा किए जा रहे हमलों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। सऊदी विदेश मंत्रालय में सार्वजनिक कूटनीति के उप मंत्री रायद क्रिमली ने स्पष्ट किया कि रियाद को संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अपने व्यापक गतिरोध में ईरान की ओर से आवश्यक समझौते करने की कोई इच्छा दिखाई नहीं दे रही है। यह बयान सऊदी अरब के रणनीतिक और नागरिक ठिकानों पर एक सप्ताह से अधिक समय तक लगातार हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों के फौरन बाद सामने आया है, जिसने क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं के सामने भारी अनिश्चितता खड़ी कर दी है।
सऊदी ठिकानों पर तेज हुए हमले और जनहानि
हाल के दिनों में हुए इन हमलों का मुख्य निशाना सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, दिग्गज तेल कंपनी अरामको का मुख्यालय, और कई प्रमुख विमानन, ऊर्जा और सैन्य प्रतिष्ठान रहे हैं। रायद क्रिमली ने जानकारी दी कि इन हिंसक छापों में विदेशी नागरिकों सहित कम से कम 19 लोगों की मौत हो चुकी है। सऊदी अधिकारियों ने निर्दोष नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर की गई इन हत्याओं को युद्ध अपराध करार दिया है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के एक प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की है कि अकेले इसी महीने किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को 20 बार हूती हमलों का सामना करना पड़ा है, जो सुरक्षा चुनौतियों की भयावहता को दर्शाता है।
इस नए उपद्रव ने पड़ोसी देश यमन की सीमा से लगातार दागी जा रही मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने में सऊदी अरब की जमीनी कठिनाइयों को भी उजागर किया है। इन हमलों ने वैश्विक बाजारों पर भी भारी दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय निवेशक और वित्तीय विशेषज्ञ महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों के जोखिमों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। रायद क्रिमली के अनुसार, इस गंभीर स्थिति ने संयुक्त राज्य अमेरिका सहित अपने पारंपरिक सहयोगियों से अतिरिक्त सैन्य सहायता मांगने की सऊदी अरब की अपीलों को और तेज कर दिया है। ये ताजा हमले ऐसे समय में हो रहे हैं जब ईरान से जुड़े एक व्यापक क्षेत्रीय टकराव की तपिश चारों तरफ महसूस की जा रही है।
ओमान में शांति वार्ता की पहल और हूतियों की आक्रामकता
रायद क्रिमली ने बताया कि सऊदी अरब ने तनाव कम करने के लिए ओमान में हूती प्रतिनिधियों के साथ सीधी बातचीत की ईमानदार कोशिश की थी। सऊदी अधिकारियों का कहना है कि यह औपचारिक निमंत्रण कई हफ्ते पहले भेजा गया था, जिसका एकमात्र उद्देश्य विवादों को बातचीत से सुलझाना और जारी हिंसा पर तत्काल रोक लगाना था। हालांकि, हूती गुट ने इस शांति बैठक के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। इस कूटनीतिक इनकार के तुरंत बाद, हूती लड़ाकों ने यमन के लाल सागर तट पर एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया और अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
हूती विद्रोहियों की इस आक्रामक चाल ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित क्षेत्रों पर उनका नियंत्रण स्थापित कर दिया। यह इलाका अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक शिपिंग के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है और होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक अहम वैकल्पिक समुद्री मार्ग प्रदान करता है। इस रणनीतिक बढ़त के जवाब में, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसी महीने यमन में खोए हुए इलाकों को वापस हासिल करने के लिए एक बड़ा सैन्य अभियान छेड़ा। इस भीषण जमीनी और हवाई संघर्ष ने सऊदी अरब और ईरान के बीच राजनयिक तनाव को अचानक बढ़ा दिया है, जबकि दोनों देशों ने कुछ ही समय पहले अपने आपसी संबंध बहाल किए थे।
बीजिंग समझौते की अवहेलना और हथियारों की आपूर्ति
रायद क्रिमली ने तेहरान की भूमिका पर कड़े शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा कि संघर्ष के इस अंतिम चरण में हूतियों द्वारा बढ़ाया जा रहा तनाव वास्तव में ईरान द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान लगातार हूती मिलिशिया को आधुनिक हथियार मुहैया करा रहा है, उन्हें प्रशिक्षण दे रहा है और रणनीतिक समर्थन प्रदान कर रहा है। सऊदी उप मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का खुला उल्लंघन है। इसके अलावा, यह आचरण उस बीजिंग समझौते के तहत की गई ईरानी प्रतिबद्धताओं के भी खिलाफ है, जिसके जरिए सात साल के लंबे गतिरोध के बाद सऊदी अरब और ईरान ने अपने औपचारिक राजनयिक संबंध बहाल किए थे।
रायद क्रिमली ने स्पष्ट किया कि ईरानी बयानों में संवाद का समर्थन किए जाने के बावजूद, सऊदी अरब ने कभी भी ईरान से मध्यस्थता करने का अनुरोध नहीं किया है। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब हूतियों के साथ सीधे संचार माध्यम बनाए हुए है, और ओमान केवल इन वार्ताओं के लिए एक सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करता है, न कि किसी मध्यस्थ के रूप में। इसके साथ ही, सऊदी अरब ईरान की सरकार से भी सीधे संपर्क में है। हवाई अड्डे पर हुए हालिया हमलों के दौरान भी सऊदी अरब और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर कम से कम एक बार सीधी बातचीत हुई थी।
परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा पर धीमी कूटनीति
व्यापक ईरानी संकट के संदर्भ में, रायद क्रिमली ने कहा कि सऊदी अरब कतर और पाकिस्तान द्वारा की जा रही उन मध्यस्थता कोशिशों का समर्थन करता है, जिनका मकसद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को पटरी पर बनाए रखना है। उन्होंने खुलासा किया कि इस समय मध्यस्थ दो मुख्य मोर्चों पर काम कर रहे हैं। पहला मोर्चा होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवागमन सुनिश्चित करने से जुड़ा है, जिसके बदले में ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी को समाप्त करने की बात है, जो विशेष रूप से ईरानी तेल निर्यात को प्रभावित करती है।
दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर औपचारिक वार्ताओं के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी रूपरेखा तैयार करना है। हालांकि, रायद क्रिमली ने मध्यस्थों के प्रस्तावों पर ईरान के सुस्त और टालमटोल भरे रवैये की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि दोनों ही मोर्चों पर ईरानी पक्ष किसी भी नए प्रस्ताव के साथ मध्यस्थों के पास लौटने में बहुत लंबा समय लेता है, और जब वे वापस आते भी हैं, तो उनकी बातें पूरी तरह अपर्याप्त होती हैं।
क्रिमली ने आगे कहा कि इसके बाद ईरानी वार्ताकार होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थायी व्यवस्था की बातें शुरू कर देते हैं, और कभी इस चीज तो कभी उस चीज के लिए तदर्थ व्यवस्था का प्रस्ताव रखते हैं। नतीजतन, कई हफ्ते और महीने केवल इसी तरह की आगे-पीछे चलने वाली बहसों में बर्बाद हो जाते हैं। सऊदी राजनयिक के मुताबिक, ईरानी पक्ष उन आवश्यक समझौतों और सर्वसम्मति तक पहुंचने में असमर्थ लगता है जो इस लंबे संकट के शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता साफ कर सकें। इस संबंध में ईरानी अधिकारियों ने फिलहाल अपनी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
रूस, चीन और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण
रायद क्रिमली ने यह आशंका भी जताई कि सऊदी अरब का मानना है कि चीन और रूस भी ईरान और हूतियों को मिल रहे गुप्त समर्थन से जुड़े हो सकते हैं, हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई विस्तृत ब्योरा नहीं दिया। उन्होंने टिप्पणी की कि ईरान और हूतियों की कुछ सैन्य क्षमताएं अथवा खुफिया सामग्रियां रूस या चीन के कुछ तत्वों, यहां तक कि व्यावसायिक माध्यमों से आती हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि सऊदी अरब चीन और रूस दोनों के साथ इन संवेदनशील विषयों पर नियमित चर्चा करता है और भविष्य में भी इन वार्ताओं को जारी रखेगा।
हाल ही में सामने आए एक दस्तावेज में यह भी दावा किया गया था कि हूती विद्रोही चीनी कलपुर्जों का इस्तेमाल करके एक नई और उन्नत मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली विकसित करने की जुगत में हैं। इस बीच, रायद क्रिमली ने कहा कि सऊदी अरब गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के सदस्य देशों के साथ निकट संपर्क में बना हुआ है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल है। संयुक्त अरब अमीरात पूर्व में यमन गठबंधन का एक प्रमुख साझेदार था, लेकिन कुछ मतभेदों के चलते उसने महीनों पहले गठबंधन से अपने कदम पीछे खींच लिए थे।
सऊदी उप मंत्री ने पाकिस्तान और तुर्की के साथ सऊदी अरब द्वारा हस्ताक्षरित किए गए हालिया पारस्परिक रक्षा समझौते का भी उल्लेख किया। हालांकि, क्रिमली ने इस पर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की कि यदि यमन से हूती हमले इसी तरह जारी रहते हैं तो ये रक्षा सहयोगी देश किस तरह की सक्रिय सहायता प्रदान करेंगे। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है जब सऊदी अरब यमन से लगातार उत्पन्न हो रहे सुरक्षा खतरों का गहन रणनीतिक मूल्यांकन कर रहा है, जबकि साथ ही वह ईरान और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ कूटनीतिक संवाद के दरवाजे भी खुले रखे हुए है।

















