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आईएएस दिव्या मित्तल के इस्तीफे से चर्चा में आए नियम, जानिए क्या होती है आईएएस अफसर के त्यागपत्र की प्रक्रियाउत्तर प्रदेश
4 सित॰ 2026, 1:58 pm (55 दिन पहले)· 3

आईएएस दिव्या मित्तल के इस्तीफे से चर्चा में आए नियम, जानिए क्या होती है आईएएस अफसर के त्यागपत्र की प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के अचानक इस्तीफे के बाद ऑल इंडिया सर्विसेज रूल्स के तहत त्यागपत्र की जटिल और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया चर्चा का विषय बन गई है।

उत्तर प्रदेश कैडर की जानी-मानी आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के अचानक पद छोड़ने के फैसले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बैंगलोर से अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद लंदन की आकर्षक नौकरी छोड़कर देश सेवा के लिए लौटीं दिव्या मित्तल ने अपने 13 साल लंबे प्रशासनिक सफर के बाद इस्तीफा दे दिया है। उनके इस अप्रत्याशित कदम से हर कोई हैरान है और आम लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि देश की सबसे प्रतिष्ठित और ताकतवर सिविल सेवा से अलग होने की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया आखिरकार क्या होती है।

प्राइवेट नौकरियों जैसी नहीं होती आईएएस की विदाई

आमतौर पर लोगों के मन में यह धारणा होती है कि जिस तरह कॉर्पोरेट या प्राइवेट कंपनियों में एक ईमेल या तय नोटिस पीरियड देकर अगले दिन से ऑफिस जाना बंद किया जा सकता है, वैसा ही प्रशासनिक पदों पर भी होता है। लेकिन वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग और काफी जटिल है। ऑल इंडिया सर्विसेज रूल्स 1958 के प्रावधानों के तहत किसी भी आईएएस अधिकारी का इस्तीफा देना एक बेहद सख्त, लंबी और कई स्तरों से गुजरने वाली विधायी प्रक्रिया का हिस्सा होता है। इस पूरी प्रक्रिया में नो-ड्यूज सर्टिफिकेट और विजिलेंस क्लीयरेंस से लेकर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग यानी डीओपीटी और प्रधानमंत्री कार्यालय की अंतिम स्वीकृति तक का लंबा सफर तय करना पड़ता है।

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सबसे पहले मुख्य सचिव को सौंपी जाती है अर्जी

जब भी कोई आईएएस अधिकारी अपने पद से त्यागपत्र देने का फैसला करता है, तो उसे सबसे पहले अपने कैडर राज्य के मुख्य सचिव को लिखित रूप में बिना किसी शर्त के अपना इस्तीफा सौंपना होता है। यदि संबंधित अधिकारी उस समय केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर तैनात है, तो वह संबंधित मंत्रालय के सचिव के माध्यम से अपना त्यागपत्र गृह मंत्रालय या संबंधित राज्य सरकार को प्रेषित करता है। जैसे ही यह पत्र राज्य सरकार को प्राप्त होता है, प्रशासन उस अधिकारी से जुड़ी सभी फाइलों और रिकॉर्ड की गहन जांच-पड़ताल शुरू कर देता है।

नो ड्यूज और एनओसी हासिल करने की अनिवार्य प्रक्रिया

एक आईएएस अधिकारी को भी किसी आम कर्मचारी की तरह विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी और नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है। इस चरण के दौरान कई तरह की महत्वपूर्ण बातों की जांच की जाती है, जिसमें मुख्य रूप से सरकारी आवास और वाहन शामिल होते हैं। इसमें यह देखा जाता है कि क्या अफसर ने अपने आधिकारिक बंगले, गाड़ी और अन्य सरकारी उपकरणों का पूरा बकाया चुकता कर दिया है या नहीं। इसके अलावा हाउसिंग लोन, वाहन एडवांस और यात्रा भत्ते जैसे किसी भी प्रकार के सरकारी बकाए की भी पूरी जांच की जाती है।

विजिलेंस क्लीयरेंस और सर्विस बॉन्ड की जांच

नो ड्यूज के साथ-साथ इस प्रक्रिया में विजिलेंस क्लीयरेंस की भूमिका सबसे अहम होती है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि अधिकारी के खिलाफ किसी भी प्रकार की विभागीय जांच, भ्रष्टाचार का कोई मामला या कोई अन्य आपराधिक प्रकरण लंबित तो नहीं है। इसके साथ ही यह भी देखा जाता है कि यदि सरकार ने हाल ही में उस अधिकारी को किसी महंगी विदेशी स्टडी लीव या विशेष प्रशिक्षण पर भेजा था, तो उससे जुड़े सर्विस बॉन्ड की सभी शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं।

राज्य की सिफारिश और प्रधानमंत्री कार्यालय का अंतिम फैसला

जब नो ड्यूज और विजिलेंस की सभी रिपोर्ट पूरी तरह से साफ हो जाती हैं, तब राज्य सरकार इस्तीफे को स्वीकार करने की अपनी औपचारिक सिफारिश के साथ इसे केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के पास भेजती है। चूंकि आईएएस अधिकारियों की कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी केंद्र सरकार है, इसलिए इसके त्यागपत्र की अंतिम मंजूरी डीओपीटी के मंत्री यानी देश के प्रधानमंत्री के स्तर से मिलती है। केंद्र सरकार की तरफ से जब तक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया जाता, तब तक वह इस्तीफा कानूनन प्रभावी नहीं माना जाता है।

इत्यादि मंजूर होने के बाद क्या गंवाता है अफसर?

किसी भी आईएएस अधिकारी का इस्तीफा स्वीकार होते ही उसका ऑल इंडिया सर्विस का आधिकारिक दर्जा हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। नियमों के अनुसार, यदि कोई अधिकारी स्वैच्छिक रूप से अपने पद से इस्तीफा देता है, तो उसे किसी भी प्रकार के पेंशन संबंधी लाभ या सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले सरकारी फायदे नहीं मिलते हैं। दिव्या मित्तल के मामले में भी राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव केंद्र को भेजे जाने के बाद वहां से औपचारिक अधिसूचना जारी होने तक की कागजी कार्रवाई पूरी की जाएगी।

सवाल-जवाब

आईएएस दिव्या मित्तल ने कितने साल की सेवा के बाद इस्तीफा दिया है?
दिव्या मित्तल ने 13 साल के प्रशासनिक करियर के बाद अपना इस्तीफा दिया है।
आईएएस अधिकारियों के इस्तीफे के लिए कौन से नियम लागू होते हैं?
आईएएस अधिकारियों के इस्तीफे की प्रक्रिया ऑल इंडिया सर्विसेज रूल्स 1958 के तहत संचालित होती है।
इस्तीफा देने के लिए सबसे पहले किसे आवेदन देना होता है?
अधिकारी को सबसे पहले अपने कैडर राज्य के मुख्य सचिव को लिखित और बिना शर्त इस्तीफा सौंपना होता है।
इस्तीफे के दौरान कौन-कौन सी मुख्य जांच की जाती हैं?
इस प्रक्रिया में नो-ड्यूज सर्टिफिकेट, एनओसी, विजिलेंस क्लीयरेंस और ट्रेनिंग बॉन्ड की शर्तों की जांच की जाती है।
आईएएस अधिकारी के इस्तीफे को अंतिम मंजूरी कौन देता है?
आईएएस अधिकारियों के इस्तीफे पर अंतिम मंजूरी केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के मंत्री यानी देश के प्रधानमंत्री देते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·54 दिन पहले

दिव्या मित्तल का इस्तीफा प्रशासनिक विदाई की जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को उजागर करता है। ऑल इंडिया सर्विसेज रूल्स 1958 के तहत विजिलेंस क्लीयरेंस, नो-ड्यूज और डीओपीटी से लेकर पीएमओ तक की यह लंबी प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि कोई भी अधिकारी बिना किसी लंबित जांच या सरकारी बकाए के सेवा से मुक्त न हो। इस उच्च-स्तरीय छानबीन का प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

Rohan Verma@rohan-verma·54 दिन पहले

दिव्या मित्तल जैसे तेज-तर्रार और तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारियों का समय से पहले प्रशासनिक सेवाओं से मोहभंग होना और निजी क्षेत्र की ओर रुख करना शासन प्रणाली के लिए एक गंभीर आत्ममंथन का विषय है। ऑल इंडिया सर्विसेज रूल्स 1958 के तहत त्यागपत्र की यह लंबी प्रक्रिया सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह नौकरशाही से बाहर जाने वाले हर अधिकारी के पिछले फैसलों और संपत्तियों की वैधानिक जवाबदेही तय करती है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और चुनौतीपूर्ण कैडर में जमीनी स्तर पर नीतियों को लागू करने वाले नेतृत्व का इस तरह अचानक हटना शासन के निरंतरता चक्र को प्रभावित करता है और यह आने वाले समय में नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ा सबक साबित होगा।

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