मेघालय विधानसभा के शरदकालीन सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने स्वतः संज्ञान लेते हुए बयान दिया कि सरकार 19 अगस्त को शिलांग में निकाली गई काली पट्टी वाली बाइक रैली के दौरान भड़की हिंसा के आरोपियों को बख्शेगी नहीं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उपद्रवियों को कानून के दायरे में लाने के लिए प्रशासन हरसंभव कदम उठाएगा और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।
रैली की अनुमति और अप्रत्याशित हिंसा
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि इस बाइक रैली का आयोजन खासी स्टूडेंट्स यूनियन द्वारा किया गया था। इस रैली के लिए पूर्वी खासी हिल्स के उपायुक्त की ओर से यह शर्त रखी गई थी कि पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होगा। हालांकि यह शांतिपूर्ण मार्च तब हिंसक झड़प में बदल गया जब कुछ अज्ञात उपद्रवियों ने राहगीरों को निशाना बनाया और वाहनों पर पथराव शुरू कर दिया।
नुकसान और घायलों की स्थिति
इस अप्रत्याशित हिंसा की चपेट में कुल 31 वाहन आए, जिनमें असम पंजीकरण संख्या वाले आठ वाहन भी शामिल थे। इसके अलावा इस झड़प में 18 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें तुरंत उपचार के लिए शिलांग सिविल अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस और कानूनी कार्रवाई
घटना के तुरंत बाद राज्य प्रशासन हरकत में आया और कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया। 19 अगस्त की रात को ही खासी स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा मेघालय रखरखाव सार्वजनिक आदेश अधिनियम भी लागू कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस सिलसिले में अब तक कुल 15 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। जांचकर्ताओं ने पांच ऐसे नकाबपोश व्यक्तियों की पहचान की है जो विशेष रूप से असम के नंबर वाले वाहनों पर हमले में शामिल थे, और उनमें से एक संदिग्ध को पुलिस दबोच चुकी है।
विशेष जांच दल का गठन
इस पूरे मामले की जड़ तक पहुंचने और दायरा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल का गठन किया है जो सभी दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ अभियोजन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। इस उच्चस्तरीय जांच दल की कमान कानून और व्यवस्था के पुलिस महानिरीक्षक संभालेंगे।
असम के साथ अंतरराज्यीय तनाव को कम करने के प्रयास
सीमावर्ती इलाकों में हुई प्रतिक्रियात्मक घटनाओं के बाद दोनों राज्यों के बीच उपजे तनाव को पाटने के लिए मुख्यमंत्री ने उठाए गए कदमों का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच 22 अगस्त को एक अहम बैठक हुई। इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में मेघालय की ओर से उपमुख्यमंत्री स्नियावभलांग धर ने अगुवाई की जबकि असम की तरफ से कैबिनेट मंत्री अतुल बोरा शामिल हुए। इस दौरान दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और अन्य प्रमुख अधिकारी भी मौजूद रहे।
रैपिड नाकेबंदी हटी और समन्वय समिति का गठन
इस द्विपक्षीय बैठक के सकारात्मक परिणाम सामने आए और जोरबत में असम के संगठनों द्वारा लगाई गई नाकेबंदी को हटा लिया गया, जिससे दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच आवश्यक वस्तुओं और वाहनों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई। इसके अलावा परिवहन अधिकारियों और टूरिस्ट टैक्सी संघों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक संयुक्त समिति बनाने की योजना पर काम चल रहा है, जो असम और मेघालय के साझा पर्यटन हितों की रक्षा करने के साथ-साथ पर्यटक परिवहन को विनियमित करेगी।
परिवहन संघों के साथ वार्ता और आगे की रूपरेखा
मुख्यमंत्री ने यह भी साझा किया कि उपमुख्यमंत्री स्नियावभलांग धर की अध्यक्षता में मेघालय के परिवहन संघों के साथ हुई अलग बैठक के बाद उनका आंदोलन समाप्त हो गया और यातायात व्यवस्था सामान्य हो गई है। लंबित मुद्दों पर चर्चा के लिए सितंबर के दूसरे हफ्ते में इन संघों के साथ एक और दौर की बैठक होना प्रस्तावित है। अपने संबोधन के अंत में कॉनराड संगमा ने दोहराया कि सरकार ने इस हिंसा को बेहद गंभीरता से लिया है और घटना के तुरंत बाद तेजी से कदम उठाए हैं। उन्होंने सदन और राज्य की जनता को आश्वस्त किया कि पुलिस अपनी जांच को पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ाएगी ताकि कानून के मुताबिक हर जिम्मेदार व्यक्ति को सजा मिल सके।



















