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द डॉग स्टार्स रिव्यू (2026): रिडले स्कॉट की पोस्ट-अपोकैलिप्टिक ड्रामा अपनी ही महत्वाकांक्षा के आगे पस्तमूवी रिव्यू
26 अग॰ 2026, 7:19 pm (2 घंटे पहले)· 1

द डॉग स्टार्स रिव्यू (2026): रिडले स्कॉट की पोस्ट-अपोकैलिप्टिक ड्रामा अपनी ही महत्वाकांक्षा के आगे पस्त

रिडले स्कॉट की नई फिल्म 'द डॉग स्टार्स' में शानदार विजुअल्स और जैकब एलॉर्डी का अभिनय तो है, लेकिन कमजोर पटकथा और धीमी रफ्तार के कारण यह फिल्म प्रभावित करने में नाकाम रहती है।

द डॉग स्टार्स रिव्यू के जरिए निर्देशक रिडले स्कॉट दर्शकों को एक ऐसी वीरान दुनिया में ले जाते हैं जहाँ सभ्यता का नामोनिशान मिट चुका है। पोस्ट-अपोकैलिप्टिक विधा की फिल्में अक्सर इंसान को उसकी बुनियादी जरूरतों और अहम रिश्तों का अहसास कराने की कोशिश करती हैं। रिडले स्कॉट भी अपनी इस नई फिल्म में केवल जिंदा रहने और सचमुच जिंदगी जीने के बीच के फर्क को गहराई से तलाशने का प्रयास करते हैं। हालांकि, अपनी विशाल दृश्यात्मक बनावट और गंभीर विषयों के बावजूद फिल्म अपनी ही बातों पर पूरी तरह टिक नहीं पाती और भटक जाती है।

उजाड़ अमेरिका में अस्तित्व की कठिन लड़ाई

कहानी का केंद्र हिग (जैकब एलॉर्डी) नाम का एक आम इंसान है, जो जनशून्य हो चुके अमेरिका में किसी तरह दिन काट रहा है। वह एक सुनसान हवाई पट्टी पर अपने आक्रामक और लड़ाकू साथी बैंगली (जोश ब्रोलिन) के साथ रहता है। हिग रोज अपने वफादार कुत्ते जैस्पर के साथ विमान उड़ाकर डेनवर शहर की खंडहर बन चुकी इमारतों से जरूरी सामान की तलाश करता है। दोनों साथी इस सामान से हवाई पट्टी पर अपना गुजारा चलाते हैं और पास में रहने वाले शांतिप्रिय मेनोनाइट समुदाय के पड़ोसियों की भी सुरक्षा का ध्यान रखते हैं।

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रीपर्स का खतरा और ग्रैंड जंक्शन की यात्रा

इस भयानक माहौल में सुरक्षा का अहसास पलभर का है। डेनवर शहर में 'रीपर्स' नाम के जंगली गिरोह की चहलपहल बढ़ जाती है, जो बचे हुए इंसानों पर हमला करके उनका सामान छीन लेते हैं। यह गिरोह हिग, बैंगली और उनके पड़ोसियों के लिए बड़ा खतरा बन जाता है। इसी बीच, अकेलापन और इंसानी संपर्क की उम्मीद में हिग को ग्रैंड जंक्शन से एक धुंधला रेडियो संकेत सुनाई देता है। खतरे की परवाह किए बिना हिग उस संकेत का पीछा करने का फैसला करता है, जहाँ उसे नए दोस्त और अनदेखे खतरे दोनों मिलते हैं।

शानदार सिनेमैटोग्राफी और ऊर्जावान निर्देशन

तकनीकी धरातल पर रिडले स्कॉट का काम बेहद प्रभावी है। इटली में शूट की गई इस फिल्म में डोलोमाइट्स पर्वत श्रृंखला की नुकीली चोटियाँ माहौल में एक प्राकृतिक खौफ भरती हैं। सिनेमैटोग्राफर एरिक मेसरश्मिट की एरियल फोटोग्राफी कमाल की है, जिसमें जनहीन पहाड़ियों के बीच उड़ता हिग का विमान स्क्रीन पर अद्भुत दिखता है। 88 वर्ष की उम्र में भी रिडले स्कॉट जिस ऊर्जा और फुर्ती के साथ एक्शन दृश्यों को फिल्माते हैं, वह उनसे आधी उम्र के निर्देशकों के लिए भी मिसाल है। फिल्म की स्टार कास्ट भी बेहद सक्षम है।

कहानी की धीमी रफ्तार और अजीब फैसले

तमाम खूबियों के बावजूद फिल्म की पटकथा रिडले स्कॉट के विजुअल डायरेक्शन का साथ नहीं दे पाती। उदासी और निराशा में डूबे किरदार दर्शकों को बांधने में नाकाम रहते हैं। फिल्म का पहला हाफ खतरे का अहसास तो कराता है, लेकिन रीपर्स गिरोह का चित्रण काफी उलझा हुआ और अस्पष्ट लगता है। साथ ही, किरदार जंगल में खुलेआम आग जलाने जैसे अजीब फैसले लेते हैं, जिससे लगता है कि वे खुद अपने आसपास के खतरों को लेकर गंभीर नहीं हैं।

असंगत टोन और अधूरी प्रेम कहानी

फिल्म का दूसरा हिस्सा काफी धीमा हो जाता है, जहाँ हिग और निडर सीमा (मार्गरेट क्वाली) के बीच पनपते रिश्ते पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। हालांकि, यह लव स्टोरी आधी-अधूरी और बेअसर महसूस होती है। इसके अलावा, फिल्म में टोन में अचानक बदलाव देखने को मिलता है। हवाई अड्डे पर फिल्माया गया एक अजीब दृश्य, जो पीटर हेलर के 2012 के मूल उपन्यास में नहीं था, कहानी के बाकी हिस्सों से बिल्कुल अलग और बेतुका लगता है। यह दृश्य कहानी में जान फूंकने के इरादे से जोड़ा गया लगता है, पर यह प्रयोग पूरी तरह नाकाम रहता है।

पुराने विचार और बेअसर अंत

फिल्म में नयापन काफी कम महसूस होता है। इसका एक कारण यह हो सकता है कि 2012 में आए पीटर हेलर के उपन्यास से प्रेरित होकर बाद में कई कहानियां बनीं, या फिर यह फिल्म अन्य मशहूर कृतियों से बहुत ज्यादा मिलती-जुलती है। वफादार कुत्ते का साथ 'आई एम लीजेंड' की याद दिलाता है, पागल हमलावर गिरोह 'मैड मैक्स' की याद दिलाते हैं और भविष्य की पुरानी यादों का अहसास 'फॉलआउट' जैसा लगता है। किसी स्पष्ट दृष्टिकोण के अभाव में फिल्म यह तय नहीं कर पाती कि वह क्या कहना चाहती है। हालांकि अंत में हिग को जिंदगी जीने की एक नई वजह मिलती है, लेकिन यह बदलाव उसकी परिस्थितियों के बदलने के बजाय पुरानी चीजों को स्वीकारने से आता है। कुल मिलाकर, फिल्म आगे बढ़ने की कोशिश तो करती है, पर किसी तरह बची ही रह पाती है।

सवाल-जवाब

क्या द डॉग स्टार्स देखने लायक है?
यदि आप रिडले स्कॉट के विजुअल स्टाइल और डोलोमाइट्स पर्वत की खूबसूरत सिनेमैटोग्राफी के शौकीन हैं तो यह फिल्म देखी जा सकती है, हालांकि धीमी रफ्तार और कमजोर पटकथा के चलते यह बहुत प्रभावी नहीं है।
द डॉग स्टार्स जैसी कौन सी फिल्में हैं?
यह फिल्म 'आई एम लीजेंड' की वफादार कुत्ते वाली थीम, 'मैड मैक्स' के खतरनाक गिरोहों और 'फॉलआउट' की पोस्ट-अपोकैलिप्टिक दुनिया से काफी मिलती-जुलती है।
द डॉग स्टार्स फिल्म का निर्देशक कौन है और मुख्य कलाकार कौन हैं?
इस फिल्म का निर्देशन रिडले स्कॉट ने किया है और इसमें मुख्य भूमिकाओं में जैकब एलॉर्डी (हिग), जोश ब्रोलिन (बैंगली) और मार्गरेट क्वाली (सीमा) शामिल हैं।
क्या द डॉग स्टार्स किसी किताब पर आधारित है?
हाँ, यह फिल्म लेखक पीटर हेलर द्वारा 2012 में लिखे गए इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है।
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