जून 2022 में लाई गई अग्निपथ योजना अब एक बेहद अहम पड़ाव पर आ गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत भारतीय सशस्त्र बलों में सेवाएं देने वाले पहले बैच के 18,300 से ज्यादा अग्निवीर 31 दिसंबर 2026 तक अपनी चार साल की सेवा पूरी करके सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। नौसेना, वायुसेना और थल सेना की ओर से 15 नवंबर के आसपास पहले बैच के लगभग 75 प्रतिशत अग्निवीरों को सेवा मुक्त करने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से शुरू कर दिया जाएगा।
भविष्य को लेकर चिंता की कोई जरूरत नहीं
चार साल तक देश की सीमाओं और सैन्य बलों की कमान संभालने के बाद जब ये युवा बाहर आएंगे, तो सबसे बड़ा सवाल इनके भविष्य को लेकर खड़ा होता है। हालांकि, इन युवाओं को बिल्कुल भी परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने इन प्रशिक्षित और अनुशासित जवानों को नागरिक जीवन में बेहतर ढंग से ढालने और उनके लिए स्थायी सरकारी नौकरियों के द्वार खोलने के लिए कई विशेष नीतियां और कोटे तैयार किए हैं।
सीएपीएफ और असम राइफल्स में पचास प्रतिशत आरक्षण
केंद्रीय गृह मंत्रालय और सरकार ने रिटायर होने वाले पूर्व अग्निवीरों के लिए सबसे बड़ा और राहत देने वाला कदम सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस यानी सीएपीएफ और असम राइफल्स की भर्तियों में उठाया है। इन केंद्रीय बलों में पूर्व अग्निवीरों के लिए कांस्टेबल यानी जनरल ड्यूटी और राइफलमैन के पदों पर होने वाली सीधी भर्तियों में 50% का भारी-भरकम आरक्षण तय किया गया है। इसके साथ ही इन्हें लिखित परीक्षा, फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट से पूरी तरह छूट प्रदान की जाएगी, जिससे सेना में ली गई उनकी कठोर ट्रेनिंग का सीधा लाभ उन्हें मिलेगा।
राज्य पुलिस और अन्य विभागों में सीधी एंट्री
केवल केंद्रीय सुरक्षा बल ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भी पूर्व अग्निवीरों को हाथों-हाथ लेने की पूरी तैयारी कर ली है। चंडीगढ़ प्रशासन ने चंडीगढ़ पुलिस कांस्टेबल भर्ती, जेल विभाग के जेल वॉर्डर, अग्निशमन सेवा और वन विभाग में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20% हॉरिजॉन्टल आरक्षण को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा देश के कई प्रमुख राज्यों ने भी अपनी राज्य पुलिस बल की भर्तियों में 10% से 20% तक का कोटा तय किया है। इतना ही नहीं, भारतीय रेलवे, इंडियन कोस्ट गार्ड और 16 डिफेंस पब्लिक सेक्टर यूनिट्स यानी डीपीएसयू में भी इनके लिए नौकरियां आरक्षित रहेंगी।
चार साल का अनुभव और सेवानिधि पैकेज
चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद जब ये अग्निवीर सेना से बाहर आएंगे, तो इनके पास केवल अमूल्य अनुशासन और अनुभव ही नहीं होगा, बल्कि आर्थिक मजबूती भी साथ होगी। रिटायरमेंट के वक्त इन्हें एकमुश्त सेवानिधि पैकेज दिया जाएगा, जो कि लगभग 11.71 लाख रुपये और उस पर मिलने वाले ब्याज के रूप में होगा। इस पूरी राशि पर किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लगेगा। इस वित्तीय फंड का इस्तेमाल युवा अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने, खुद का कोई नया बिजनेस शुरू करने या फिर अपनी प्रोफेशनल स्किल्स को और बेहतर बनाने में कर सकते हैं.
कॉर्पोरेट सेक्टर में भी खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
जो पूर्व अग्निवीर सरकारी सेवा में नहीं जाना चाहते हैं, उनके लिए कॉरपोरेट जगत में भी करियर के बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं। देश के बड़े कॉर्पोरेट घराने, विमानन यानी एविएशन सेक्टर और निजी सुरक्षा एजेंसियां सैन्य अनुशासन में पूरी तरह ढले इन पूर्व अग्निवीरों को सुपरवाइजरी और मैनेजमेंट रोल्स में प्राथमिकता देने की घोषणा पहले ही कर चुकी हैं। सेवामुक्ति के वक्त हर अग्निवीर को एक आधिकारिक स्किल सर्टिफिकेट भी सौंपा जाएगा, जिसकी मदद से देशी और विदेशी दोनों ही कंपनियों में उनकी योग्यता और क्षमता आसानी से प्रमाणित हो सकेगी।
















