अमेठी जिले में ग्राम पंचायतों के विकास के लिए स्वीकृत सरकारी बजट में भारी हेराफेरी का मामला सामने आया है। पंचायती राज विभाग की गहन जांच में जिले के 9 अलग-अलग विकास खंडों की 121 ग्राम पंचायतों में कुल 43 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई है। शासन की ओर से गांवों के बुनियादी विकास, सड़कों, नालियों और जन कल्याणकारी योजनाओं के संचालन के लिए भेजी गई धनराशि का दुरुपयोग कर उसे निजी खातों में स्थानांतरित किया गया था। इस मामले में विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषी ग्राम प्रधानों और संबंधित पंचायत सचिवों से गबन की गई राशि की शत-प्रतिशत रिकवरी के आदेश जारी कर दिए हैं। समय सीमा के भीतर रिकवरी राशि जमा न करने की स्थिति में संबंधित प्रधानों के आगामी चुनाव लड़ने पर रोक लगाने के साथ-साथ उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
9 ब्लॉकों में फैला वित्तीय हेराफेरी का जाल
जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच के आंकड़ों के अनुसार, अमेठी जिले की कुल 121 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर वित्तीय मनमानी की गई। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि तत्कालीन ग्राम प्रधानों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया। विभाग की ओर से जारी आंकड़ों में अमेठी ब्लॉक सबसे शीर्ष पर है, जहां 29 ग्राम पंचायतों में अकेले 12 लाख 94 हजार 524 रुपये का गबन पाया गया। इसके अलावा मुसाफिरखाना ब्लॉक की 17 ग्राम पंचायतों में 11 लाख 95 हजार 780 रुपये की वित्तीय गड़बड़ी उजागर हुई है।
जांच के दायरे में आए अन्य ब्लॉकों में जामो ब्लॉक की 34 ग्राम पंचायतों से 4 लाख 92 हजार 875 रुपये तथा भेटुआ ब्लॉक की 17 ग्राम पंचायतों से 3 लाख 35 हजार 812 रुपये की अवैध निकासी और हेराफेरी पाई गई है। वहीं तिलोई और भादर ब्लॉक में 7-7 ग्राम पंचायतें दोषी पाई गई हैं, जहां क्रमशः 4 लाख 28 हजार 41 रुपये और 2 लाख 16 हजार 245 रुपये की अनियमितता हुई है। संग्रामपुर ब्लॉक की 6 ग्राम पंचायतों से 2 लाख 30 हजार 158 रुपये, बाजार शुक्ल की 3 ग्राम पंचायतों से 99 हजार 695 रुपये और शाहगढ़ ब्लॉक की 1 ग्राम पंचायत से 19 हजार 490 रुपये के फंड के गलत इस्तेमाल का मामला प्रमाणित हुआ है।
50-50 फीसदी रिकवरी का नोटिस जारी
पंचायती राज विभाग की इस कार्रवाई के संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज त्यागी ने बताया कि संबंधित ग्राम पंचायतों के तत्कालीन प्रधानों और उनके साथ कार्यरत पंचायत सचिवों की जवाबदेही तय कर दी गई है। गबन की गई कुल धनराशि की भरपाई के लिए प्रधान और सचिव दोनों को 50-50 प्रतिशत राशि जमा करने का नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों जिम्मेदार पक्षों को निर्धारित समय के भीतर आधी-आधी राशि सरकारी खजाने में चालान के माध्यम से जमा करनी होगी, अन्यथा उनके विरुद्ध विधि सम्मत कठोर कानूनी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।
निजी खातों में ट्रांसफर की गई सरकारी रकम
विभागीय जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि ग्राम प्रधानों ने वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर पंचायती राज की गाइडलाइंस का उल्लंघन किया। ग्राम पंचायत के खातों में विकास कार्यों के लिए आने वाली रकम को सीधे अपने व्यक्तिगत बैंक खातों में या फिर अपने चहेतों व रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर लिया गया। इस तरीके से जनता के काम आने वाला पैसा निजी स्वार्थ में खर्च कर दिया गया। जांच अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वित्तीय अधिकारों का यह दुरुपयोग सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है, जिसकी विस्तृत जांच के बाद ही दोष सिद्ध किया गया है।
नो ड्यूज रोकने और एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी
गबन की रकम वापस न करने वाले दोषी जनप्रतिनिधियों पर कानूनी शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर ली गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि यदि नोटिस की अवधि समाप्त होने तक संबंधित ग्राम प्रधान पूरी रिकवरी राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें पंचायती राज विभाग की ओर से बेबाकी प्रमाण पत्र (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) जारी नहीं किया जाएगा। बेबाकी प्रमाण पत्र न मिलने के कारण वे आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव या अन्य कोई भी चुनाव लड़ने के योग्य नहीं रहेंगे। इसके साथ ही, सरकारी धन की चोरी और भ्रष्टाचार की गंभीर धाराओं के तहत संबंधित थानों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।




















