अमेरिकी उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र सुरक्षा और फ्रैटर्निटी संस्कृति को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो से संबद्ध एक फ्रैटर्निटी हाउस में आयोजित सप्ताहांत पार्टी के दौरान 21 साल की एक युवती के साथ कथित तौर पर गंभीर यौन दुर्व्यवहार का मामला दर्ज कराया गया है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में छात्र आवासों और निजी परिसरों के भीतर अनियंत्रित समारोहों पर पहले से ही कड़ी नजर रखी जा रही है। जांचकर्ताओं के सामने आई जानकारी के अनुसार, इस पूरे प्रकरण ने परिसर सुरक्षा, बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश और छात्र संगठनों की जवाबदेही पर गंभीर विमर्श शुरू कर दिया है।
इंस्टाग्राम आमंत्रण और पार्टी का माहौल
यह मामला यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के अल्फा एप्सिलॉन पाई फ्रैटर्निटी हाउस से जुड़ा हुआ है। लगभग 18,000 नामांकित विद्यार्थियों वाले इस प्रसिद्ध शोध संस्थान के आसपास रविवार के तड़के एक विशाल पार्टी रखी गई थी। शिकायत दर्ज कराने वाली 21 वर्षीय युवती इस विश्वविद्यालय की पंजीकृत छात्रा नहीं है। उसने इस समागम का प्रचार फ्रैटर्निटी के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज पर एक विज्ञापन के माध्यम से देखा था, जिसके बाद वह अपनी सहेली मिया लारा और एक अन्य सहयोगी के साथ वहां जाने के लिए सहमत हुई थी।
शुरुआती घंटों में माहौल सामान्य था, जहां संगीत, नृत्य और पेय पदार्थों का प्रबंध किया गया था। वहां मौजूद लोगों के अनुसार पीड़िता ने पेय का सेवन किया और संगीत पर झूम रही थी। हालांकि कुछ ही समय बाद उसकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी। अत्यधिक अस्वस्थ महसूस होने और अचानक लड़खड़ाने के दौरान वह भीड़भाड़ वाले इलाके में अपनी सहेलियों की पहुंच से दूर हो गई।
तहखाने में मिया लारा की खोज और खौफनाक दृश्य
जब पीड़िता काफी देर तक नहीं लौटी, तो उसकी सहेली मिया लारा ने उसकी खोजबीन शुरू की। पूरे मकान, ऊपरी कमरों और भीड़भाड़ वाले सभागार में तलाशने के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला, तब मिया मकान के बेसमेंट यानी तहखाने की ओर बढ़ीं। वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि तहखाने के एक बंद शौचालय के बाहर पुरुषों की एक टोली एकत्रित थी।
मिया लारा ने जांच अधिकारियों को बताया कि बाहर खड़ी यह भीड़ किसी संकट की सूचना देने या सहायता करने के बजाय बंद दरवाजे की ओर देखकर नारे लगा रही थी और शोर मचा रही थी। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, वे लोग बेहद अमर्यादित भाषा में चिल्ला रहे थे कि अंदर जाने की उनकी बारी कब आएगी और उन्हें भी प्रवेश चाहिए। इस हंगामे के बीच मिया ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए भीड़ को किनारे किया और दरवाजा खोलने के लिए पूरा जोर लगा दिया।
दरवाजा खुलते ही सामने आया मंजर और आरोपी का भागना
दरवाजा खुलते ही अंदर की स्थिति स्तब्ध करने वाली थी। पीड़िता शौचालय के फर्श पर दीवार के सहारे असहाय बैठी हुई पाई गई, जिसके कपड़े अस्त-व्यस्त और फटे हुए थे। उसके पास मौजूद एक पुरुष ने उसके दोनों हाथों की कलाई को पूरी ताकत से जकड़ रखा था। पीड़िता उस समय बदहवास होकर चिल्ला रही थी कि इस कृत्य को तुरंत रोका जाए और उसे बाहर निकाला जाए।
जब मिया ने हस्तक्षेप करते हुए उस व्यक्ति को पकड़ने की कोशिश की और उस पर हिंसक कृत्य का सीधा आरोप लगाया, तो उसने पलटकर बेहद गैर-जिम्मेदाराना अंदाज में दावा किया कि पीड़िता स्वयं इसके लिए सहमत थी। इसके फौरन बाद जब कमरे में चीख-पुकार और दोस्तों का विरोध तेज हुआ, तो माहौल में अफरातफरी मच गई और आरोपी व्यक्ति मौके का फायदा उठाकर वहां से फरार हो गया। पीड़िता को तत्काल सुरक्षित बाहर निकाला गया और बाद में उसका एक अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया।
फ्रैटर्निटी और विश्वविद्यालय प्रशासन का रुख
इस पूरे मामले के सार्वजनिक होने के बाद अल्फा एप्सिलॉन पाई की राष्ट्रीय संस्था और विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने वाले बयान जारी किए हैं। फ्रैटर्निटी के राष्ट्रीय संगठन के प्रवक्ता जोनाथन पियर्स ने औपचारिक बयान में कहा कि उनके किसी भी सक्रिय सदस्य ने इस कथित हमले में न तो भाग लिया और न ही इसे किसी तरह का समर्थन दिया। प्रवक्ता ने दावा किया कि सदस्यों को जैसे ही इस अव्यवस्था और घटना का संकेत मिला, उन्होंने तुरंत समूची पार्टी को समाप्त करने का निर्णय ले लिया था।
फ्रैटर्निटी के प्रतिनिधियों का कहना है कि संदिग्ध को तत्काल मकान परिसर से बाहर खदेड़ दिया गया था और उसके भागने की गतिविधियां वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में दर्ज हो गई हैं। दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मुख्य संदिग्ध उनका पंजीकृत छात्र नहीं है और उसका इस शिक्षण संस्थान से कोई औपचारिक संबंध नहीं पाया गया है। पुलिस विभाग ने इस अज्ञात हमलावर की पहचान स्थापित करने और उसकी गिरफ्तारी के लिए प्राथमिक जांच तेज कर दी है।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी कांड की पृष्ठभूमि और देशव्यापी असर
शिकागो में सामने आई इस घटना ने पिछले वर्ष के उस चर्चित मामले की यादें ताजा कर दी हैं, जिसे कॉर्नेल 7 प्रकरण के रूप में जाना गया था। अक्टूबर 2024 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के एक फ्रैट हाउस में एक छात्रा को नशीला द्रव्य देकर सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का गंभीर आरोप लगा था। उस समय पीड़िता के शिकायत करने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने केवल आंतरिक अनुशासनात्मक कार्रवाई की थी और किसी भी प्रकार का औपचारिक आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं कराया था।
यह मामला तब नया मोड़ ले गया जब पिछले महीने पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और दीवानी मुकदमा दायर किया। उस कानूनी कदम के बाद संस्थान को कड़ा रुख अपनाना पड़ा और कॉर्नेल में अगले साल तक के लिए सभी फ्रैटर्निटी पार्टियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। इसी तरह यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना में भी प्रताड़ना, मारपीट और अनियंत्रित व्यवहार के लगातार बढ़ते मामलों के मद्देनजर फ्रैट गतिविधियों को निलंबित करने के आदेश जारी किए गए हैं। अमेरिकी उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसी घटनाओं की निरंतर पुनरावृत्ति ने परिसर सुरक्षा प्रोटोकॉल, सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए बाहरी लोगों के प्रवेश और निजी छात्र क्लबों के संचालन नियमों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



















