देश में जाली मुद्रा के प्रवाह पर नकेल कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने एक और बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। शुक्रवार को जारी नए निर्देशों के अनुसार, रिजर्व बैंक ने देश के सभी व्यावसायिक और क्षेत्रीय बैंकों को यह अनिवार्य आदेश दिया है कि वे अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे जिलों में मौजूद अपनी हर शाखा को आधुनिक नोट सत्यापन और जांच मशीनों से लैस करें। केंद्रीय बैंक का मानना है कि सीमाओं के पार से आने वाली नकली करेंसी को शुरुआती स्तर पर ही चिन्हित कर लिया जाए, ताकि वह देश की मुख्य अर्थव्यवस्था और बैंकिंग तंत्र का हिस्सा न बन सके।
सीमावर्ती क्षेत्रों में सख्त निगरानी का खाका
अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे संवेदनशील जिलों में अक्सर तस्कर और आपराधिक नेटवर्क फर्जी भारतीय मुद्रा (FICN) को बैंकिंग चैनलों में घुसाने का प्रयास करते हैं। रिजर्व बैंक के हालिया अध्ययन और जांच में यह बात सामने आई थी कि कुछ बैंक शाखाओं में जाली नोटों की पहचान और निगरानी के प्रयास पर्याप्त नहीं थे। इसी कमी को दूर करने के लिए केंद्रीय बैंक ने बैंकों को अपनी मौजूदा प्रक्रियाओं की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। अब बैंक स्तर पर ऐसी ठोस व्यवस्था बनानी होगी जिससे देश के भीतर आने वाले हर संदिग्ध नोट की तुरंत पड़ताल हो सके और उसे दोबारा बाज़ार में जाने से रोका जा सके।
बैंक कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण और मशीन से जांच अनिवार्य
केवल मशीन लगाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि बैंकों को अपने परिचालन ढांचे में भी व्यापक बदलाव करने होंगे। रिजर्व बैंक द्वारा अप्रैल में जारी किए गए मास्टर निर्देश के तहत, अब सभी बैंकों के लिए यह अनिवार्य है कि वे नकदी संभालने वाले अपने प्रत्येक कर्मचारी को असली भारतीय नोटों की सुरक्षा विशेषताओं के बारे में विस्तृत प्रशिक्षण दें। इसके अलावा, बैंक में जमा होने वाले या किसी भी स्रोत से आने वाले हर एक नोट को अत्याधुनिक मशीनों से गुज़ारना होगा। बिना तकनीकी जांच के किसी भी नकदी को सीधे स्वीकार या संसाधित करने की अनुमति नहीं होगी।
जाली नोट मिलने पर जब्ती के सख्त नियम
रिजर्व बैंक ने नकली नोट मिलने की स्थिति में अपनाए जाने वाले नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। यदि कोई ग्राहक या व्यक्ति बैंक काउंटर पर जाली नोट लाता है, तो बैंक कर्मचारी उसे किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं लौटा सकते। इसके साथ ही बैंक को खुद के स्तर पर उस नोट को नष्ट करने या दबाने का अधिकार भी नहीं होगा। निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत ऐसे सभी नोटों को तुरंत जब्त किया जाएगा और फर्जी भारतीय मुद्रा के हर मामले की औपचारिक सूचना संबंधित अधिकारियों और जांच एजेंसियों को देना अनिवार्य होगा। इस पारदर्शी प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि जाली नोट का रिकॉर्ड बना रहे और तस्करी के स्रोतों तक पहुंचा जा सके।
नोटबंदी से लेकर अब तक के प्रयासों की निरंतरता
भारत में जाली करेंसी एक लंबे समय से गंभीर आर्थिक और सुरक्षा समस्या बनी हुई है। इसी चुनौती से निपटने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में मोदी सरकार ने 500 रुपये और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने यानी नोटबंदी का फैसला लिया था। उस समय 2,000 रुपये के नए बैंक नोट जारी किए गए थे, जिन्हें बाद में रिजर्व बैंक ने चरणबद्ध तरीके से बैंकिंग प्रणाली से बाहर कर दिया। इन तमाम बड़े फैसलों के बावजूद जाली नोटों के पूरी तरह खात्मे की चुनौती बनी रही। यही वजह है कि अब केंद्रीय बैंक ने सीमाओं पर ही इस अवैध कारोबार की कमर तोड़ने की रणनीति बनाई है।



















