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कानपुर में 250 करोड़ के ऑनलाइन घोटाले का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने फर्जी खाते खोलने वाले बैंक मैनेजर मुकेश झा को भेजा जेलउत्तर प्रदेश
21 अग॰ 2026, 8:02 am (2 घंटे पहले)· 2

कानपुर में 250 करोड़ के ऑनलाइन घोटाले का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने फर्जी खाते खोलने वाले बैंक मैनेजर मुकेश झा को भेजा जेल

कानपुर की बर्रा पुलिस ने 250 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड मामले में स्मॉल फाइनेंस बैंक के रिलेशन मैनेजर मुकेश झा को गिरफ्तार किया है। आरोपी साइबर अपराधियों के साथ मिलकर बोगस फर्मों के फर्जी बैंक खाते खोलता था और भारी कमीशन लेकर करोड़ों के लेनदेन की अनुमति देता था।

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में सामने आए 250 करोड़ रुपये से अधिक के विशाल साइबर वित्तीय घोटाले की जांच कर रही बर्रा थाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए बैंक अधिकारी को गिरफ्तार किया है। पुलिस की टीम ने कार्रवाई करते हुए स्मॉल फाइनेंस बैंक के रिलेशन मैनेजर मुकेश झा को दबोचकर सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस द्वारा की गई पड़ताल के अनुसार, गिरफ्तार बैंक कर्मचारी साइबर अपराधियों के एक बड़े सिंडिकेट के साथ साठगांठ कर फर्जी और बोगस कंपनियों के नाम पर अनधिकृत बैंक खाते खोल रहा था। इन फर्जी खातों के जरिए देश भर से साइबर ठगी द्वारा जुटाई गई करोड़ों रुपये की अवैध राशि को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने की सुविधा प्रदान की जा रही थी।

पुलिसिया जांच में यह गंभीर तथ्य उजागर हुआ है कि इन संदिग्ध बैंक खातों का इस्तेमाल मुख्य रूप से आम नागरिकों से डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं और जीएसटी चोरी से जुड़ी काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि बैंक कर्मचारी इस संगठित गिरोह का हिस्सा बनकर पूरी तरह से साइबर ठगों को प्रशासनिक सहायता दे रहे थे। इसके बदले में उन्हें प्रत्येक संदिग्ध लेनदेन की कुल राशि का 5 प्रतिशत से लेकर 10 प्रतिशत तक का भारी-भरकम कमीशन दिया जाता था।

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फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलने का पूरा खेल

पुलिस जांच में अपराधियों के काम करने के तरीके (मोडस ऑपरेंडी) की परतें खुली हैं। साइबर ठग पहले आम लोगों को पैसों का लालच देकर, नौकरी या बिजनेस का झांसा देकर उनके महत्वपूर्ण पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में ले लेते थे। इसके बाद इन असली दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करते हुए कागजों पर फर्जी यानी बोगस फर्में बनाई जाती थीं।

इन फर्जी कंपनियों का खाका तैयार होने के बाद, इन्हीं संस्थाओं के नाम पर व्यावसायिक बैंक खाते खोले जाते थे। पुलिस के मुताबिक कानपुर के गुमटी नंबर-5 स्थित स्मॉल फाइनेंस बैंक की शाखा में विमलेश जनरल स्टोर, अर्जुन नमकीन भंडार और राज कॉन्ट्रैक्टर्स जैसी कई फर्जी फर्मों के नाम पर चालू खाते (करंट अकाउंट) खोले गए थे। इन सभी फर्जी व्यावसायिक खातों को खोलने और कागजी औपचारिकताओं को पूरा कराने में बैंक के रिलेशन मैनेजर मुकेश झा की प्रत्यक्ष और मुख्य भूमिका पाई गई है।

करोड़ों के लेनदेन के लिए खातों की सीमा बढ़ाने और कमीशन का खुलासा

जांच में यह चौंकाने वाली बात भी सामने आई है कि फर्जी फर्मों के नाम पर खोले गए इन खातों से बड़े पैमाने पर पैसों की हेराफेरी करने के लिए इनकी रोजमर्रा की लेनदेन सीमा (ट्रांजेक्शन लिमिट) को नियम-विरुद्ध तरीके से करोड़ों रुपये तक बढ़ा दिया गया था। लिमिट बढ़ाए जाने के बाद गिरोह के सदस्य डिजिटल अरेस्ट, फर्जी इन्वेस्टमेंट स्कीमों और अन्य ऑनलाइन अपराधों के शिकार बने लोगों से हड़पी गई रकम को सीधे इन खातों में ट्रांसफर करवाते थे।

पुलिस के अनुसार, बैंक कर्मचारी इन खातों में आने-जाने वाली बड़ी रकम पर चौबीसों घंटे निगरानी रखते थे। यदि किसी बैंक खाते के संबंध में राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या किसी अन्य पुलिस स्टेशन से शिकायत प्राप्त होती थी, तो बैंककर्मी तुरंत सक्रिय हो जाते थे। खाते में जमा रकम को होल्ड या फ्रीज होने से बचाने के लिए वे त्वरित रूप से उस पैसे को अन्य विभिन्न माध्यमों और खातों में ट्रांसफर करवा देते थे। इस आपराधिक मिलीभगत के लिए मुकेश झा 5 से 10 प्रतिशत का सीधा कमीशन वसूलता था। पुलिस ने मुकेश झा के खिलाफ पर्याप्त डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य जुटाने के बाद गुरुवार को उसे अदालत में प्रस्तुत किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

मामले में अब तक 10 गिरफ्तारियां और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच

बर्रा पुलिस ने पुष्टि की है कि 250 करोड़ रुपये से अधिक के इस वृहद साइबर फ्रॉड नेटवर्क के मामले में अब तक कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुकेश झा की गिरफ्तारी से पहले पुलिस इस मामले में शामिल राजवीर सिंह, शिवम सिन्हा, स्क्रैप कारोबारी अंचित गोयल और ड्राइवर सतीश पांडेय समेत कई अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इसके साथ ही इस पूरे बैंकिंग चैनल में शामिल अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की संलिप्तता की भी गहनता से जांच की जा रही है।

मामले की जांच कर रही पुलिस टीम पकड़े गए आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है। उनके पास से जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और वित्तीय दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर साइबर नेटवर्क की एक-एक कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। जांच में बिहार मूल के रहने वाले और कानपुर के गोविंद नगर इलाके में निवास करने वाले अभय शुक्ला उर्फ सुल्तान मिर्जा का नाम इस पूरे साइबर सिंडिकेट के मुख्य सरगना के रूप में सामने आया है। गिरोह के सदस्यों की लगातार हो रही गिरफ्तारियों को देखकर आरोपी सुल्तान मिर्जा भारत से फरार होकर पहले नेपाल पहुंचा और फिर वहां से दुबई भाग गया। जेल भेजे गए आरोपियों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में पुलिस को सुल्तान मिर्जा का एक वीडियो भी मिला है। पुलिस अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले इस गिरोह के अन्य सहयोगियों और विदेश में छिपे सरगना की धरपकड़ के लिए विधिक प्रयास कर रही है।

डिजिटल अरेस्ट के जरिए 1.83 करोड़ रुपये की एक और बड़ी ठगी

कानपुर में साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि एक अन्य पृथक मामले में ठगों ने एक सेवानिवृत्त अधिकारी को अपना शिकार बनाकर 1 करोड़ 83 लाख रुपये की भारी भरकम राशि चपत लगा दी। साइबर अपराधियों ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसी का अधिकारी बताकर रिटायर्ड अफसर को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी थी।

ठगों ने पीड़ित बुजुर्ग अफसर को लगातार 12 दिनों तक अपने कमरे में बंद रहने यानी 'डिजिटल अरेस्ट' में रहने पर मजबूर किया। इस दौरान लगातार डरा-धमकाकर उनसे 1 करोड़ 83 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। पुलिस इन दोनों मामलों में फर्जी बैंक खातों, शेल कंपनियों और वित्तीय लेनदेन के ट्रेल की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।

सवाल-जवाब

कानपुर साइबर ठगी मामले में बैंक मैनेजर की क्या भूमिका थी?
स्मॉल फाइनेंस बैंक के रिलेशन मैनेजर मुकेश झा ने ठगों के लिए बोगस फर्में बनाकर फर्जी खाते खोले और उनमें करोड़ों रुपये के लेनदेन के लिए खातों की सीमा बढ़ाई।
बैंककर्मियों को इस साइबर फ्रॉड में क्या फायदा मिल रहा था?
बैंककर्मियों को फर्जी खातों में होने वाले करोड़ों रुपये के लेनदेन के बदले 5 से 10 प्रतिशत तक का भारी कमीशन मिल रहा था।
250 करोड़ रुपये के इस साइबर घोटाले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
बर्रा पुलिस ने इस मामले में बैंक मैनेजर मुकेश झा समेत कुल 10 आरोपियों को अब तक गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
इस साइबर नेटवर्क का मुख्य सरगना कौन है और वह कहां छिपा है?
बिहार मूल के गोविंद नगर निवासी अभय शुक्ला उर्फ सुल्तान मिर्जा को सरगना बताया गया है, जो पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए नेपाल के रास्ते दुबई भाग गया है।
कानपुर में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी दूसरी घटना में क्या हुआ?
ठगों ने एक रिटायर्ड अफसर को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाकर 12 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और उनसे 1.83 करोड़ रुपये ठग लिए।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

यह मामला इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे संगठित साइबर अपराधी अब बैंकिंग प्रणाली के भीतर के लोगों को अपने साथ मिला रहे हैं। इस 250 करोड़ रुपये के घोटाले में बैंक अधिकारी की सीधी संलिप्तता यह दर्शाती है कि केवाईसी नियमों की अनदेखी और आंतरिक नियंत्रण की कमी वित्तीय अपराधों को कितना बढ़ावा दे रही है। आगे की जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस सिंडिकेट के तार अन्य वित्तीय संस्थानों से भी जुड़े हैं और इस अवैध नेटवर्क में बैंक के अन्य उच्चाधिकारियों की क्या भूमिका रही है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

यह घटना उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों और बैंकिंग तंत्र की अंदरूनी कमजोरियों का एक गंभीर प्रमाण है। जिस तरह से कानपुर के इस मामले में फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों का लेनदेन हुआ, वह यह रेखांकित करता है कि क्षेत्रीय स्तर पर बैंक कर्मियों की मिलीभगत से वित्तीय सुरक्षा कितनी खतरे में है। अब यह देखना अहम होगा कि पुलिस इस राष्ट्रव्यापी सिंडिकेट की जड़ों तक पहुँचने के लिए वित्तीय खुफिया इकाइयों की कितनी मदद लेती है और अन्य सह-आरोपियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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