बेबी डू डाई डू रिव्यू करते हुए सबसे पहली बात जेहन में आती है, वह यह कि बॉलीवुड में ऐसी एक्शन थ्रिलर सस्पेंस फिल्में कम ही बनती हैं जो घिसे-पिटे फॉर्मूले से पूरी तरह अलग हटकर चलें। हुमा कुरैशी और साकिब सलीम की होम प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म भारी बारिश, गहरे सस्पेंस और दिमाग घुमा देने वाले ट्विस्ट्स से लबरेज है और आखिरी सीन तक दर्शक को सीट से बांधे रखती है।
क्या है बेबी डू डाई डू की कहानी
फिल्म की धुरी बेबी करमरकर (हुमा कुरैशी) नाम की एक किरदार है, जो बोल या सुन नहीं सकती लेकिन जिसका निशाना कभी नहीं चूकता। वह मुंबई महानगर क्षेत्र के खतरनाक अंडरवर्ल्ड में एक शार्पशूटर, यानी सुपारी लेकर मारने वाली हिटवुमन के तौर पर काम करती है। उसके अतीत में एक गहरा जख्म छिपा है, बचपन में उसकी जुड़वा बहन की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, और बेबी बीते 20 सालों से उस कातिल को बेचैन होकर तलाश रही है। यही बदले की आग उसे जुर्म की दुनिया में खींच लाई है, जहां वह अपने छाते के भीतर बंदूक छिपाकर रखती है। मुंबई के दबंग रियल एस्टेट माफिया के इशारे पर वह उन आम लोगों को रास्ते से हटा देती है जो उनके धंधे में रुकावट बनते हैं। कहानी तब नया मोड़ लेती है जब बेबी को एक ताकतवर शख्स को मारने की जगह का सुराग मिलता है, और उसकी सुरक्षित नजर आने वाली दुनिया दरकने लगती है। इसी बीच बेबी की जिंदगी में एक मासूम और खूबसूरत प्रेम कहानी दाखिल होती है। जैसे ही वह एक सामान्य जिंदगी के सपने बुनने लगती है, उसका खूनी अतीत उसके इकलौते सुकून भरे वर्तमान को निगल जाने की धमकी देने लगता है। अपने सच्चे प्यार को बचाने की इस जबरदस्त जंग के बीच बेबी को आखिरकार अपने 20 साल पुराने दुश्मन का सुराग हाथ लगता है, और क्लाइमैक्स इतना दिलचस्प और रोंगटे खड़े करने वाला है कि दर्शक सांस रोककर बैठे रहते हैं।
कलाकारों की परफॉर्मेंस ने रोशन कर दी फिल्म
इस फिल्म की असली ताकत इसके कलाकारों का शानदार अभिनय है। चंकी पांडे, सिकंदर खेर, सीमा पाहवा, रचित सिंह, मरुधर शेखावत और अरुण कुशवाहा जैसे मंझे हुए कलाकार अपने-अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय करते हैं। चंकी पांडे और सिकंदर खेर अपने दमदार और ग्रे शेड वाले किरदारों से हैरान कर देते हैं, लेकिन यह फिल्म शुरू से आखिर तक हुमा कुरैशी की ही रह जाती है। बिना एक भी संवाद बोले, हुमा अपनी आंखों की फड़कन, चेहरे पर पसरी गहरी टेंशन और अपनी बॉडी लैंग्वेज से ही पूरी कहानी कह देती हैं। जब वह स्क्रीन पर खौफनाक अंदाज में ट्रिगर दबाती हैं और अगले ही पल प्यार में झुक जाती हैं, तो दर्शक उनके इस कल्ट ट्रांसफॉर्मेशन के आगे मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यह हुमा के करियर का अब तक का सबसे गहरा और सबसे शानदार किरदार साबित होता है।
नचिकेत सामंत का साहसी डायरेक्शन
डायरेक्टर नचिकेत सामंत ने इतने मुश्किल और जोखिम भरे विषय को पर्दे पर उतारने में गजब की हिम्मत दिखाई है। डार्क थ्रिलर और अनोखे मिजाज को एक साथ पिरोने का हुनर अब तक सिर्फ श्रीराम राघवन जैसे माहिर डायरेक्टर में ही नजर आता रहा है, लेकिन इस बार नचिकेत ने अपनी अलग और मजबूत छाप छोड़ी है। वह फिल्म को एक पल के लिए भी बोरिंग नहीं होने देते। खतरनाक और हाई-स्टेक हालात के बीच वह जो हल्का सा अनोखापन और ठंडा ह्यूमर घोलते हैं, वह पूरी फिल्म को स्टाइलिश और ताजा बना देता है।
सिनेमैटोग्राफी और संगीत ने बढ़ाया माहौल
तोजो जेवियर की सिनेमैटोग्राफी इस फिल्म का सबसे खूबसूरत पहलू है। वह मुंबई को बिल्कुल नए नियो-नॉयर रंगों में रंगते हैं, लगातार बरसती बारिश, अंधेरी और साफ-सुथरी गलियां, नीली-लाल नियॉन रोशनी की बनावट और छाते के साथ फिल्माए गए एक्शन सीक्वेंस, सब मिलकर स्क्रीन पर किसी पेंटिंग जैसा नजारा रचते हैं। विजुअल्स इतने असरदार हैं कि वे कहानी का मूड सीधे दर्शकों तक पहुंचा देते हैं। कंपोजर अर्जुन अय्यर ने फिल्म के मिजाज को भांपते हुए दमदार गानों की एक पूरी सीरीज रची है। उनका संगीत और बैकग्राउंड स्कोर बदले की इस अनोखी कहानी को गहरी धार देते हैं, वहीं फिल्म के रोमांटिक ट्रैक में मोहित चौहान की मखमली आवाज इस डार्क और धमाकेदार फिल्म के बीच ताजी हवा के झोंके जैसा एहसास देती है।
फिल्म की कमजोर कड़ी
फिल्म भले ही हर मोर्चे पर मजबूत नजर आती हो, लेकिन कुछ चीजें आम मसाला दर्शकों को थोड़ी कठोर लग सकती हैं। फिल्म का पहला हाफ किरदारों की पृष्ठभूमि गढ़ने में थोड़ा वक्त लेता है, जो मेनस्ट्रीम एक्शन पसंद करने वाले दर्शकों के धैर्य की परीक्षा ले सकता है। यह पूरी तरह नियो-नॉयर और डार्क अंदाज का सिनेमा है, जो शायद उन सिंगल-स्क्रीन दर्शकों को रास न आए जो भारी-भरकम और तेज संवादों की उम्मीद लेकर थिएटर पहुंचते हैं।
फैसला
कुल मिलाकर बेबी डू डाई डू सिर्फ एक फिल्म भर नहीं, बल्कि बॉलीवुड में कुछ अलग, दमदार और साहसिक रचने की एक बड़ी कोशिश है। प्रोड्यूसर साकिब सलीम ने इस कल्ट प्रोजेक्ट को लेकर अपनी मजबूत सोच जाहिर की है। बारिश, बदले की आग, कभी खत्म न होने वाला प्यार, बेहतरीन संगीत और हुमा कुरैशी का बेमिसाल अभिनय, ये सब मिलकर इस फिल्म को जरूर देखी जाने वाली मास्टरपीस बना देते हैं। इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार दिए जा सकते हैं।













