भोपाल में मुख्यमंत्री आवास के समीप प्रदर्शन कर रहे एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों की तीन दिवसीय हड़ताल बुधवार को आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गई। राज्य सरकार द्वारा इंटर्न के मासिक स्टाइपेंड में लगभग 50 फीसदी की वृद्धि पर सहमति देने के बाद छात्र डॉक्टरों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया। इस फैसले के तहत अब इंटर्न डॉक्टरों को प्रति माह मिलने वाला स्टाइपेंड 14,337 रुपये से बढ़कर लगभग 21,500 रुपये हो जाएगा, जो सीधे तौर पर करीब 7,000 रुपये की मासिक बढ़ोतरी है। इसके साथ ही सोमवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों पर वाटर कैनन और लाठीचार्ज के मामले में पुलिस प्रशासन ने त्वरित प्रशासनिक कदम उठाते हुए दो दोषी पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया है।
स्टाइपेंड में 50 फीसदी बढ़ोतरी का फैसला
इंटर्न डॉक्टरों का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) के पदाधिकारी शामिल थे, ने मंत्रालय में उप मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान डॉक्टरों ने अपनी प्रमुख मांगों को विस्तार से रखा। वार्ता के बाद सरकार ने स्टाइपेंड में करीब 50 फीसदी बढ़ोतरी करने की मांग को स्वीकार कर लिया। वर्तमान में इंटर्न डॉक्टरों को 14,337 रुपये प्रति माह मिलते थे, जिन्हें बढ़ाकर अब लगभग 21,500 रुपये किया जा रहा है। स्टाइपेंड बढ़ाने के इस सरकारी आदेश और लिखित आश्वासन के बाद चिकित्सा संगठनों ने संतोष व्यक्त किया और काम पर लौटने की घोषणा की।
लाठीचार्ज मामले में दो पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
सोमवार को आंदोलनकारी छात्रों पर हुए वाटर कैनन और लाठीचार्ज के मामले की प्राथमिक जांच के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने पर आरक्षक कृष्ण दत्त शिवहरे और सहायक उप निरीक्षक नरेंद्र सिंह यादव को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया है। जूडा और एमटीए संगठनों ने पुलिस विभाग द्वारा की गई इस अनुशासनात्मक कार्रवाई का स्वागत किया है। संगठनों का कहना था कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे भावी डॉक्टरों पर बल प्रयोग पूरी तरह से अनुचित था।
स्वास्थ्य मंत्री की प्रेस वार्ता और मुख्यमंत्री के निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सोमवार को घटी घटना को अत्यंत दुखद और निंदनीय करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र अपने परिसर में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे और उनके साथ हुए दुर्व्यवहार से राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी काफी नाराज थे। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव भले ही उस समय दुबई के आधिकारिक दौरे पर थे, लेकिन वे वहां से भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए थे। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बाद ही वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जांच की और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कदम उठाया। इसके अलावा उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि हड़ताल में शामिल किसी भी एमबीबीएस इंटर्न छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सड़क मार्ग खुला और डॉक्टरों ने जताया आभार
मांगों पर सकारात्मक निर्णय आने के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित धरना स्थल को खाली कर दिया है। सड़क खाली होने के बाद वहां पिछले दो दिनों से बंद पड़ा आवाजाही का रास्ता पूरी तरह खुल गया है और सामान्य यातायात बहाल हो गया है। धरने के कारण राहगीरों और आम जनता को हुई दो दिनों की असुविधा के लिए इंटर्न डॉक्टरों ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है। 50 फीसदी स्टाइपेंड वृद्धि की घोषणा के बाद सभी इंटर्न डॉक्टरों के चेहरे पर खुशी दिखाई दी और उन्होंने चिकित्सा सेवाओं को पुनः सुचारू रूप से शुरू कर दिया है।



















