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दिल्ली पुलिस में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी ईशा सिंह को मिली नई जिम्मेदारीभारत
10 सित॰ 2026, 2:50 pm (49 दिन पहले)· 2

दिल्ली पुलिस में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी ईशा सिंह को मिली नई जिम्मेदारी

दिल्ली पुलिस महकमे में हाल ही में पांच आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं, जिसमें 2021 बैच की अधिकारी ईशा सिंह को डीसीपी लीगल सेल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। बचपन में पिता की नौकरी छूटने से उपजे संकल्प को पूरा करते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।

राष्ट्रीय राजधानी की पुलिस व्यवस्था में हाल ही में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। इस बदलाव के तहत पांच भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस अधिकारियों को नई भूमिकाएं सौंपी गई हैं, जिनमें साल 2021 बैच की तेज-तर्रार अधिकारी ईशा सिंह की तैनाती सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है। डीसीपी वेलफेयर का कामकाज संभाल रहीं ईशा सिंह को अब दिल्ली पुलिस में डीसीपी लीगल सेल का अतिरिक्त दायित्व भी दे दिया गया है।

कानूनी समझ और खाकी विरासत

कानून की बारीक समझ और बेखौफ अंदाज में काम करने के लिए पहचानी जाने वाली ईशा सिंह की यह नई तैनाती उनकी पेशेवर विशेषज्ञता पर मुहर लगाती है। हालांकि उनका यह सफर केवल सिविल सेवा परीक्षा पास करने भर की साधारण कहानी नहीं है, बल्कि इसके पीछे उनके परिवार का लंबा संघर्ष, अटूट ईमानदारी और न्याय के प्रति समर्पण छिपा हुआ है। महज साढ़े आठ साल की उम्र में उनके पिता की पुलिस सेवा से विदाई हो गई थी, तभी उन्होंने ठान लिया था कि वे वर्दी पहनकर व्यवस्था की खामियों को दूर करेंगी।

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परिवार की तीसरी पीढ़ी और खाकी का रिश्ता

ईशा सिंह का खाकी और जनसेवा के साथ पुराना नाता रहा है। वे अपने परिवार में इस सेवा में आने वाली तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनके दादा स्वर्गीय आर बी सिंह और उनके पिता योगेश प्रताप सिंह दोनों ही आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं। उनके पिता 1985 बैच के बेहद ईमानदार अधिकारी के रूप में जाने जाते थे। नब्बे के दशक में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई में रहते हुए उन्होंने कई बड़े घोटालों का पर्दाफाश किया था। हालांकि ईमानदारी की भारी कीमत चुकाते हुए उन्हें प्रशासनिक विरोध का सामना करना पड़ा और अंततः उन्हें साल 2004 में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

बचपन का वो कड़ा फैसला

जब साल 2004 में प्रशासनिक दबाव के चलते उनके पिता योगेश प्रताप सिंह ने इस्तीफा दिया, तब ईशा सिंह की उम्र महज साढ़े आठ साल थी। पिता को बिना पेंशन के और कई वर्षों तक कड़े संघर्ष से गुजरता हुआ देखकर उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपने परिवार की इस अधूरी लड़ाई को आगे बढ़ाएंगी। ईशा का मानना था कि देश को ऐसे संवेदनशील और सामाजिक रूप से जवाबदेह नेतृत्व की सख्त जरूरत है। बचपन की इसी एक जिद और पक्के इरादे ने उन्हें सिविल सेवा परीक्षा की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

मां का साथ और वकालत के अनुभव

ईशा सिंह की माता आभा सिंह भी केंद्रीय सेवा की अधिकारी रह चुकी हैं, जिन्होंने बाद में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर वकालत के क्षेत्र में कदम रखा। ईशा ने अपनी मां के लॉ ऑफिस में काम करते हुए समाज के बेसहारा और जरूरतमंद लोगों के लिए आवाज उठाई। सफाई कर्मचारियों के अधिकारों की पैरवी, विचाराधीन कैदियों को कानूनी सहायता दिलाना, दफ्तरों में महिलाओं के उत्पीड़न और अवैध गिरफ्तारियों के खिलाफ अदालत में दलीलें पेश करते हुए उन्होंने कानून के व्यावहारिक पहलुओं को बारीकी से समझा। इस समृद्ध कानूनी अनुभव का फायदा उन्हें अपनी पुलिस सेवा के दौरान भी मिल रहा है।

पुडुचेरी से दिल्ली तक का सफर

साल 2020 की संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 191वीं रैंक प्राप्त कर ईशा सिंह एजीएमयूटी कैडर की आईपीएस अधिकारी बनीं। पुडुचेरी में अपनी पहली तैनाती के दौरान दिसंबर 2025 में एक राजनीतिक रैली की अनियंत्रित भीड़ के सामने डटकर खड़े रहने के कारण उन्हें लेडी सिंघम के रूप में पहचान मिली थी। जनवरी 2026 में उनका तबादला दिल्ली कर दिया गया और अब उन्हें डीसीपी लीगल सेल की कमान सौंपी गई है, जहां वे विभाग से जुड़े कानूनी और अदालती मामलों को मजबूती से संभालेंगी।

दिल्ली पुलिस के अन्य प्रशासनिक बदलाव

ईशा सिंह के अलावा दिल्ली पुलिस के चार अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। साल 2008 बैच के चिन्मय बिस्वाल को संयुक्त पुलिस आयुक्त ऑपरेशन्स के साथ आईएफएसओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। साल 2010 बैच के ईश सिंघल को अपर पुलिस आयुक्त आर्थिक अपराध शाखा के पद पर तैनात किया गया है। इसके अलावा दिनेश कुमार गुप्ता को अपर पुलिस आयुक्त यातायात की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है, जबकि साल 2013 बैच के विकास कुमार को उप-पुलिस आयुक्त यातायात के पद पर नियुक्त किया गया है।

सवाल-जवाब

ईशा सिंह को दिल्ली पुलिस में कौन सी नई जिम्मेदारी मिली है?
ईशा सिंह को डीसीपी लीगल सेल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
ईशा सिंह किस बैच की आईपीएस अधिकारी हैं?
ईशा सिंह साल 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं।
ईशा सिंह ने यूपीएससी परीक्षा में कौन सी रैंक हासिल की थी?
उन्होंने वर्ष 2020 की यूपीएससी परीक्षा में 191वीं रैंक हासिल की थी।
ईशा सिंह को लेडी सिंघम की उपाधि क्यों मिली थी?
दिसंबर 2025 में पुडुचेरी में एक राजनीतिक रैली के दौरान बेकाबू भीड़ के सामने डटकर खड़े रहने पर उन्हें यह नाम मिला था।
ईशा सिंह के परिवार में पुलिस सेवा से कौन जुड़ा रहा है?
उनके दादा आर बी सिंह और उनके पिता योगेश प्रताप सिंह भी आईपीएस अधिकारी रहे हैं।
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