अगर आप बचपन के पसंदीदा कार्टून किरदारों को बड़े पर्दे पर एक नए अंदाज में देखना पसंद करते हैं, तो कोयोटी वर्सेस एक्मी रिव्यू आपके लिए एक राहत भरी खबर लेकर आया है। सालों के इंतजार और अनगिनत मुश्किलों के बाद रिलीज हुई यह फिल्म न केवल अपने किरदार की तरह जुझारू साबित हुई है, बल्कि दर्शकों के लिए एक बेहद मनोरंजक और अराजक कॉमेडी का खजाना लेकर आई है। सिनेमाघरों तक पहुंचने का इसका रास्ता काफी कठिन रहा है, लेकिन अंततः यह फिल्म दर्शकों का दिल जीतने में पूरी तरह सफल रहती है।
शेल्फ होने के खतरे से सिनेमाघरों तक का सफर
फिल्म की अपनी कहानी से कहीं ज्यादा रोमांचक इसका बैकग्राउंड रहा है। वॉर्नर ब्रदर्स द्वारा इसे मूल रूप से साल 2023 में रिलीज किया जाना तय किया गया था। हालांकि, अजीबोगरीब टैक्स कारणों का हवाला देते हुए इसे अचानक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और ऐसा लग रहा था कि यह फिल्म कभी रिलीज ही नहीं हो पाएगी। बाद में इसे एक नए वितरक को बेच दिया गया। इतने निराशाजनक इतिहास के बावजूद विले ई. कोयोटी आखिरकार विजयी बनकर उभरा है। यह फिल्म किसी भी मामले में कमजोर नहीं पड़ती, बल्कि यह शुरू से अंत तक दर्शकों को लोटपोट करने वाली एक बेमिसाल कॉमेडी साबित होती है।
कोर्टरूम की अनोखी लड़ाई और दो अलग मिजाज के किरदारों की जोड़ी
पिछले 75 से भी अधिक वर्षों से विले ई. कोयोटी का सिर्फ एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह तेज तर्रार रोड रनर को पकड़ना। अपनी गति से उसका मुकाबला न कर पाने के कारण वह हमेशा एक्मी ब्रांड के अतरंगी गैजेट्स का इस्तेमाल करता है। चाहे वह रॉकेट बूट्स हों, विशालकाय मैग्नेट हों या जेट से चलने वाली पोगो स्टिक हो, ये सभी उपकरण हर बार एन वक्त पर खराब हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि विले ई. खुद ही धमाके में उड़ जाता है या गहरी खाई में जा गिरता है। इस फिल्म में एक और नाकाम योजना के बाद विले ई. तय करता है कि असली गुनहगार एक्मी कंपनी है। वह कंपनी पर लापरवाही का मुकदमा ठोकने का फैसला करता है और इसके लिए वह केविन एवरी नाम के एक बेहद आलसी और सस्ते वकील को हायर करता है। विल फोर्ट द्वारा निभाया गया केविन का किरदार मुकदमों को जल्दी से जल्दी निपटाने में यकीन रखता है। जहां कोयोटी अपने लक्ष्य को पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, वहीं केविन का मानना है कि जैसे ही चीजें थोड़ी मुश्किल हों, प्रयास करना छोड़ देना चाहिए।
'हू फ्रेम्ड रॉजर रैबिट' जैसा अंदाज और लोनी ट्यून्स का जादू
निर्देशक डेव ग्रीन और पटकथा लेखक सैमी बर्च ने इस बेतुके लेकिन तार्किक सेट-अप को बहुत ही कुशलता से संभाला है। फिल्म का रुख ठीक वैसा ही है जैसा लाइव एक्शन और एनिमेशन के इस हाइब्रिड जॉनर की मशहूर फिल्म हू फ्रेम्ड रॉजर रैबिट में देखा गया था। कहानी में यह बात सहजता से स्वीकार कर ली गई है कि कार्टून किरदार इंसानों के साथ ही रहते हैं। फिल्म में विल फोर्ट एक समझदार और गंभीर व्यक्ति की भूमिका निभाते हैं, जो कोयोटी के मूक पागलपन के सामने एकदम सटीक बैठता है। दोनों के बीच का तालमेल देखने लायक है। हालांकि आखिरी हिस्से में कहानी थोड़ी उलझती है और स्थापित फॉर्मूले पर ज्यादा निर्भर होती दिखाई देती है, फिर भी इससे फिल्म के आनंद में कोई कमी नहीं आती।
अंतिम राय और दर्शकों के लिए अनुभव
लोनी ट्यून्स के प्रशंसकों के लिए यह फिल्म किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है। पूरी फिल्म में अनगिनत ऐसे दृश्य हैं जो आपको पुराने कार्टूनों की याद दिलाते हैं। अभिलेखागार से निकाली गई कई पुरानी बारीकियों को देखकर सामान्य दर्शक भले ही थोड़े हैरान हो सकते हैं कि पीटर लॉरे एक वैज्ञानिक का किरदार क्यों निभा रहे हैं या जूरी में एक बूढ़ी मुर्गी क्यों बैठी है, लेकिन यही बारीकियां फिल्म को खास बनाती हैं। निर्देशक ने स्पष्ट किया कि "लोनी ट्यून्स की दुनिया के प्रति प्यार ही इस फिल्म को इतना सफल बनाता है।" लगभग 100 मिनट के अपने रनटाइम में यह फिल्म उसी पुराने क्लासिक कार्टून वाले कॉमिक रिदम और चुलबुलेपन को बनाए रखती है।


















