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24 साल पुराने इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में आया फैसला, बेटी और आईपीएस लक्ष्मी सिंह को मिला न्यायउत्तर प्रदेश
8 जुल॰ 2026, 9:35 pm (112 दिन पहले)· 3

24 साल पुराने इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में आया फैसला, बेटी और आईपीएस लक्ष्मी सिंह को मिला न्याय

लखनऊ के चर्चित वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की हत्या के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला उनकी बेटी और नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के लिए दो दशक से अधिक के संघर्ष के अंत का प्रतीक है।

लखनऊ की सड़कों पर करीब 24 वर्ष पूर्व हुए एक वीभत्स हत्याकांड ने न केवल कानूनी जगत को बल्कि पूरे प्रदेश को दहला कर रख दिया था। वरिष्ठ वकील और लखनऊ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे इंद्रदेव सिंह की दिनदहाड़े हत्या के मामले में 7 जुलाई 2026 को सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया। इस हाई प्रोफाइल मामले में अदालत ने विक्रम यादव, पन्ना सिंह और बृजेश यादव को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसले के समय अदालत परिसर में एक भावुक मंजर देखने को मिला, जहां उनकी बेटी और गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह अपनी मां नयनतारा सिंह के साथ मौजूद थीं। लंबे संघर्ष के बाद मिले इस न्याय ने परिवार के धैर्य को सार्थक कर दिया।

घटना का विवरण और तत्कालीन परिस्थितियां

यह दुखद घटना 8 अगस्त 2002 की है। वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ से अपना कार्य निपटाकर घर लौट रहे थे। जब वे कलेक्ट्रेट के पीछे एक सुनसान गली से गुजर रहे थे, तभी हमलावरों ने उन्हें घेर लिया और उन पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। घटनास्थल पर ही उनकी मृत्यु हो गई थी। इंद्रदेव सिंह न केवल एक प्रखर कानूनी विशेषज्ञ थे, बल्कि बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष के रूप में उनकी एक प्रभावशाली पहचान थी। उनकी सरेआम हुई हत्या ने उस समय की कानून-व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए थे, जिससे पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया था।

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कानूनी प्रक्रिया और सजा

इस हत्याकांड की जांच शुरुआती दिनों में स्थानीय स्तर पर की गई थी, लेकिन जांच की दिशा और गुणवत्ता को लेकर परिवार ने बार-बार असंतोष प्रकट किया। परिवार ने लगातार इस मामले की जांच किसी निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी से कराए जाने की मांग उठाई थी। अंततः यह केस सीबीआई को स्थानांतरित किया गया। मामले में कुल 6 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के दौरान तीन आरोपियों की मृत्यु हो गई थी। सीबीआई ने साक्ष्यों को इकट्ठा किया और अदालत में मजबूत दलीलें पेश कीं, जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने शेष तीन जीवित आरोपियों—विक्रम यादव, पन्ना सिंह और बृजेश यादव—को दोषी पाया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाकर मामले का पटाक्षेप किया।

लंबे संघर्ष का समापन

इस केस के पीछे का सबसे बड़ा संघर्ष इंद्रदेव सिंह की बेटी लक्ष्मी सिंह का था, जिन्होंने एक बेटी और एक जिम्मेदार अधिकारी के तौर पर सालों तक इस न्याय की लड़ाई को जारी रखा। फैसला सुनाए जाने के बाद लक्ष्मी सिंह और उनकी मां नयनतारा सिंह ने राहत की सांस ली। 24 वर्षों का यह लंबा कानूनी सफर आखिरकार दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने के साथ संपन्न हुआ। पीड़ित परिवार ने इस फैसले को अपने लंबे संघर्ष का सुखद अंत और दिवंगत इंद्रदेव सिंह के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया है।

सवाल-जवाब

इंद्रदेव सिंह कौन थे?
इंद्रदेव सिंह एक वरिष्ठ अधिवक्ता और लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष थे।
हत्या कब और कहां हुई थी?
यह घटना 8 अगस्त 2002 को लखनऊ में कलेक्ट्रेट के पीछे एक गली में हुई थी।
कितने लोगों को सजा सुनाई गई?
सीबीआई अदालत ने कुल 3 लोगों को दोषी माना और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
फैसले के समय कोर्ट में कौन मौजूद था?
फैसले के वक्त इंद्रदेव सिंह की बेटी और नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह अपनी मां नयनतारा सिंह के साथ मौजूद थीं।
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