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3500 किलो की तोप, 30 लुटेरे और एक डंडा: मध्य प्रदेश के नरवर किले में 400 साल पुरानी धरोहर की सनसनीखेज चोरीमध्य प्रदेश
23 जुल॰ 2026, 6:09 pm (51 दिन पहले)· 0

3500 किलो की तोप, 30 लुटेरे और एक डंडा: मध्य प्रदेश के नरवर किले में 400 साल पुरानी धरोहर की सनसनीखेज चोरी

मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से 25 से 30 हथियारबंद बदमाशों ने 17वीं सदी की 3500 किलो वजनी अष्टधातु की तोप लूट ली है। राजस्थान तक पहुंची इस मामले की जांच में प्रशासन की भारी लापरवाही और किले की बदहाल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है।

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से एक बेहद चौंकाने वाली डकैती का मामला सामने आया है। भगवान राम के पुत्र कुश की राजधानी और राजा नल तथा दमयंती की अमर प्रेम कहानी के गवाह रहे इस प्राचीन किले की सुरक्षा व्यवस्था की उस समय पोल खुल गई, जब भारी संख्या में आए लुटेरों ने एक बेशकीमती ऐतिहासिक धरोहर को पार कर दिया। 15 और 16 जुलाई की दरम्यानी रात को 25 से 30 की संख्या में आए हथियारबंद बदमाशों ने किले पर धावा बोला और 17वीं सदी की एक अत्यंत दुर्लभ अष्टधातु की तोप लूटकर ले गए। इस तोप का वजन करीब 3500 किलो (35 टन) बताया जा रहा है। इतने भारी-भरकम वजन वाली तोप को किले से बाहर निकाल ले जाना प्रशासन की घोर लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था की बदहाली को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इस घटना ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश में पुरातत्व महत्व की प्राचीन वस्तुओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूर्व चेतावनी के बावजूद प्रशासन की लापरवाही

इस पूरी वारदात का सबसे हैरान कर देने वाला पहलू यह है कि यह चोरी अचानक नहीं हुई। इस बड़ी डकैती को अंजाम देने से ठीक 12 दिन पहले भी किले के परिसर में कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी गई थीं। उन संदिग्ध हलचलों को अब इस पूरी वारदात का एक प्रकार का 'ट्रेलर' माना जा रहा है। इतनी बड़ी चेतावनी मिलने के बावजूद, न तो पुरातत्व विभाग ने इसे गंभीरता से लिया और न ही स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा चाक-चौबंद करने की जहमत उठाई। पूरा प्रशासन गहरी नींद में सोता रहा, जिसका खामियाजा देश को अपनी एक अनमोल धरोहर गंवाकर चुकाना पड़ा। यदि उस प्रारंभिक संदिग्ध गतिविधि के तुरंत बाद किले की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई होती, तो शायद इस भारी-भरकम और ऐतिहासिक तोप को चोरी होने से बचाया जा सकता था।

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क्रेन और ट्रकों का हुआ इस्तेमाल

घटना की रात लुटेरों ने पूरी योजना के साथ काम किया। 15-16 जुलाई की रात को बदमाश किले के पिछले हिस्से वाले रास्ते से अंदर दाखिल हुए। 3500 किलो (35 टन) की इस विशालकाय तोप को हाथों से उठाना संभव नहीं था, इसलिए बदमाश अपने साथ बाकायदा क्रेन और ट्रक जैसी भारी लोडिंग गाड़ियां लेकर आए थे। रात के अंधेरे में ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी बाल किशन ने किले की चरमराई हुई सुरक्षा व्यवस्था की सच्चाई बयां की। उनका कहना है कि अचानक आधुनिक हथियारों से लैस 25 से 30 बदमाश वहां आ धमके। उन बदमाशों का सामना करने के लिए सुरक्षाकर्मियों के पास सुरक्षा के नाम पर केवल एक डंडा मौजूद था। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रात के घने अंधेरे में रोशनी करने के लिए उनके पास एक टॉर्च तक उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में निहत्थे गार्ड हथियारों से लैस उस भारी भीड़ के सामने पूरी तरह बेबस नजर आए।

करोड़ों की कीमत और ऐतिहासिक महत्व

यह चोरी गई तोप कोई आम लोहे का ढांचा नहीं थी, बल्कि 17वीं शताब्दी की एक नायाब ऐतिहासिक धरोहर थी। नरवर किले के ओपन कचहरी परिसर में पहले कुल 14 ऐतिहासिक तोपें रखी हुई थीं, जिनमें से इस घटना के बाद अब केवल 13 तोपें ही शेष बची हैं। यह अष्टधातु से निर्मित तोप मुगल और कछवाहा राजाओं के शासनकाल के दौरान विकसित उन्नत धातुकर्म और सैन्य युद्ध कौशल का एक बेजोड़ नमूना मानी जाती है। इसके बाहरी हिस्से पर विशेष प्रकार की नक्काशी की गई है और कई ऐतिहासिक चिह्न भी अंकित हैं। यही खूबियां इसे दुनिया भर के प्राचीन वस्तुओं के संग्राहकों के बीच बेहद दुर्लभ और कीमती बनाती हैं। जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय एंटीक ब्लैक मार्केट में इस 400 साल पुरानी तोप की कीमत करोड़ों रुपए में आंकी जा रही है, जो लुटेरों के लिए एक बहुत बड़ा आकर्षण का केंद्र थी।

पुलिस की जांच और राजस्थान कनेक्शन

इस दुस्साहसिक घटना के बाद पुलिस महकमे और पुरातत्व विभाग में जबरदस्त हड़कंप मच गया है। पुलिस ने तुरंत अज्ञात बदमाशों के खिलाफ डकैती और पुरातत्व अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा, साइबर सेल की विशेष टीमों की मदद से आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि लुटेरों का कोई सुराग मिल सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए तोप की तलाश अब राजस्थान के करौली जिले तक पहुंच गई है। मध्य प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम करौली पहुंच चुकी है, जहां स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर एक संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया है। वर्तमान में दोनों राज्यों की पुलिस टीमें तोप को जल्द से जल्द बरामद करने के लिए संयुक्त रूप से कार्रवाई कर रही हैं।

अधिकारियों के बयान और आगे की कार्रवाई

जांच के संबंध में शिवपुरी जिले के एसपी यांग चेन भूटिया डोलकर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नरवर किले से घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम की तहकीकात में यह सामने आया कि चोर तोप को किस तरीके से ले गए। उनके अनुसार, यह कोई हथियारबंद डकैती नहीं थी। एसपी ने बताया कि चूंकि यह तोप बहुत भारी चीज है, इसलिए इसे बहुत दूर तक ले जाने की संभावना काफी कम है। पुलिस ने चारों तरफ नाकेबंदी कर दी है और प्रारंभिक जांच में यह किसी इंटरनेशनल गैंग का काम नहीं लग रहा है। फिलहाल पूछताछ जारी है और यह आसपास के ही बदमाशों द्वारा की गई वारदात हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, पुरातत्व विभाग के संयुक्त संचालक तरुण कुमार महोबिया ने सुरक्षा व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि इंतजाम पूरे हैं, हालांकि चोरों के हिसाब से शायद वे कम पड़ गए। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में और कर्मचारी बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सबसे बड़ी गलती यह हुई कि रात के समय जो दो कर्मचारी ड्यूटी पर होने चाहिए थे, वे वहां से नदारद थे। यदि वे अपनी जगह मौजूद होते, तो शायद यह चोरी नहीं हो पाती।

सवाल-जवाब

मध्य प्रदेश के किस किले से ऐतिहासिक तोप चोरी हुई है?
यह भारी-भरकम ऐतिहासिक तोप शिवपुरी जिले में स्थित प्राचीन नरवर किले से चोरी हुई है।
चोरी हुई तोप का वजन और उम्र कितनी है?
यह तोप 17वीं सदी की है, यानी करीब 400 साल पुरानी है, और इसका वजन लगभग 3500 किलो (35 टन) आंका गया है।
यह दुर्लभ तोप किस धातु से बनी थी?
यह ऐतिहासिक तोप अष्टधातु (आठ धातुओं का मिश्रण) से बनी थी, जो मुगल और कछवाहा राजाओं के काल की उन्नत धातुकर्म का नमूना है।
इतनी भारी तोप को चोर किले से बाहर कैसे ले गए?
25 से 30 हथियारबंद बदमाश क्रेन और भारी लोडिंग ट्रकों का इस्तेमाल करके इस 3500 किलो की तोप को किले से बाहर ले गए।
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