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बलिया की रागिनी के इलाज की जगी उम्मीद, डॉक्टरों की टीम ने घर पहुंचकर की जांचउत्तर प्रदेश
4 सित॰ 2026, 10:15 am (8 दिन पहले)· 2

बलिया की रागिनी के इलाज की जगी उम्मीद, डॉक्टरों की टीम ने घर पहुंचकर की जांच

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की वायरल बच्ची रागिनी के स्वास्थ्य को लेकर अब डॉक्टरों की टीम ने उसके घर जाकर जांच की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान लेने के बाद जिला प्रशासन और चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा उसे लगातार सहायता और बेहतर इलाज की उम्मीद मिल रही है।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के मनियर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले रानीपुर गांव की रहने वाली साढ़े छह साल की रागिनी इन दिनों खासी चर्चा में है। कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर उसके पैरों की समस्या से जुड़ा एक भावुक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद से उसे हर तरफ से मदद मिलनी शुरू हो गई है। इस गंभीर मामले को राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद संज्ञान में लिया था। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए बच्ची को पहले ही ट्राइसाइकिल और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध करा दी थी, और अब उसके स्वास्थ्य में सुधार के लिए चिकित्सा स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

इसी कड़ी में जिला अस्पताल बलिया के जाने-माने और अनुभवी हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग सिंह की अगुवाई में चिकित्सकों का एक विशेष दल सीधे रागिनी के घर जा पहुंचा। डॉक्टरों ने वहां पहुंचकर बच्ची का गहन शारीरिक मुआयना किया और उसकी स्वास्थ्य स्थिति का जायजा लिया। डॉ. सिंह ने बातचीत के दौरान बताया कि रागिनी बेहद होनहार और संघर्ष का सामना करने वाली बच्ची है। बच्ची की मां से मिली जानकारी के मुताबिक, उसके जन्म के कुछ महीनों बाद एक दुर्घटना हो गई थी, जिसकी वजह से उसके पैर खराब हो गए थे। परिवार वालों ने बेहतर इलाज के लिए उसे बनारस भी दिखाया था, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसके घुटनों से नीचे के हिस्से में चलने की ताकत वापस नहीं आ पाई थी। हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद अब उसकी मुश्किलें धीरे-धीरे कम हो रही हैं और उसके सपनों को एक नई उड़ान मिलने लगी है, क्योंकि देश के विभिन्न कोनों से लोग उसकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं।

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चिकित्सकों की राय और बेहतर इलाज की मजबूत संभावना

डॉ. अनुराग सिंह ने परीक्षण के बाद बताया कि रागिनी की कम उम्र होने की वजह से उसके पूरी तरह ठीक हो जाने की संभावना काफी अधिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि हड्डी रोग विशेषज्ञ यानी आर्थो सर्जन, तंत्रिका तंत्र विशेषज्ञ यानी न्यूरो सर्जन और प्लास्टिक सर्जन सभी मिलकर सामूहिक प्रयास करें, और बच्ची को उचित देखभाल के साथ सही चिकित्सा मिले, तो वह भविष्य में अपने पैरों पर सहारा लेकर आसानी से चल पाएगी। छोटे बच्चों के शरीर में विकास यानी ग्रोथ और घावों को भरने की क्षमता यानी हीलिंग पावर वयस्कों की तुलना में बहुत अधिक होती है। यही वजह है कि डॉक्टरों में इस बात की उम्मीद काफी बढ़ गई है कि सही समय पर सर्जरी, सही पोस्चर और नियमित देखभाल से उसकी यह समस्या दूर हो सकती है।

डॉक्टर बनने का सपना और सरकारी सहायता का संकल्प

डॉ. सिंह ने इस दौरान मीडियाकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने एक दूर-दराज के ग्रामीण इलाके की इस जरूरतमंद बच्ची की आवाज को पूरी दुनिया के सामने लाने में एक बेहद अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने बलिया के पत्रकारों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि बच्ची के सपनों को परवान चढ़ाने के लिए हर तरफ से मदद के हाथ बढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि रागिनी बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती है ताकि वह गरीब और लाचार लोगों की मुफ्त में सेवा कर सके, जिससे किसी अन्य को उसकी तरह दर्द न झेलना पड़े। बातचीत के दौरान बच्ची हर सवाल का बड़ी बेबाकी से और बिना किसी झिझक के तुरंत जवाब देती है। डॉ. सिंह ने अंत में कहा कि सरकार इस मामले पर बहुत बारीकी से ध्यान दे रही है और यदि कोई समस्या शासन के संज्ञान में आ जाए, तो सरकार जरूरतमंदों की मदद के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध रहती है।

सवाल-जवाब

रागिनी कौन है और वह कहां की रहने वाली है?
रागिनी साढ़े छह साल की बच्ची है जो उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के मनियर ब्लॉक के रानीपुर गांव की रहने वाली है।
रागिनी के पैरों में समस्या कैसे हुई थी?
बच्ची की मां के अनुसार, जन्म के कुछ महीने बाद एक दुर्घटना में उसके पैर खराब हो गए थे।
इस मामले पर सबसे पहले किसने संज्ञान लिया?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले का संज्ञान लिया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने मदद पहुंचाई।
डॉक्टरों की टीम ने उसकी जांच कहां की?
जिला अस्पताल बलिया के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग सिंह के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने रागिनी के घर जाकर उसकी जांच की।
डॉक्टरों के अनुसार बच्ची के ठीक होने की संभावना क्यों है?
डॉक्टरों का कहना है कि कम उम्र होने के कारण बच्चों में ग्रोथ और हीलिंग पावर अधिक होती है, जिससे सही इलाज और सर्जरी से वह चल सकती है।
बड़ी होकर रागिनी क्या बनना चाहती है?
रागिनी बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती है ताकि वह गरीबों की मुफ्त सेवा कर सके।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

यह प्रकरण डिजिटल माध्यमों की ताकत और प्रशासनिक संवेदनशीलता के बीच मजबूत तालमेल का बेहतरीन उदाहरण है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के स्वतः संज्ञान से लेकर विशेषज्ञ चिकित्सकों के दल का सीधे ग्रामीण आवास तक पहुँचना यह दर्शाता है कि कैसे जमीनी रिपोर्टिंग और सरकारी तंत्र मिलकर सुदूर इलाकों के जरूरतमंदों तक सीधा लाभ पहुँचा सकते हैं। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि बहु-विषयक चिकित्सा दृष्टिकोण से इस बच्ची को उसका स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता कितनी जल्दी वापस मिलती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि कैसे सोशल मीडिया की पहुंच और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई मिलकर किसी जरूरतमंद के जीवन में निर्णायक बदलाव ला सकती है। जब मुख्यिमंत्री स्तर से सीधा संज्ञान लिया जाता है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम खुद घर पहुँचती है, तो यह सुदूर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और न्यायसंगत मदद की उम्मीद जगाता है। अब असली चुनौती इस बहु-विषयक चिकित्सा योजना को जमीन पर उतारने और रागिनी के पुनर्वास की प्रक्रिया को बिना किसी प्रशासनिक या चिकित्सीय विलंब के पूरा करने की होगी, जिससे उसे आत्मनिर्भरता मिल सके।

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