मिजोरम के कला एवं संस्कृति मंत्री सी. लालसाविवुंगा ने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहर को संजोने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मिजोरम स्टेट म्यूजियम का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे इस संस्थान में आएं, अपनी जड़ों को समझें और मिजो पहचान, परंपराओं तथा इतिहास के प्रति गहरा जुड़ाव विकसित करें।
सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र और गणमान्य हस्तियों की मौजूदगी
उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री के सलाहकार एवं विधायक लालमुआनपुइया पुंते सहित शासन-प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी और अन्य विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। यह नया संग्रहालय आइजोल स्थित न्यू सेक्रेटरीएट कॉम्प्लेक्स (MINECO) में मिजोरम पब्लिक सर्विस कमीशन कार्यालय के पास बनाया गया है। इसमें आने वाले दर्शकों और शोधकर्ताओं के लिए कुल नौ अलग-अलग दीर्घाएं (गैलरी) और एक विशेष पुरातत्व (आर्कियोलॉजी) सेक्शन तैयार किया गया है। मंत्री ने कहा कि यह संस्थान केवल पुरानी वस्तुओं का संग्रह स्थल नहीं है, बल्कि यह मिजो समाज की परंपराओं, जीवनशैली और सांस्कृतिक खजाने की रक्षा करने वाला एक जीवंत माध्यम है।
केंद्र सरकार और स्मार्ट सिटी परियोजना का वित्तीय सहयोग
इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के निर्माण और सजावट में विभिन्न विभागों के तालमेल की सराहना की गई। सी. लालसाविवुंगा ने संग्रहालय भवन के निर्माण के लिए आवश्यक धनराशि प्रदान करने पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय का आभार जताया। इसके साथ ही, भवन के आंतरिक स्थान, दीर्घाओं और व्यवस्थाओं को आधुनिक रूप देने के लिए शहरी विकास एवं गरीबी उन्मूलन (UD & PA) विभाग के तहत संचालित स्मार्ट सिटी (SMART CITY) मिशन द्वारा वित्तीय सहायता दी गई। मंत्री ने उन सभी व्यक्तियों और तकनीकी टीमों को भी धन्यवाद दिया जिन्होंने इस पूरी परियोजना को समय पर और सफलता के साथ पूरा करने में अपना अमूल्य योगदान दिया।
'मल्टीपर्पज म्यूजियम' की विशेषताएं और जनता का योगदान
मिजोरम स्टेट म्यूजियम की एक मुख्य खासियत इसका 'मल्टीपर्पज म्यूजियम' यानी बहुउद्देश्यीय संग्रहालय होना है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसे अलग-अलग सीमित खांचों में बांटने के बजाय एक ही परिसर में विविधतापूर्ण वस्तुओं के प्रदर्शन के लिए डिजाइन किया गया है। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि संग्रहालय में रखी गई 50 प्रतिशत से अधिक वस्तुएं आम नागरिकों द्वारा स्वेच्छा से दान की गई हैं। लालसाविवुंगा ने आम जनता से अपील की कि जिन लोगों के पास ऐतिहासिक या सांस्कृतिक महत्व की प्राचीन वस्तुएं मौजूद हैं, वे उन्हें संग्रहालय को दान कर सकते हैं। इससे पूरी मिजो बिरादरी और आने वाली पीढ़ियां उन ऐतिहासिक धरोहरों से लाभान्वित हो सकेंगी।
2007 से 2019 तक का निर्माण सफर और सामूहिक जिम्मेदारी
इस भव्य संग्रहालय का निर्माण कार्य 18 सितंबर 2007 को शुरू हुआ था और यह 2 अक्टूबर 2012 को पूरा कर लिया गया था। बाद में, 25 जुलाई 2019 को इस इमारत को औपचारिक रूप से कला एवं संस्कृति विभाग को सौंप दिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि यह म्यूजियम पूरे मिजोरम राज्य और यहां के निवासियों के गौरव का प्रतीक है। इसलिए, इसकी देखरेख, रखरखाव और गरिमा बनाए रखना केवल सरकार का काम नहीं है, बल्कि समाज के हर नागरिक की साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संस्थान को आने वाले समय में एक बेहतर शिक्षण केंद्र के रूप में बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे।


















