पंजाब की राजनीति और प्रदेश कांग्रेस संगठन में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। पूर्व हॉकी कप्तान और ओलंपियन परगट सिंह को तत्काल प्रभाव से पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है। यह फैसला अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग द्वारा पद छोड़ने के तुरंत बाद सामने आया। पार्टी की ओर से जारी किए गए आधिकारिक बयान में परगट सिंह की तुरंत नियुक्ति की पुष्टि की गई, साथ ही निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग को उनके पिछले कार्यकाल और सेवाओं के लिए धन्यवाद भी दिया गया।
चरणजीत सिंह चन्नी की सिफारिश और आलाकमान का फैसला
परगट सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का बेहद करीबी माना जाता है। पिछले कुछ समय से वह चरणजीत सिंह चन्नी के साथ मिलकर निवर्तमान अध्यक्ष राजा वड़िंग की कार्यशैली के खिलाफ एक संगठनात्मक मुहिम चला रहे थे। इस सियासी घटनाक्रम के बाद राहुल गांधी ने चरणजीत सिंह चन्नी की सिफारिश पर मुहर लगाते हुए परगट सिंह को प्रदेश कांग्रेस की बागडोर सौंपने का निर्णय लिया।
राहुल गांधी से मुलाकात और राजा वड़िंग के गंभीर आरोप
इस्तीफा सौंपने से पहले अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की राहुल गांधी के साथ एक लंबी बैठक हुई थी। हालांकि, बैठक खत्म होने के बाद राजा वड़िंग के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस बदलाव से संगठन के भीतर चल रही खींचतान आसानी से खत्म होने वाली नहीं है। राजा वड़िंग ने पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट पर इशारों ही इशारों में तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि सचिन पायलट को पंजाब का प्रभार संभाले एक महीना बीत चुका है, लेकिन इस पूरे महीने में वे सिर्फ 2 घंटे के लिए ही पंजाब आए थे और उसी दौरान उनसे एक संक्षिप्त मुलाकात हुई थी।
राजा वड़िंग ने अपने इस्तीफे की सीधी जिम्मेदारी सचिन पायलट के रुख पर डालते हुए कहा, "शायद सचिन पायलट ने मुझे हटाने का मन बना लिया था।" उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रभारी की जिम्मेदारी संभालते ही यह तय कर लिया गया था कि प्रदेश नेतृत्व में बदलाव किया जाना है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले की रणनीति
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह फेरबदल बेहद संवेदनशील और अहम माना जा रहा है। राज्य में अगले साल चुनाव होने हैं और पार्टी की राज्य इकाई में लंबे समय से खींचतान और अंदरूनी गहमागहमी का दौर चल रहा था। चुनावी मैदान में उतरने से ठीक पहले शीर्ष स्तर पर हुआ यह नेतृत्व परिवर्तन कांग्रेस की चुनावी तैयारियों और एकजुटता के लिहाज से एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
विपक्षी दलों के तीखे हमले
कांग्रेस संगठन में मचे इस घमासान पर विपक्षी खेमों ने भी तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं। बीजेपी और आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से कांग्रेस नेताओं के बीच जारी आपसी तकरार सिर्फ एक ट्रेलर है और असली सियासी तस्वीर अभी बाकी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "राहुल गांधी किसी के सगे नहीं हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व इस्तेमाल करो और फेंको की नीति पर काम करता है, जिसका ताजा उदाहरण राजा वड़िंग बने हैं। वहीं, पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने दावा किया कि राजा वड़िंग का इस्तीफा सिर्फ एक शुरुआत है और आगामी चुनाव से पहले राज्य कांग्रेस में बड़ी भगदड़ देखने को मिलेगी।
























