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भोपाल मेट्रो के भूमिगत ट्रैक पर बवाल, शाही कब्रिस्तान में काम रुकवाने पहुंचे कांग्रेस विधायकमध्य प्रदेश
6 अक्तू॰ 2026, 2:03 pm (23 दिन पहले)· 1

भोपाल मेट्रो के भूमिगत ट्रैक पर बवाल, शाही कब्रिस्तान में काम रुकवाने पहुंचे कांग्रेस विधायक

भोपाल में मेट्रो ऑरेंज लाइन फेज-2 के निर्माण कार्य को लेकर देर रात तनाव फैल गया। विधायक आतिफ अकील ने शाही औकाफ की अनुमति के बिना कब्रिस्तान की जमीन पर मशीनरी उतारने का कड़ा विरोध किया।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण के निर्माण को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार की देर रात भोपाल टॉकीज के पास स्थित ऐतिहासिक शाही कब्रिस्तान परिसर में उस समय अचानक अफरा-तफरी मच गई, जब मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की तकनीकी टीम भारी निर्माण मशीनरी और सुरक्षा बैरिकेड्स लेकर काम शुरू करने पहुंच गई। जैसे ही इस गतिविधि की सूचना स्थानीय स्तर पर फैली, भोपाल उत्तर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील तुरंत मौके पर पहुंच गए और निर्माण कार्य पर सख्त एतराज जताते हुए उसे रुकवा दिया। इस दौरान विधायक और वहां तैनात प्रशासनिक व पुलिस अमले के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

शाही औकाफ की अनुमति पर उठे गंभीर सवाल

घटनास्थल पर पहुंचे विधायक आतिफ अकील ने सीधे तौर पर मेट्रो कॉरपोरेशन और सुरक्षा में तैनात पुलिस बल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उनका स्पष्ट कहना था कि जिस स्थान पर मशीनें लगाई जा रही हैं, वह जमीन शाही कब्रिस्तान की मिल्कियत है। उन्होंने अधिकारियों से दो-टूक पूछा कि इस संवेदनशील परिसर में किसी भी प्रकार का निर्माण या खुदाई का काम शुरू करने से पहले क्या शाही औकाफ से बाकायदा लिखित मंजूरी हासिल की गई थी। बिना किसी पूर्व सूचना या प्रशासनिक आदेश दिखाए देर रात अचानक काम शुरू करने को लेकर उन्होंने भारी रोष जताया और इसे मनमानी कार्रवाई करार दिया।

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अधिकारियों से तीखी बहस और चेतावनी

घटनास्थल पर माहौल उस वक्त और तनावपूर्ण हो गया जब आतिफ अकील ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए काम फौरन बंद करने को कहा। उन्होंने पुलिस बल की मौजूदगी में रात के अंधेरे में किए जा रहे इस प्रयास को जमीन पर अनधिकृत कब्जे जैसा कदम बताया। विवाद के दौरान विधायक ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से कहा कि वे तुरंत मशीनरी समेटकर बाहर निकलें। मौके पर मौजूद टीम को उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि जल्दी से मशीनें हटा ली जाएं। हालांकि उस समय मौजूद तकनीकी व प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से स्थिति पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान दर्ज नहीं कराया गया।

ऑरेंज लाइन फेज-2 का रूट और तकनीकी ढांचा

राजधानी भोपाल में तैयार हो रही मेट्रो परियोजना की ऑरेंज लाइन का संपूर्ण कॉरिडोर 16.74 किलोमीटर लंबा है। इस परियोजना के पहले हिस्से के तहत सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर का निर्माण कार्य पहले ही संपन्न हो चुका है। वर्तमान में सुभाष नगर से करोंद तक 8.77 किलोमीटर लंबे फेज-2 हिस्से पर निर्माण गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस 8.77 किलोमीटर लंबे ट्रैक में से 5.38 किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड यानी जमीन के ऊपर खंभों पर तैयार किया जाना है, जिस पर पुल बोगदा, ऐशबाग, सिंधी कॉलोनी, डीआईजी बंगला, कृषि उपज मंडी और करोंद चौराहा नाम से छह मेट्रो स्टेशन बनाए जाने प्रस्तावित हैं।

3.39 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड ट्रैक बना विवाद की जड़

इस पूरे चरण का सबसे संवेदनशील हिस्सा 3.39 किलोमीटर लंबा भूमिगत मार्ग है, जिसमें भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड पर दो अंडरग्राउंड स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं। परियोजना के नक्शे के अनुसार, इसी अंडरग्राउंड हिस्से की सुरंग शाही कब्रिस्तान के नीचे से होकर गुजरनी है, जिस पर स्थानीय स्तर पर और समाज के प्रतिनिधियों द्वारा कड़ा विरोध दर्ज कराया जा रहा है। लोगों का कहना है कि कब्रिस्तान के नीचे भारी सुरंग निर्माण से धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर की मर्यादा प्रभावित होगी। वर्तमान में इस भूमिगत रूट से जुड़ा कानूनी विवाद मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण के समक्ष भी विचाराधीन है, जहां दोनों पक्षों के तर्कों पर न्यायिक सुनवाई की प्रक्रिया जारी है।

सवाल-जवाब

भोपाल में शाही कब्रिस्तान पर विवाद क्यों शुरू हुआ?
मेट्रो कॉरपोरेशन की टीम सोमवार देर रात शाही कब्रिस्तान में बिना शाही औकाफ की पूर्व अनुमति के बैरिकेड्स और मशीनरी लेकर पहुंच गई थी, जिसका स्थानीय विधायक ने विरोध किया।
भोपाल मेट्रो ऑरेंज लाइन की कुल लंबाई कितनी है?
भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन का पूरा रूट 16.74 किलोमीटर लंबा है, जिसमें से प्रायोरिटी कॉरिडोर का काम पूरा हो चुका है।
ऑरेंज लाइन फेज-2 में कितना हिस्सा अंडरग्राउंड और कितना एलिवेटेड होगा?
सुभाष नगर से करोंद के बीच 8.77 किलोमीटर लंबे फेज-2 में 5.38 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड और 3.39 किलोमीटर हिस्सा अंडरग्राउंड रहेगा।
अंडरग्राउंड हिस्से में कौन से दो स्टेशन प्रस्तावित हैं?
इस भूमिगत मार्ग पर भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड नाम से दो अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जाने हैं।
इस विवादित रूट का कानूनी मामला कहां चल रहा है?
कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो रूट निकालने का मामला मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में विचाराधीन है और वहां दोनों पक्षों की सुनवाई चल रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·22 दिन पहले

रात के वक्त अचानक मेट्रो वाले कब्रिस्तान में मशीनें लेकर पहुंच गए, तो हंगामा होना ही था। बिना अनुमति के ऐसा काम शुरू करने की क्या तुक थी?

Ravikash Gupta@ravikash·22 दिन पहले

रात के वक्त चुपचाप काम शुरू करना ही था तो विवाद तो होना ही था। प्रशासन को पहले बात करनी चाहिए थी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·22 दिन पहले

रविकेश जी, बात सही है कि रात में काम से शक हुआ, पर क्या सचमुच बिना परमिशन के कोई इतनी बड़ी मशीनें लेकर अंदर घुस सकता है? मुझे थोड़ा अजीब लगता है।

Rohan Verma@rohan-verma·22 दिन पहले

देर रात इस तरह अचानक कब्रिस्तान के पास मशीनें पहुंच जाना डर और शक दोनों पैदा करता है। विधायक का मौके पर पहुंचना सही था, बिना अनुमति काम नहीं होना चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

रोहन जी, बात सही है। रात के वक्त इस तरह चुपचाप काम शुरू करना शक तो पैदा करता ही है।

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