कर्नाटक के ऐतिहासिक मैसूर दशहरे की प्रसिद्ध जंबू सवारी शोभायात्रा में एक युग का अंत होने जा रहा है। पिछले छह वर्षों से लगातार 750 किलो का वजनदार गोल्डन हौदा अपने विशाल कंधों पर उठाने वाले दिग्गज हाथी अभिमन्यु को 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर सरकारी नियमों के तहत दशहरा जिम्मेदारियों से सेवानिवृत्त कर दिया गया है। वर्ष 2020 से 2025 तक मैसूर दशहरे के सबसे प्रमुख आकर्षण रहे अभिमन्यु की जगह अब इस वर्ष नए हाथी को हौदा उठाने का सौभाग्य मिलेगा। हालांकि मैसूर के भव्य आयोजन के इतिहास में अभिमन्यु का योगदान हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज रहेगा।
गोल्डन हौदा के लिए 4 दावेदार शॉर्टलिस्ट, 26 अगस्त से शुरू होगा गजपायन
दशहरा उत्सव की तैयारियों को लेकर राज्य के वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भव्य जंबू सवारी के लिए कुल 12 हाथियों के दल को अंतिम रूप दिया गया। इस बार 750 किलो का पारंपरिक गोल्डन हौदा उठाने के लिए चार प्रमुख हाथियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनमें धनंजय, प्रशांत, सुग्रीव और महेंद्र शामिल हैं। इनमें से किसी एक बलशाली हाथी को इस वर्ष हौदा ले जाने का मुख्य दायित्व सौंपा जाएगा।
मैसूर की ओर हाथियों की पारंपरिक यात्रा, जिसे स्थानीय भाषा में गजपायन कहा जाता है, उसकी शुरुआत 26 अगस्त को होगी। यह यात्रा नागरहोल टाइगर रिजर्व के वीरनहोसाहल्ली गेट के पास से प्रारंभ होगी। पहले चरण में विभिन्न वन्यजीव शिविरों से हाथियों को मैसूर लाया जाएगा
- दुबारे कैंप: यहां से धनंजय, गोपी, श्रीराम, सुग्रीव और कावेरी मैसूर के लिए रवाना होंगे।
- बल्ले कैंप: इस शिविर से महेंद्र और लक्ष्मी को दल में शामिल किया गया है।
- माथिगोडु कैंप: यहां से एकलव्य को मैसूर लाया जाएगा।
जंगलों के असली हीरो: 300 से अधिक हाथियों और 80 बाघों का सफल रेस्क्यू
अभिमन्यु केवल मैसूर दशहरे की शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण ही नहीं था, बल्कि उसने देश के जंगलों में भी अद्वितीय पराक्रम दिखाया है। माथिगोडु कैंप के लीड कुमकी हाथी के रूप में कार्य करते हुए अभिमन्यु ने मानव-वन्यजीव संघर्षों को नियंत्रित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। कुमकी हाथी उन विशेष प्रशिक्षित हाथियों को कहा जाता है, जिनका उपयोग हिंसक या अनियंत्रित जंगली हाथियों को पकड़ने और शांत करने के अभियानों में किया जाता है।
अभिमन्यु के नाम पूरे भारत में 300 से भी अधिक भटके हुए या आक्रामक हाथियों को पकड़ने का रिकॉर्ड दर्ज है। इसके अतिरिक्त, उसने विभिन्न कठिन अभियानों के दौरान 80 से अधिक बाघों को ट्रैनकुलाइज करने और सुरक्षित रूप से पकड़ने के ऑपरेशनों में वन विभाग की टीम का नेतृत्व किया है। संकट की स्थितियों में उसकी समझ और साहस के कारण ही उसे जंगलों का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता रहा है।
26 वर्षीय हाथी भिमा क्यों हुआ इस बार की सवारी से बाहर?
इस वर्ष जंबू सवारी में एक और अनुभवी हाथी भिमा भी हिस्सा नहीं ले पाएगा। 26 वर्ष का भिमा वर्तमान में मस्त (Musth) अवस्था से गुजर रहा है। हाथियों में मस्त अवस्था एक ऐसी प्राकृतिक जैविक स्थिति होती है, जब उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। इस दौरान हाथियों के व्यवहार में अचानक आक्रामकता या अनिश्चित बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
सार्वजनिक सुरक्षा और उत्सव के शांतिपूर्ण आयोजन को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने भिमा को मुख्य सवारी में शामिल न करने का निर्णय लिया है। हालांकि, उसे आपातकालीन बैकअप के तौर पर रिजर्व दल में रखा गया है। अभिमन्यु के रिटायरमेंट और भिमा के अनुपस्थित रहने से इस बार मैसूर दशहरे की जंबू सवारी एक नए स्वरूप और नए नेतृत्व के साथ सड़कों पर उतरेगी।




















