17 अगस्त राशिफल: नाग पंचमी पर 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें सभी 12 राशियों का आज का भविष्यफलसुस्त अमेरिकी खुदरा बिक्री आंकड़ों से डॉलर पर दबाव, 0.7100 के स्तर के पास पहुंचा ऑस्ट्रेलियाई डॉलरझारखंड में JPSC और JSSC परीक्षा विवाद के बीच अभ्यर्थियों से मिलीं कुनिका सदानंदउत्तर प्रदेश में युवाओं को गो सेवा अभियान से जोड़ेगी सरकार, 10 हजार गो मित्र संभालेंगे जिम्मेदारीफिल्म 'घोस्ट' फेम अनन्या राज का निधन, 27 साल की उम्र में सोते समय थमीं सांसेंश्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में 167 रनों की धमाकेदार पारी खेलने के बाद देवदत्त पडिक्कल ने खोले अपनी शानदार बल्लेबाजी के राजसाधारण तोरई को बनाएं खास, इस मसालेदार ग्रेवी रेसिपी के साथ हर कोई चाव से खाएगालॉर्ड्स के मैदान पर एश्ले गार्डनर की ट्रент रॉकेट्स ने रचा इतिहास, सनराइजर्स लीड्स को 8 विकेट से हराकर महिला हंड्रेड ट्रॉफी पर किया कब्जाप्यू रिसर्च सर्वे में अमेरिका में भारत पर बंटा जनमत, ब्रिटेन और जर्मनी में सुधरी साखफिल्म रोजा का गाना 'ये हसीन वादियां' कैसे बना ऑल टाइम क्लासिक, जानिए एआर रहमान के डेब्यू प्रोजेक्ट से जुड़े खास किस्से
असम में तबाही के बीच राज्यपाल से मिला कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल, बाढ़ संकट को राष्ट्रीय समस्या घोषित करने की मांगअसम
13 अग॰ 2026, 9:07 am (4 दिन पहले)· 0

असम में तबाही के बीच राज्यपाल से मिला कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल, बाढ़ संकट को राष्ट्रीय समस्या घोषित करने की मांग

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को ज्ञापन सौंपकर प्रधानमंत्री से बाढ़ और नदी कटाव के संकट को राष्ट्रीय समस्या घोषित करने और एक उच्चस्तरीय कार्यबल बनाने का आग्रह किया है।

असम में बाढ़ और नदी के कटाव से बिगड़े हालातों के बीच असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से मुलाकात की। राहत एवं पुनर्वास विभाग के अध्यक्ष प्रांजीत दास के नेतृत्व में पहुंचे इस शिष्टमंडल ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मांग की गई कि राज्य की इस गंभीर प्राकृतिक आपदा को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय समस्या घोषित किया जाए।

मौत का आंकड़ा बढ़कर 103 हुआ

राज्य में बुधवार को जलभराव की स्थिति में कुछ सुधार जरूर दर्ज किया गया और चार जिलों में प्रभावित लोगों की संख्या घटकर 87,000 रह गई। हालांकि, इस दौरान दो और लोगों की जान जाने से बाढ़ के कारण जान गंवाने वालों की कुल संख्या 103 तक पहुंच गई है। पानी उतरने के बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में आम जनजीवन और प्रशासनिक व्यवस्था के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं।

ये भी पढ़ें

राष्ट्रीय औसत से चार गुना अधिक प्रभावित क्षेत्र

कांग्रेस द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में राज्य के भौगोलिक आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि असम का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा, यानी तकरीबन 31.05 लाख हेक्टेयर जमीन, बाढ़ के खतरे के दायरे में आती है। यह आंकड़ा 10.2 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है। लगातार आने वाली बाढ़ के कारण चाय बागान श्रमिकों, किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी पूरी तरह ठप हो गई है और अनगिनत परिवार बेघर होकर विस्थापन झेल रहे हैं।

उच्चस्तरीय कार्यबल के गठन की सिफारिश

इस स्थायी संकट का ठोस समाधान निकालने के लिए पार्टी ने केंद्र सरकार से एक उच्चस्तरीय कार्यबल गठित करने का आग्रह किया है। इस प्रस्तावित समिति में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है ताकि जल प्रबंधन और कटाव रोकने के लिए दीर्घकालिक नीति बनाई जा सके।

सवाल-जवाब

एपीसीसी प्रतिनिधिमंडल ने असम के राज्यपाल से क्या मांग की?
प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मांग की कि असम में बार-बार आने वाली बाढ़ और नदी कटाव के संकट को राष्ट्रीय समस्या घोषित किया जाए।
राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से मिलने वाले कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया?
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एपीसीसी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अध्यक्ष प्रांजीत दास ने किया।
असम बाढ़ में मृतकों की संख्या और प्रभावित लोगों का वर्तमान आंकड़ा क्या है?
दो और मौतों के बाद कुल मृतकों की संख्या 103 हो गई है, जबकि चार जिलों में प्रभावित लोगों की संख्या घटकर 87,000 रह गई है।
ज्ञापन के अनुसार असम की कितनी जमीन बाढ़ के खतरे में है?
असम का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा (31.05 लाख हेक्टेयर) बाढ़-संभावित क्षेत्र है, जो 10.2 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से बहुत अधिक है।
बाढ़ संकट से निपटने के लिए कांग्रेस पार्टी ने क्या उपाय सुझाया है?
पार्टी ने केंद्र और राज्य के अधिकारियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और प्रभावित लोगों के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक उच्चस्तरीय कार्यबल गठित करने का सुझाव दिया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR