जर्मनी के शीर्ष नेतृत्व ने हाल ही में देश के भीतर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बनाकर की जा रही ड्रोन गतिविधियों को लेकर बेहद कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि इस तरह के खतरनाक कृत्यों और हमलों के पीछे जो लोग भी हैं, उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और एक बड़ी कीमत चुकानी होगी। हाल ही में पूर्वी जर्मनी स्थित लीजप एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों को जो संदिग्ध स्थिति का सामना करना पड़ा था, उसने प्रशासन को हिलाकर रख दिया है।
यह पूरा वाकया 4 अगस्त का है जब लीजप-हाले एयरपोर्ट के परिसर में एक ड्रोन बरामद हुआ था, जिसके साथ विस्फोटक सामग्री भी लगी हुई थी। गनीमत यह रही कि इस ड्रोन में लगा डेटोनेटर ठीक से काम नहीं कर सका, जिसकी वजह से समय रहते एक बड़ा धमाका टल गया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने रोबोट की मदद से इस विस्फोटक को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया। प्रारंभिक जांच-पड़ताल के दौरान सुरक्षा बलों को इस बात के भी संकेत मिले हैं कि इस घटना के आसपास ही शायद एक अन्य ड्रोन किसी कार्गो विमान से टकरा गया था। हालांकि इस पूरे मामले को लेकर अभी तक सरकार की तरफ से सीधे तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन सुरक्षा मामलों के जानकार यह अंदेशा जता रहे हैं कि इसके तार रूस से जुड़े हो सकते हैं। दूसरी ओर, मास्को ने इन तमाम आरोपों से साफ इनकार किया है।
लीजिएप-हाले एयरपोर्ट की सामरिक और आर्थिक महत्ता
जिस लीजप-हाले एयरपोर्ट को इस घटना के लिए चुना गया, वह देश की साजो-सामान की आपूर्ति और सामरिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। इस हवाई अड्डे का इस्तेमाल केवल व्यावसायिक उड़ानों तक सीमित नहीं है, बल्कि जर्मनी की सेना और नाटो के सहयोगी देश भी सैन्य सामग्री के परिवहन के लिए इसी स्थान पर निर्भर रहते हैं। इसके अलावा, यह यूक्रेन की प्रसिद्ध एंटोनोव एयरलाइंस का मुख्य परिचालन आधार भी है, जो यूक्रेन के अधिकांश हवाई कार्गो का संचालन संभालती है। इसके साथ ही वैश्विक लॉजिस्टिक्स दिग्गज कंपनी डीएचएल का भी यह एक बहुत बड़ा केंद्र माना जाता है।
सरकारी गठबंधन की एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए फ्रेडरिक मर्ज ने इस बात को रेखांकित किया कि देश के समक्ष ऐसी गंभीर समस्याएं आ रही हैं जिनका उद्गम स्थल देश की सीमा के बाहर है और इनसे आंखें मूंदना नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि हमलावर अब किसी भी हद तक जाने को आमादा हैं, जिन्हें न तो संपत्ति के भारी-भरकम नुकसान की परवाह है और न ही वे इंसानी जिंदगियों पर मंडरा रहे जानलेवा खतरों की कोई सुध ले रहे हैं।
जांच का दायरा और हेक्साजेन विस्फोटक के निशान
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना की तह तक जाने के लिए की जा रही छानबीन में अब एक तीसरे ड्रोन की मौजूदगी का भी पता चला है जिसे एयरपोर्ट के नजदीक ही खोज निकाला गया है। देश के प्रमुख सार्वजनिक प्रसारकों एनडीआर, डब्ल्यूडीआर और प्रसिद्ध समाचार पत्र सुएडडॉयचे साइटुंग की साझा रिपोर्टों में यह खुलासा किया गया है कि घटनास्थल के आसपास सैन्य उपयोग में आने वाले खतरनाक विस्फोटक हेक्साजेन के अंश भी बरामद किए गए हैं। नोहरडनबर्ग में चल रहे सरकारी गठबंधन के मंथन शिविर के दौरान बोलते हुए चांसलर ने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण को लेकर देश की तमाम प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर बहुत गहराई से काम कर रहा है और जल्द ही इससे जुड़ी विस्तृत जानकारियों को सार्वजनिक किया जाएगा।
यूक्रेन को समर्थन और रूस के खिलाफ सख्त रुख
इस संकट के बीच जर्मन नेतृत्व ने यूक्रेन की तरफ से चल रही लड़ाई में अपने सहयोग को जारी रखने का संकल्प दोहराया है। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी दृढ़ता के साथ यूक्रेन के पाले में खड़ी रहेगी। आज की तारीख में जर्मनी यूक्रेन का सबसे बड़ा मददगार देश है, और इस मदद का मकसद युद्ध को खींचना कतई नहीं है बल्कि इसके विपरीत दोनों पक्षों को शांति वार्ताओं की मेज पर आने के लिए मजबूर करना है। इस तरह के बाहरी खतरों से निपटने के लिए बर्लिन अब कई नए और कड़े सुरक्षा उपाय शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इन सुरक्षा उपायों में हवाई क्षेत्र की निगरानी और ड्रोन हमलों को नाकाम करने वाली रक्षा प्रणालियों को और अधिक पुख्ता करना शामिल है। इसके साथ ही सरकार सुरक्षा एजेंसियों को इस बात के लिए भी कानूनी रूप से सशक्त बनाने की योजना पर विचार कर रही है ताकि वे देश के भीतर और जरूरत पड़ने पर विदेशों में भी ऐसे हमलावरों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर सकें, जिसमें उनके कंप्यूटर सर्वर को हैक करने जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। पिछले कुछ महीनों के दौरान देश के कई अति-संवेदनशील ठिकानों जैसे कि सैन्य अड्डों, हवाई अड्डों, ऊर्जा टर्मिनलों, समुद्री बंदरगाहों और प्रमुख लॉजिस्टिक्स पार्कों के ऊपर अनाधिकृत ड्रोन उड़ानों का एक लंबा सिलसिला देखा गया है। पुलिस पहले ही चेतावनी जारी कर चुकी है कि इन संदिग्ध उड़ानों के संचालन के पीछे रूसी एजेंटों का हाथ हो सकता है।























