म्यूचुअल फंड जगत में निवेशकों के हितों की सुरक्षा को लेकर दो प्रमुख फंड हाउसों ने कड़े एहतियाती कदम उठाए हैं। कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी ने अपनी दो डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं में ताजा सब्सक्रिप्शन को फौरी तौर पर निलंबित कर दिया है। यह कदम यस बैंक के एडिशनल टियर 1 यानी एटी1 बॉन्ड से जुड़ी अनिश्चितताओं और अदालती घटनाक्रम के असर को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। फंड हाउस ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले ही यह रोक लागू कर दी थी, ताकि मौजूदा निवेशकों के पोर्टफोलियो पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।
कोटक की प्रभावित डेट योजनाएं और बॉन्ड का इतिहास
कोटक म्यूचुअल फंड की जिन दो योजनाओं में नए निवेश रोके गए हैं, उनमें कोटक मीडियम टर्म फंड और कोटक क्रेडिट रिस्क फंड शामिल हैं। इन दोनों ही पोर्टफोलियो में यस बैंक के एटी1 बॉन्ड मौजूद हैं। मार्च 2020 में जब संकटग्रस्त यस बैंक का पुनर्गठन हुआ था, तब इन बॉन्ड की वैल्यू घटाकर शून्य कर दी गई थी और एएमसी ने इन्हें पूरी तरह बट्टे खाते में डाल दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इन एटी1 बॉन्ड को फिर से बहाल करने का फैसला सुनाया।
इस कानूनी घटनाक्रम के बाद परिसंपत्ति मूल्यांकन में होने वाले किसी भी बड़े उतार-चढ़ाव से योजनाओं को बचाने के लिए कोटक महिंद्रा एएमसी ने पहले ही सतर्कता बरती। फंड हाउस के अनुसार, दोनों योजनाओं में नए सब्सक्रिप्शन को पहले ही निलंबित करना एक दूरदर्शी कदम था, जिसका मकसद यूनिटधारकों के हितों को सुरक्षित रखना था। फंड हाउस ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अदालत के पूरे फैसले की समीक्षा कर रहा है और इस कानूनी विश्लेषण के आधार पर ही आगे की कार्ययोजना तय की जाएगी।
मूल्यांकन और यूनिटधारकों के हितों का संतुलन
कोटक महिंद्रा एएमसी ने बताया कि इससे पहले भी बाजार की असाधारण परिस्थितियों में इस तरह के एहतियाती फैसले लिए जाते रहे हैं। यह निलंबन पूरी तरह से अस्थायी है। जब किसी डेट फंड में रखे गए बॉन्ड की वैल्यू शून्य से अचानक बदलकर बहाल होती है, तो फंड की नेट एसेट वैल्यू यानी एनएवी में तेज बदलाव की संभावना बन जाती है। ऐसे समय में यदि नए निवेशक पुरानी कम एनएवी पर भारी पूंजी लगा दें, तो इससे पुराने निवेशकों को मिलने वाला संभावित फायदा बंट सकता है। इसी असमानता को रोकने और लेन-देन को पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रबंधन ने यह अस्थायी रोक लगाई है।
टाटा गोल्ड ईटीएफ फंड ऑफ फंड पर भी लगीं पाबंदियां
एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में टाटा म्यूचुअल फंड ने भी अपनी एक प्रमुख कमोडिटी योजना में ताजा पूंजी प्रवाह को नियंत्रित करने का निर्णय लिया है। फंड हाउस ने घोषणा की है कि वह 16 अक्टूबर से टाटा गोल्ड ईटीएफ फंड ऑफ फंड में नए और अतिरिक्त एकमुश्त निवेश, स्विच-इन, टॉप-अप के साथ-साथ नए एसआईपी और एसटीपी पंजीकरण पर अस्थायी रूप से रोक लगा रहा है। फंड हाउस का कहना है कि यह बदलाव केवल कुछ समय के लिए लागू किया गया है।
हालांकि टाटा म्यूचुअल फंड ने अपने मौजूदा निवेशकों को राहत देते हुए स्थिति स्पष्ट की है। जिन निवेशकों की एसआईपी या एसटीपी पहले से पंजीकृत हैं, उनकी किस्तें सामान्य रूप से लागू एनएवी पर कटती रहेंगी। इसके अलावा निवेशकों के लिए स्कीम से बाहर निकलने के रास्ते पूरी तरह खुले रखे गए हैं। रिडेम्पशन यानी निकासी और स्विच-आउट के अनुरोध बिना किसी बाधा के स्वीकार किए जाएंगे। इसी तरह पहले से चल रहे सिस्टेमैटिक विड्रॉल प्लान यानी एसडब्ल्यूपी भी बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे, जिससे नियमित आय चाहने वाले निवेशकों को कोई परेशानी न हो।
फंड हाउसों का अस्थायी नियंत्रण का नजरिया
दोनों ही संपत्ति प्रबंधन कंपनियों ने अपने इन फैसलों को नकदी के प्रवाह पर लगाया गया एक अस्थायी नियंत्रण बताया है। कोटक म्यूचुअल फंड का यह कदम पूरी तरह से यस बैंक के एटी1 बॉन्ड और सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से उपजे कानूनी और वित्तीय प्रभाव से जुड़ा हुआ है। दूसरी तरफ टाटा म्यूचुअल फंड की पाबंदियां 16 अक्टूबर से प्रभावी होकर अगले नोटिस तक जारी रहेंगी, जबकि पहले से जारी निवेश योजनाओं की प्रोसेसिंग नियमित रूप से चलती रहेगी। दोनों ही मामलों में फंड हाउसों की प्राथमिकता बाजार के अचानक उतार-चढ़ाव के बीच पोर्टफोलियो की स्थिरता बनाए रखना है।

















