अजमेर के ऐतिहासिक पन्नों में कई ऐसी अमूल्य विरासतें दर्ज हैं जो सदियों पुरानी दास्तां कहती हैं, लेकिन इनमें सोनी जी की नसियां का स्थान बेहद खास है। यहां कदम रखते ही इसकी भव्यता और बारीक नक्काशी हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। इस ऐतिहासिक स्थल की कलाकारी दुनिया भर में अनूठी मानी जाती है और अजमेर आने वाले सैलानियों के लिए यह एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है।
सवा सौ साल पहले लाई गई थीं मूर्तियां
इस ऐतिहासिक स्थल से जुड़े भूपेंद्र ने जानकारी दी कि यहां कई ऐसी प्राचीन प्रतिमाएं मौजूद हैं जिन्हें करीब सवा सौ साल पहले अजमेर के अढ़ाई दिन के झोपड़ा से यहां स्थानांतरित किया गया था। उस दौर में इन बेशकीमती कलाकृतियों को सुरक्षित रखने और लोगों के सामने प्रदर्शित करने के लिए कोई उपयुक्त स्थान नहीं था। इन मूर्तियों को लंबे समय तक संभालकर रखा गया और लगभग दो वर्ष पहले यहां बने सर्वेंट क्वार्टर्स को हटाकर एक आधुनिक और विशेष हॉल का निर्माण किया गया, जहां अब इन पुरावशेषों को सहेजकर रखा गया है।
बिना आधुनिक तकनीक के गढ़ी गई अद्भुत कलाकृतियां
इस परिसर की देखरेख से जुड़े सदस्यों के अनुसार, सोनी जी की नसियां में रखी गई मूर्तियां लगभग 2 हजार से 3 हजार वर्ष पुरानी हैं। इन कलाकृतियों पर की गई बारीक नक्काशी को देखकर उस काल के शिल्पकारों की निपुणता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उस समय न तो आज की तरह आधुनिक मशीनें थीं और न ही कोई उन्नत तकनीक, फिर भी पत्थरों पर इतनी बारीकी से काम किया जाना अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है। यही वजह है कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां की शिल्पकला को देखकर हैरान रह जाते हैं।
प्रतिमाओं में आज भी महसूस होती है ऊर्जा
यहां के जानकारों का यह भी मानना है कि इन मूर्तियों का न केवल ऐतिहासिक और कलात्मक महत्व है, बल्कि इनका गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव भी है। प्राचीन काल में संतों द्वारा इन सभी प्रतिमाओं की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप आज भी यहां एक अलग प्रकार की सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है। आधुनिक तकनीक से इन मूर्तियों की जांच कराए जाने के बाद भी इनमें विशेष ऊर्जा होने के दावे किए जाते हैं, जो इसे और भी रहस्यमयी और खास बनाते हैं।


















