महाराष्ट्र के मुंबई से चलकर गुजरात के अहमदाबाद की तरफ जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर एक गंभीर घटना सामने आई है। सूरत के उतरान रेलवे स्टेशन के नजदीक अज्ञात व्यक्ति ने इस हाई-स्पीड ट्रेन पर पत्थर फेंके। जिस समय यह पथराव हुआ, उस दौरान उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल इसी ट्रेन में सवार होकर यात्रा कर रही थीं। सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पत्थरबाजी करने वाले शख्स को हिरासत में ले लिया है। शुरुआती जांच और पूछताछ में यह सामने आया है कि आरोपी मानसिक रूप से पूरी तरह स्थिर नहीं है। रेलवे सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से छानबीन कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अप्रत्याशित घटना के पीछे कोई सोची-समझी साजिश थी या यह महज़ एक मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति की हरकत थी। गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी भी यात्री को गंभीर चोट आने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है, लेकिन ट्रेन के शीशों या बाहरी हिस्से को नुकसान पहुँचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
वंदे भारत ट्रेनों से जुड़ी हालिया सुरक्षा और हादसे की अन्य घटनाएं
भारतीय रेलवे का आधुनिक गौरव मानी जाने वाली वंदे भारत ट्रेनों के सामने हाल के दिनों में कई तरह की चुनौतियाँ और हादसे सामने आए हैं। कुछ समय पहले ही उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में एक वंदे भारत ट्रेन से सांड की टक्कर हो गई थी, जिसके कारण ट्रेन के अगले हिस्से को भारी क्षति पहुँची थी। वह वंदे भारत ट्रेन मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर खजुराहो से चलकर उत्तर प्रदेश के धार्मिक नगर वाराणसी की ओर जा रही थी। यह दुर्घटना जीआरपी महोबा के अंतर्गत आने वाले किड़ारी फाटक के पास घटित हुई थी। अचानक पटरियों पर मवेशी आ जाने के कारण लोको पायलट को आपातकालीन ब्रेक लगाने पड़े और टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रेन का आगे का कवच क्षतिग्रस्त हो गया। इस हादसे के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ट्रेन को लगभग एक घंटे तक घटनास्थल पर ही रोकना पड़ा था। रेलवे के तकनीकी स्टाफ ने मौके पर ही युद्धस्तर पर मरम्मत का काम किया और ट्रेन पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही उसे आगे के गंतव्य के लिए रवाना किया गया।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अब तक का राजनीतिक जीवन
सूरत की इस घटना के केंद्र में रहीं आनंदीबेन पटेल का सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन काफी संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है। राजनीति के क्षेत्र में कदम रखने से पूर्व वे एक स्कूल में विज्ञान और गणित विषय की शिक्षिका के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही थीं। साल 1987 का वह वाकया उनके जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ जब उन्होंने नर्मदा नदी के तेज बहाव में डूब रही दो स्कूली छात्राओं की जान बचाकर अभूतपूर्व और अदम्य साहस का परिचय दिया था। उनकी इस बहादुरी और जांबाजी के लिए उन्हें प्रतिष्ठित 'वीरता पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था। इसी साहसिक घटना के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होने का निर्णय लिया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण करके अपने राजनीतिक सफर का विधिवत श्रीगणेश किया। पार्टी संगठन में शामिल होने के बाद उन्होंने अपनी कार्यकुशलता के बल पर बहुत तेजी से राजनीतिक सीढ़ियाँ चढ़ीं और हमेशा समाज में महिलाओं के अधिकारों और उनकी आवाज़ को प्रमुखता से उठाया।
संगठन और शासन दोनों स्तरों पर अपनी गहरी पकड़ बनाने के बाद वे वर्ष 1994 से 1998 तक देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा की सांसद रहीं। इसके बाद उन्होंने राज्य की राजनीति का रुख किया और गुजरात विधानसभा की विधायक चुनी गईं। जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे थे, तब उनके मंत्रिमंडल में आनंदीबेन पटेल ने राजस्व, शिक्षा और शहरी विकास जैसे बेहद महत्वपूर्ण और भारी-भरकम मंत्रालय अपने पास रखे और अपनी प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवाया। इसके पश्चात, साल 2014 के आम चुनावों में जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने, तब आनंदीबेन पटेल ने इतिहास रचते हुए गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की बागडोर संभाली और अगस्त 2016 तक इस पद पर पूरी निष्ठा से कार्य किया। मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारियों से मुक्त होने के बाद उन्हें देश के विभिन्न राज्यों में संवैधानिक पदों पर भेजने का सिलसिला शुरू हुआ। उन्होंने साल 2018 से 2019 तक मध्य प्रदेश की राज्यपाल के तौर पर कार्यभार संभाला और अपनी प्रशासनिक सूझबूझ का परिचय दिया। इसके बाद जुलाई 2019 में उन्हें उत्तर प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जहाँ वे वर्तमान में भी अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं।





















