नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय 53वीं प्रगति बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर के बुनियादी ढांचा विकास कार्यों की व्यापक समीक्षा की। इस महत्वपूर्ण सत्र में नौ राज्यों में फैली 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत की छह प्रमुख परियोजनाओं का विस्तृत जायजा लिया गया। प्रशासन और निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट संदेश देते हुए यह जोर दिया गया कि गति बढ़ाने की प्रक्रिया में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। केंद्र और राज्य प्रशासनों के बीच बेहतर आपसी तालमेल तथा सक्रिय कार्यसंस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। इस समीक्षा बैठक के दौरान परिवहन, ऊर्जा और कृषि से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर मंथन किया गया।
परियोजनाओं को समग्र रूप से देखने की सलाह
समीक्षा के दौरान बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को खंडित दृष्टिकोण से देखने के बजाय एक संपूर्ण और एकीकृत श्रृंखला के रूप में देखने का सुझाव दिया गया। सड़क, रेल और विद्युत आपूर्ति से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना सुनिश्चित करने को कहा गया। विकास कार्यों के प्रत्येक चरण में लगातार सुधार प्रक्रिया जारी रखना अनिवार्य बताया गया। परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो, इसके लिए सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। जनता को इन विकास पहियों का लाभ समय पर मिल सके, इसके लिए केंद्र तथा राज्यों को समन्वित प्रयास करने होंगे।
कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक और एआई का विस्तार
बैठक के दौरान एग्रीस्टैक की प्रगति का भी गहन मूल्यांकन किया गया। कृषि क्षेत्र में आधुनिक डिजिटल तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही गई। कृषि संबंधी आंकड़ों का सटीक विश्लेषण करके किसानों को उन्नत और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे न केवल फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, बल्कि अन्नदाताओं की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी।
साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट पर सख्त रुख
देशभर में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों और डिजिटल अरेस्ट की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। पुलिस विभागों और विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच अधिक प्रभावी समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ विशेष प्रशिक्षण दिए जाने के निर्देश जारी किए गए। सामान्य नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बताई गई। जब तक आम जनमानस पूरी तरह सतर्क नहीं होता, तब तक इस तरह के फर्जी और आपराधिक कृत्यों पर पूरी तरह अंकुश लगाना संभव नहीं हो सकता है।




















