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धमाल 4 रिव्यू (2026): पुरानी टीम, नया मिशन, फिर वही ठहाकेमूवी रिव्यू
2 घंटे पहले· 3

धमाल 4 रिव्यू (2026): पुरानी टीम, नया मिशन, फिर वही ठहाके

'धमाल 4' अपनी चौथी किस्त में भी वही बेतुकी, हंसी से भरपूर कॉमेडी परोसती है, जहां अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी और जावेद जाफरी की टीम एक खजाने की तलाश में उलझ जाती है.

आयशा खानआयशा खानमनोरंजन रिपोर्टर 6 मिनट पढ़ें AI के लिए
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धमाल 4

3.5/5
10 जुलाई 2025 | हिंदी
143 मिनट | कॉमेडी ड्रामा

कलाकार: अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी, रवि किशन, संजय मिश्रा और अन्य

निर्देशक: इंद्र कुमार

संगीत: तनिष्क बागची

ट्रेलर

करीब दो दशक पहले शुरू हुई 'धमाल' फ्रैंचाइजी अब अपनी चौथी किस्त के साथ थिएटरों में लौट आई है, और यह धमाल 4 रिव्यू बताता है कि क्या डायरेक्टर इंद्र कुमार एक बार फिर वही बेतुकी लेकिन दिलफेंक कॉमेडी परोसने में कामयाब रहे हैं. 2007 में जिस सफर की शुरुआत खजाने के नीचे छिपे अक्षर 'W' से हुई थी, वह 2026 में 'M' अक्षर के साथ अपने चौथे पड़ाव पर पहुंच चुका है. डायरेक्टर इंद्र कुमार अपनी पुरानी और भरोसेमंद टीम के साथ-साथ कुछ नए चेहरे भी लेकर आए हैं, और नतीजा वही क्रेजी, बिना सिर-पैर वाली हंसी है जिसके लिए यह फ्रैंचाइजी शुरू से जानी जाती रही है. यह फ्रैंचाइजी हमेशा से अपने मल्टी-स्टारर कास्ट और बेफिक्र अंदाज के लिए मशहूर रही है, और इस बार भी वह परंपरा बरकरार रखी गई है. अगर आप लॉजिक को घर पर छोड़कर सिर्फ ठहाकों के लिए थिएटर जाना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए ही बनी है.

कहानी में है वही पुराना खजाने वाला खेल

'धमाल 4' की कहानी किसी गंभीर या पेचीदा विषय पर नहीं टिकी, बल्कि फ्रैंचाइजी के अपने सिग्नेचर फॉर्मूले पर ही चलती है. फिल्म में कई अजीबोगरीब किरदार हैं, जो अपनी मजबूरियों, या यूं कहें कि बेकाबू लालच के चलते, एक ऐसे मिशन में उलझ जाते हैं जो देखने में नामुमकिन लगता है. कहानी तब नया मोड़ लेती है जब इन सभी किरदारों को एक सीक्रेट जगह या खजाने का पता चलता है, जिसे पाने में कामयाब सिर्फ एक ही इंसान हो सकता है. इसके बाद शुरू होता है चूहे-बिल्ली वाला खेल, जिसमें गलतफहमियां, अटपटे हालात, जंगली जानवर और हवाई स्टंट लगातार नए मोड़ लाते रहते हैं. जहां पुराने चारों किरदार अपने पिछले अनुभवों का फायदा उठाते हैं, वहीं नए विलेन और नई मुश्किलें इस सफर को पहले से कहीं ज्यादा उलझा हुआ और रोमांचक बना देती हैं. पूरी कहानी इसी पागलपन भरी दौड़ के इर्द-गिर्द घूमती है और दर्शकों को आखिरी सीन तक यही सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर खजाना किसके हाथ लगेगा.

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अजय देवगन की गंभीरता बनाम बाकी टीम की मस्ती

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी मजबूत स्टार कास्ट और उनकी आपसी केमिस्ट्री है. अजय देवगन इस बार एक लीडर या मास्टरमाइंड की भूमिका में हैं. उनका संजीदा अंदाज उनकी पैनी कॉमिक टाइमिंग के साथ मिलकर स्क्रीन पर सच में असर छोड़ता है. अजय देवगन ने बिना ज्यादा शोरगुल किए फिल्म के हल्के-फुल्के मूड को बड़ी खूबी से संभाले रखा है.

दूसरी तरफ, इस फ्रैंचाइजी की असली रीढ़ यानी रितेश देशमुख, अरशद वारसी और जावेद जाफरी की तिकड़ी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कॉमेडी में उनका कोई सानी नहीं है. रितेश देशमुख का मजाकिया अंदाज और अरशद वारसी के किरदार आदि तथा जावेद जाफरी के किरदार मानव के बीच की भाईचारे वाली नोकझोंक ने थिएटर में सबसे ज्यादा तालियां बटोरीं. खासकर मानव की मासूमियत और उसकी अजीब हरकतों वाले सीन दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देते हैं.

सपोर्टिंग कास्ट भी कम नहीं

सपोर्टिंग कलाकारों की बात करें तो रवि किशन और संजय मिश्रा अपने छोटे-छोटे सीन में भी पूरी तरह छा जाते हैं. संजय मिश्रा का सिग्नेचर डायलॉग-डिलीवरी स्टाइल और रवि किशन का देसी अंदाज फिल्म को एक अलग ही धार देता है. उपेंद्र लिमये और विजय पाटकर ने भी मराठी टच के साथ अच्छी-खासी कॉमेडी की है. फीमेल कास्ट में ईशा गुप्ता, संजीदा शेख और अंजलि आनंद के हिस्से करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं आया, लेकिन उन्होंने फिल्म के ग्लैमर और हल्केपन को बनाए रखने में अच्छा योगदान दिया. बृजेंद्र काला ने अपने छोटे से रोल में भी हमेशा की तरह दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ला दी.

डायरेक्शन: पहला हाफ तेज, दूसरा हाफ ढीला

डायरेक्टर इंद्र कुमार को अच्छी तरह मालूम है कि धमाल फ्रैंचाइजी के दर्शक आखिर चाहते क्या हैं. उन्होंने फिल्म को पूरी तरह एक बिना दिमाग लगाए देखी जाने वाली फैमिली एंटरटेनर बनाने की कोशिश की है, और काफी हद तक वे इसमें कामयाब भी रहे हैं. फिल्म का पहला हाफ बहुत तेज रफ्तार से आगे बढ़ता है. किरदारों का परिचय और उनके बीच की रेस इतनी जल्दी शुरू हो जाती है कि दर्शकों को बोर होने का मौका ही नहीं मिलता. इसके बाद आने वाले मजेदार सीक्वेंस और पंचलाइनें लगातार हंसाती रहती हैं. इंद्र कुमार कई जगहों पर पुरानी 'धमाल' फिल्मों की यादें भी ताजा करते चलते हैं. हालांकि दूसरे हाफ में उनका स्क्रीनप्ले थोड़ा डगमगा जाता है. कुछ हिस्से बेवजह खिंचे हुए महसूस होते हैं, लेकिन डायरेक्टर का इरादा साफ है, वे कहानी में कोई गहराई या समझदारी जोड़ने के मूड में नहीं हैं, बल्कि सिर्फ मनोरंजन परोसना चाहते हैं, और इस मकसद में वे कामयाब होते नजर आते हैं.

म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी ने बढ़ाया मजा

किसी भी कॉमेडी फिल्म के लिए बैकग्राउंड स्कोर बहुत मायने रखता है, और 'धमाल 4' में बैकग्राउंड म्यूजिक हर मजेदार सीन को और निखार देता है. जब भी कोई किरदार किसी मुश्किल में फंसता है या कोई अजीब एक्सप्रेशन देता है, बैकग्राउंड स्कोर उस हंसी को दोगुना कर देता है. फिल्म के दो गाने 'साड़ी' और 'चटनी' रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके थे, और इन्हें बड़े पर्दे पर देखना उससे भी ज्यादा मजेदार अनुभव है.

सिनेमैटोग्राफी के मोर्चे पर भी फिल्म देखने में रिच और वाइब्रेंट लगती है. जंगल के सीन, चेज सीक्वेंस और कुछ खास लोकेशन को बड़ी खूबसूरती और शानदार अंदाज में कैमरे में कैद किया गया है. क्लाइमैक्स के दौरान फिल्म का VFX कुछ जगहों पर थोड़ा कमजोर और कार्टून जैसा नजर आता है, लेकिन फिल्म की कॉमिक और फैंटेसी वाली प्रकृति को देखते हुए दर्शक इसे आसानी से नजरअंदाज कर सकते हैं. एडिटर ने पहले हाफ को टाइट रखा है, लेकिन दूसरे हाफ में थोड़ी और कैंची चलाई जा सकती थी.

फिल्म की कमजोरियां भी गिनाना जरूरी

हर मसाला फिल्म की तरह 'धमाल 4' में भी कुछ साफ खामियां हैं. सबसे पहली बात, कहानी कहने के तरीके में यह कुछ भी नया नहीं दिखाती. अगर आपने इस फ्रैंचाइजी के पिछले हिस्से देखे हैं, तो आपको पहले से अंदाजा हो जाता है कि अगले सीन में क्या होने वाला है. कुछ जोक्स और पंचलाइनें कहीं-कहीं थोड़ी पुरानी भी लगती हैं. फिल्म का दूसरा हाफ क्लाइमैक्स की तरफ बढ़ते हुए थोड़ा सुस्त पड़ जाता है, जिससे कुछ देर के लिए रफ्तार कम हो जाती है. इसके अलावा, जो दर्शक फिल्म में लॉजिक और रियलिज्म ढूंढने की उम्मीद रखते हैं, वे इससे पूरी तरह निराश हो सकते हैं.

फैसला: दिमाग बंद करके देखी जाने वाली फैमिली एंटरटेनर

'धमाल 4' कोई ऑस्कर जीतने वाली फिल्म नहीं है, और ना ही यह ऐसा होने का कोई दावा करती है. फिल्म का मकसद बेहद आसान और साफ है, थिएटर तक आने वाले दर्शकों को भरपूर और वैल्यू-फॉर-मनी एंटरटेनमेंट देना. जो लोग परिवार के साथ बिना दिमाग लगाए हंसी-मजाक का डोज लेना चाहते हैं, उनके लिए यह फिल्म एक भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकती है, और साथ ही आने वाले वक्त में 'धमाल 5' की उम्मीद भी जिंदा रखती है.

इसका आप पर असर

अगर आप वीकेंड पर परिवार के साथ थिएटर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह रिव्यू आपके टिकट के फैसले में काम आ सकता है.

  • दर्शकों के लिए: जो लोग बिना दिमाग लगाए हल्की-फुल्की कॉमेडी देखना चाहते हैं, उनके लिए 'धमाल 4' टिकट पर पैसा खर्च करने का एक भरोसेमंद विकल्प हो सकता है, जबकि गहरी कहानी या लॉजिक ढूंढने वाले दर्शक निराश हो सकते हैं.

सवाल-जवाब

क्या 'धमाल 4' देखने लायक है?
हां, अगर आप दिमाग लगाए बिना हल्की-फुल्की, मसाला कॉमेडी एंटरटेनमेंट चाहते हैं तो यह फिल्म देखने लायक है, हालांकि गहरी कहानी या लॉजिक ढूंढने वाले दर्शकों को यह उतनी पसंद नहीं आएगी.
'धमाल 4' किन फिल्मों जैसी लगती है?
यह अपनी ही फ्रैंचाइजी की पिछली धमाल फिल्मों जैसी है, वही खजाने की तलाश वाली कहानी, वही चूहे-बिल्ली का खेल और वही मल्टी-स्टारर कास्ट का फॉर्मूला यहां भी दोहराया गया है.
'धमाल 4' के डायरेक्टर कौन हैं?
फिल्म को इंद्र कुमार ने डायरेक्ट किया है, जो इस फ्रैंचाइजी की पहले की फिल्मों के भी डायरेक्टर रहे हैं.
'धमाल 4' में मुख्य कलाकार कौन-कौन हैं?
फिल्म में अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी और जावेद जाफरी मुख्य भूमिकाओं में हैं, साथ ही रवि किशन, संजय मिश्रा, उपेंद्र लिमये, विजय पाटकर, ईशा गुप्ता, संजीदा शेख, अंजलि आनंद और बृजेंद्र काला सपोर्टिंग कास्ट में हैं.
फिल्म की कहानी किस बारे में है?
कहानी कई अजीबोगरीब किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो लालच के चलते एक सीक्रेट खजाने को पाने की रेस में उलझ जाते हैं और यह रेस चूहे-बिल्ली के खेल में बदल जाती है.
फिल्म के कौन-से गाने वायरल हुए हैं?
फिल्म के दो गाने 'साड़ी' और 'चटनी' रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके थे.
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है?
फिल्म की कहानी में कुछ भी नया नहीं है और दूसरा हाफ क्लाइमैक्स की ओर बढ़ते हुए थोड़ा धीमा पड़ जाता है, जिससे रफ्तार कम हो जाती है.
आयशा खान
लेखक के बारे मेंआयशा खानमनोरंजन रिपोर्टर मुंबई
विशेषज्ञतामनोरंजन समाचार, फ़िल्में, टीवी शो, स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म, सेलिब्रिटी न्यूज़, पॉप कल्चर, फ़िल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफ़िस विश्लेषण, उद्योग रुझान

आयशा खान एक मनोरंजन रिपोर्टर हैं जो फ़िल्म, टेलीविज़न, सेलिब्रिटी, स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म और पॉप कल्चर की ख़बरें कवर करती हैं और मनोरंजन प्रेमियों के लिए समय पर व दिलचस्प कहानियाँ देती हैं।

आयशा खान एक मनोरंजन रिपोर्टर हैं जो फ़िल्मों, टेलीविज़न, स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म, सेलिब्रिटी न्यूज़ और पॉप कल्चर रुझानों में विशेषज्ञता रखती हैं। वे मनोरंजन उद्योग के ताज़ा घटनाक्रम — फ़िल्म रिलीज़, टीवी सीरीज़, ओटीटी कंटेंट, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, बॉक्स ऑफ़िस प्रदर्शन और उद्योग अपडेट — कवर करती हैं। सटीकता, पाठकों से जुड़ाव और समय पर रिपोर्टिंग पर ज़ोर देते हुए आयशा ऐसी जानकारीपूर्ण सामग्री देती हैं जो पाठकों को मनोरंजन की तेज़ रफ़्तार दुनिया से अपडेट रखती है। उनकी कवरेज हॉलीवुड, अंतरराष्ट्रीय सिनेमा, स्ट्रीमिंग सेवाओं, रेड-कार्पेट आयोजनों और उभरते मनोरंजन रुझानों तक फैली है, और सुगठित रिपोर्टिंग व सशक्त कहानी कहने के ज़रिए वे वैश्विक दर्शकों तक ताज़ा मनोरंजन ख़बरें व विश्लेषण पहुँचाती हैं।

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#मूवी रिव्यू#धमाल4#अजयदेवगन#इंद्रकुमार#रितेशदेशमुख#कॉमेडीफिल्म#बॉलीवुडरिव्यू

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