गुवाहाटी: डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहा है। ऊपरी असम के इस प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र पर डॉक्टरों, नर्सों और सहायक कर्मचारियों की भारी कमी के कारण मौजूदा कर्मियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
डॉक्टरों और कर्मचारियों के खाली पद
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अस्पताल में डॉक्टरों के कुल 434 स्वीकृत पद हैं जिनमें से 121 पद फिलहाल खाली चल रहे हैं और अभी केवल 313 डॉक्टर ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह रिक्तियां कुल 23 विभागों को प्रभावित कर रही हैं, जबकि जूनियर डॉक्टरों की कमी के कारण ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सा स्टाफ की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं।
स्थानांतरण और नई नियुक्तियों की स्थिति
तिनसुकिया और लखीमपुर में नए खुले मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के तबादले के बाद यहां की स्थिति और भी ज्यादा गंभीर हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन तबादलों की वजह से जो पद खाली हुए थे, उन पर अभी तक नई नियुक्तियां नहीं की जा सकेंगी क्योंकि उन पदों को भरा नहीं गया है।
नर्सिंग स्टाफ और बिस्तरों का असंतुलन
अस्पताल में केवल डॉक्टरों ही नहीं बल्कि नर्सिंग स्टाफ की भी भारी किल्लत बनी हुई है। लगभग 2,000 बिस्तरों वाले असम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में इस समय सिर्फ 449 नर्सें ही तैनात हैं। दशकों के दौरान यह अंतर काफी ज्यादा गहरा गया है। जब साल 1947 में इस संस्थान को मेडिकल स्कूल से अपग्रेड करके मेडिकल कॉलेज बनाया गया था, तब यहां करीब 900 बिस्तर थे और लगभग इतने ही नर्सिंग स्टाफ भी मौजूद थे।
हॉस्पिटल की बिस्तर क्षमता तो दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ चुकी है, लेकिन इसके मुकाबले नर्सों की कुल संख्या में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। इस भारी असंतुलन की वजह से नर्सों को अत्यधिक संख्या में मरीजों की देखभाल करनी पड़ रही है। रात की कुछ शिफ्टों के दौरान स्थिति यह हो जाती है कि एक अकेली नर्स को 150 से 200 तक मरीजों की देखभाल और निगरानी संभालनी पड़ सकती है, जिससे मरीजों की सही तरीके से मॉनिटरिंग और व्यक्तिगत देखभाल पर मिलने वाले समय को लेकर गहरी चिंताएं पैदा हो रही हैं।
अन्य कर्मचारियों और बुनियादी ढांचे पर असर
डॉक्टरों और नर्सों के अलावा ग्रेड IV कर्मचारियों समेत अन्य श्रेणी के स्टाफ के पद भी खाली पड़े हैं। मैनपावर की इस संयुक्त कमी ने मौजूदा कर्मचारियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं क्योंकि अस्पताल में प्रतिदिन आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बहुत ज्यादा बनी हुई है। असम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ऊपरी असम के लिए एक प्रमुख रेफरल सेंटर है और यहां कई जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे कि अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
डायग्नोस्टिक सेवाओं में तकनीकी बाधाएं
कर्मचारियों की कमी के अलावा अस्पताल की डायग्नोस्टिक सेवाओं को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संस्थान की एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें अक्सर खराब होती रहती हैं। जब ये जरूरी जांच उपकरण काम नहीं करते हैं, तो विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से ताल्लुक रखने वाले मरीजों को मजबूरी में बाहर प्राइवेट सेंटरों का रुख करना पड़ता है, जहां इन स्कैन के लिए उन्हें हजारों रुपये चुकाने पड़ते हैं।
स्वास्थ्य नेटवर्क का विस्तार और चुनौतियां
असम मेडिकल कॉलेज में ये कमियां ऐसे समय में सामने आई हैं जब राज्य सरकार अपने मेडिकल कॉलेजों और हेल्थकेयर सुविधाओं के नेटवर्क का लगातार विस्तार कर रही है। हालांकि, डिब्रूगढ़ के इस संस्थान पर किफायती और स्पेशलाइज्ड इलाज के लिए निर्भर रहने वाले आम मरीजों के लिए स्टाफ और डायग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर के ये गैप अब भी बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं।



















