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आरबीआई नियमों के तहत बदलवाएं दीमक और चूहों के कटे-फटे नोट, जानें बैंक से रिफंड पाने का तरीकामनी
26 अग॰ 2026, 3:49 pm (2 घंटे पहले)· 2

आरबीआई नियमों के तहत बदलवाएं दीमक और चूहों के कटे-फटे नोट, जानें बैंक से रिफंड पाने का तरीका

दीमक, चूहों या नमी से कटे-फटे नोटों की कीमत वापस पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस का पालन करें। जानें कैसे बैंक शाखाओं से रिफंड प्राप्त किया जा सकता है।

घर में रखी नकदी यदि किसी कारणवश कट-फट जाए, पानी से गल जाए या फिर दीमक और चूहे उसे नुकसान पहुंचा दें, तो यह स्थिति किसी भी व्यक्ति के लिए गहरा मानसिक झटका हो सकती है। हाल ही में राजस्थान के बालोतरा जिले से एक किसान और उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक महिला के लाखों रुपये चूहों और दीमक के हमले में खराब होने के हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं। अधिकांश लोग ऐसी स्थिति में नोटों को पूरी तरह बेकार मानकर हताश हो जाते हैं, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के स्पष्ट नियम आम नागरिकों को राहत प्रदान करते हैं। केंद्रीय बैंक की गाइडलाइंस के अनुसार, यदि सुरक्षा विशेषताएं बरकरार हैं, तो बुरी तरह क्षतिग्रस्त नोटों को भी बैंक में जमा करवाकर उनका पूरा या आंशिक मूल्य वापस प्राप्त किया जा सकता है।

राजस्थान और उत्तर प्रदेश में घटी नकदी नुकसान की बड़ी घटनाएं

नकदी के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने का पहला मामला राजस्थान के बालोतरा जिले के अंतर्गत आने वाले पचपदरा थाना क्षेत्र के नेवाई गांव से सामने आया। नेवाई गांव के निवासी किसान मांगीलाल ने अपना एक जमीन का प्लॉट बेचकर 5 लाख रुपये प्राप्त किए थे। चोरी हो जाने के डर से किसान मांगीलाल ने उन 5 लाख रुपयों की गड्डियों को एक प्लास्टिक की थैली में सुरक्षित बांधा और अपने ही खेत की मिट्टी में गहरा गाड़ दिया। हालांकि, कुछ समय बीत जाने के बाद वह खेत में नकदी दबाने का सटीक स्थान भूल गए। हाल के दिनों में जब मांगीलाल अपने खेत की जुताई कर रहे थे, तब हल के नीचे दबा हुआ नोटों का थैला बाहर निकल आया। जब किसान ने उत्सुकतापूर्वक थैले की गांठ खोली, तो उनके होश उड़ गए क्योंकि 5 लाख रुपये के बड़े हिस्से को दीमक पूरी तरह चट कर चुकी थी और नोट मिट्टी में तब्दील हो चुके थे।

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इसी प्रकार की दूसरी दिल दहला देने वाली घटना उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में घटित हुई। गोंडा की एक महिला ने अपने पति से छिपाकर पिछले 8 वर्षों के दौरान धीरे-धीरे बचत करते हुए 12 लाख रुपये की बड़ी रकम एकत्र की थी। महिला का सपना इन पैसों से अपने लिए सोने के गहने खरीदने का था, जिसके लिए उसने पूरी राशि को कपड़े में लपेटकर घर के एक पुराने ट्रंक में सुरक्षित रख दिया था। जब महिला ने गहने खरीदने के इरादे से ट्रंक का ताला खोला, तो वहां का दृश्य देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। ट्रंक के भीतर रखे 12 लाख रुपये के अधिकांश नोटों को चूहों ने बुरी तरह कुतर दिया था और नोट टुकड़ों में बिखर चुके थे। इन दोनों घटनाओं ने आम लोगों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या ऐसी स्थिति में अपनी मेहनत की कमाई को वापस पाना संभव है।

क्षतिग्रस्त नोट बदलने पर क्या कहते हैं रिजर्व बैंक के नियम

भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देश साफ तौर पर कहते हैं कि चूहों द्वारा कुतरे गए, दीमक से सड़े हुए या कई टुकड़ों में कटे-फटे नोट पूरी तरह से अमान्य या कचरा नहीं होते। यदि किसी नागरिक के पास ऐसे नोट मौजूद हैं, तो उन्हें तुरंत और अधिक खराब होने से बचाना चाहिए। नोटों को साफ करके किसी भी नजदीकी कमर्शियल या सरकारी बैंक की शाखा में ले जाना चाहिए। इसके अलावा, नागरिक रिजर्व बैंक के आधिकारिक इश्यू ऑफिस में भी इन नोटों को पेश कर सकते हैं।

रिफंड का निर्धारण मुख्य रूप से नोट की स्थिति और उसकी सुरक्षा विशेषताओं के आधार पर किया जाता है। यदि क्षतिग्रस्त नोट पर उसका विशिष्ट सीरियल नंबर, महात्मा गांधी की तस्वीर और चमकदार सुरक्षा धागा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं और पहचाने जा सकते हैं, तो बैंक नियम के अनुसार ग्राहक को उसकी पूरी कीमत या आंशिक मूल्य का भुगतान करता है। नोट का कितना हिस्सा सुरक्षित बचा है, इसी पैमाने पर रिफंड राशि तय की जाती है।

गंदे और मामूली फटे नोटों के विनिमय से जुड़े नियम

आरबीआई की गाइडलाइंस में गंदे यानी सोइल्ड नोटों को बदलने के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया गया है। सोइल्ड नोट वे कहलाते हैं जो लगातार इस्तेमाल के कारण गंदे हो गए हैं या जिनके दो टुकड़े हो गए हैं, लेकिन उन पर मौजूद सभी आवश्यक विवरण पूरी तरह से पढ़े जा सकते हैं।

यदि कोई व्यक्ति एक दिन में अधिकतम 20 नोट तक या कुल मिलाकर ₹5,000 तक की मूल्य वर्ग के गंदे नोट लेकर बैंक जाता है, तो बैंक शाखा के काउंटर पर तैनात अधिकारी बिना कोई शुल्क लिए तुरंत नए नोटों से उनका आदान-प्रदान कर देंगे। हालांकि, यदि नोटों की संख्या 20 से अधिक हो जाती है या उनका कुल मूल्य ₹5,000 से ऊपर चला जाता है, तो बैंक काउंटर पर तुरंत नकद भुगतान नहीं करता। ऐसे मामलों में बैंक ग्राहक को एक आधिकारिक प्राप्ति रसीद जारी करता है। जमा किए गए नोटों का मूल्यांकन करने के बाद रिफंड की राशि ग्राहक के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेज दी जाती है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अधिकतम 7 दिनों की समय-सीमा तय की गई है और जमाकर्ता से उसकी बैंक खाता जानकारी ली जाती है।

कटे-फटे और अधूरे नोटों के लिए एनआरआर 2009 के प्रावधान

अत्यधिक क्षतिग्रस्त, कुतरे हुए, दीमक लगे या गायब टुकड़ों वाले नोटों के लिए आरबीआई के नोट रिफंड रूल्स यानी एनआरआर, 2009 (पार्ट III) के तहत कड़े और पारदर्शी नियम लागू होते हैं। देश की सभी बैंक शाखाओं को इन नियमों के तहत कटे-फटे और अधूरे नोटों को स्वीकार करने का अधिकार दिया गया है।

छोटे स्तर पर कटे-फटे नोट बदलने के लिए नियम है कि यदि कोई नागरिक एक दिन में 10 नोट तक बैंक में प्रस्तुत करता है, तो बैंक शाखा के कर्मचारी काउंटर पर ही नोटों के बचे हुए हिस्से की जांच करते हैं और नियम अनुसार तय एक्सचेंज वैल्यू तुरंत नकद रूप में सौंप देते हैं। लेकिन जब नोटों का जत्था बड़ा हो, यानी संख्या 10 नोटों से अधिक हो या कुल राशि ₹5,000 से ज्यादा हो, तो बैंक बल्क जमा के रूप में रसीद देकर उन्हें अपने पास रख लेता है और बाद में खाते में राशि जमा करता है।

कई बार ऐसा भी होता है कि जिस बैंक शाखा में नोट जमा कराए गए हैं, वह एक नॉन-चेस्ट शाखा होती है और वहां नोटों की सूक्ष्म जांच करने की सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं। ऐसी स्थिति में नॉन-चेस्ट शाखा ग्राहक को रसीद देती है और उन क्षतिग्रस्त नोटों को अपनी संबद्ध करंसी चेस्ट शाखा को भेज देती है। करंसी चेस्ट में नोटों का गहन परीक्षण किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में रसीद जारी होने की तिथि से अधिकतम 30 दिनों का समय लग सकता है। जांच पूरी होने पर मूल्यांकन के अनुसार बनती राशि ग्राहक के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से क्रेडिट कर दी जाती है।

सर्विस चार्ज और उच्च मूल्य वाली राशि के लिए विशेष सावधानियां

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की बैंक ग्राहक सेवा मास्टर सर्कुलर, 1 जुलाई 2015 के निर्देशों के मुताबिक बैंक क्षतिग्रस्त नोटों की प्रोसेसिंग और प्रबंधन के लिए निर्धारित सर्विस चार्ज वसूल कर सकते हैं। यह शुल्क बैंक की सेवा लागत को कवर करने के लिए लागू किया जाता है।

इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति द्वारा जमा कराए गए गंदे, कटे-फटे या अधूरे नोटों का कुल मूल्य ₹50,000 या उससे अधिक होता है, तो बैंक सामान्य ग्राहक सतर्कता और सुरक्षा प्रक्रियाओं को सख्ती से अपनाते हैं। इतनी बड़ी राशि के मामलों में बैंक जमाकर्ता की पहचान, आय के स्रोत और नोटों के क्षतिग्रस्त होने के कारणों का विस्तृत ब्योरा ले सकते हैं ताकि किसी भी प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी या गैर-कानूनी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। ₹1 लाख से अधिक की क्षतिग्रस्त नकदी होने पर भी बदलने का प्रावधान मौजूद है, हालांकि उसमें जांच की अवधि लगभग एक सप्ताह या उससे अधिक हो सकती है।

क्षतिग्रस्त नकदी को बदलने के लिए आम नागरिकों के लिए जरूरी सुझाव

यदि आपके साथ भी कभी ऐसी अनहोनी हो जाए, तो घबराने के बजाय सही प्रक्रिया का पालन करना बेहद जरूरी है। सबसे पहले, दीमक या चूहों से प्रभावित नोटों के बचे हुए टुकड़ों को किसी सख्त डिब्बे में सुरक्षित रखें और उन्हें जबरन अलग करने या चिपकाने की कोशिश न करें। इसके बाद, अपने नजदीकी किसी भी सरकारी बैंक शाखा में संपर्क करें। आपको भारतीय रिजर्व बैंक के मुख्य कार्यालयों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हर सरकारी बैंक शाखा इन नियमों से बंधी हुई है।

यदि आपकी जमा की जा रही राशि ₹5,000 या 10-20 नोटों से अधिक है, तो बैंक से पावती रसीद लेना न भूलें। उस रसीद पर संभावित भुगतान तिथि और बैंक का आधिकारिक ठप्पा जरूर जांच लें। अपने बैंक खाते का सही ब्योरा शाखा को सौंपें ताकि मूल्यांकन के बाद आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रूप से आपके खाते में वापस आ सके।

सवाल-जवाब

क्या दीमक और चूहों के कुतरे नोट बैंक में बदले जा सकते हैं?
हां, भारतीय रिजर्व बैंक के नियमानुसार चूहों द्वारा कुतरे गए या दीमक से खराब हुए नोटों को बैंक में जमा करके रिफंड पाया जा सकता है।
क्या कटे-फटे नोट जमा करने के लिए केवल आरबीआई ऑफिस जाना पड़ता है?
नहीं, नागरिक अपने नजदीकी किसी भी कमर्शियल या सरकारी बैंक की शाखा में जाकर कटे-फटे नोट बदलवा सकते हैं।
एक दिन में काउंटर पर कितने गंदे नोट मुफ्त बदले जा सकते हैं?
एक दिन में अधिकतम 20 नोट या कुल ₹5,000 मूल्य तक के गंदे नोट काउंटर पर तुरंत और मुफ्त में बदले जा सकते हैं।
₹5,000 से अधिक के कटे-फटे नोट जमा करने पर पैसा कैसे मिलता है?
बैंक बल्क नोटों के बदले रसीद जारी करता है और नोटों के मूल्यांकन के बाद रिफंड राशि अधिकतम 7 दिनों में ग्राहक के खाते में ट्रांसफर करता है।
नॉन-चेस्ट बैंक शाखा में नोट जमा करने पर रिफंड में कितना समय लगता है?
नॉन-चेस्ट शाखा नोटों को जांच के लिए करंसी चेस्ट में भेजती है, जहां से मूल्यांकन और बैंक खाते में भुगतान की प्रक्रिया में अधिकतम 30 दिन का समय लग सकता है।
क्या ₹1 लाख से अधिक के क्षतिग्रस्त नोट भी बदले जा सकते हैं?
हां, ₹1 लाख से अधिक मूल्य के क्षतिग्रस्त नोटों को भी बैंक बदल सकते हैं, हालांकि बड़ी मात्रा होने के कारण इस प्रक्रिया में एक सप्ताह या अधिक का समय लग सकता है।
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