तुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से रायदैनिक राशिफल 25 सितंबर 2026: कुंभ में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग, जानें सभी 12 राशियों का हालचीन और अमेरिका के बीच टकराव से दोनों को नुकसान, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वाशिंगटन में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर दिया जोरगाजा युद्ध में पीछे न हटने के पीछे नेतन्याहू ने सुनाई 1967 की दास्तान, भाई के वो 5 शब्द बने इजरायल की सैन्य नीतिसऊदी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमलों के बाद तेल की कीमतों में उछाल, तुर्किये और पाकिस्तान के साथ आपात बैठकसिंह राशिफल 25 सितंबर 2026: साझेदारी और कागजी सौदों में रखें स्पष्टता, रिश्तों में पुरानी बातें न दोहराएंकेदारनाथ में पांच महीने के भीतर 50 मीट्रिक टन से अधिक कचरा जमा, आरटीआई में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
बिना तेल के नमक में भुनकर बनता जमशेदपुर का यह भुजा, सिर्फ 20 रुपये में 100 ग्रामझारखंड
6 सित॰ 2026, 10:40 am (19 दिन पहले)· 2

बिना तेल के नमक में भुनकर बनता जमशेदपुर का यह भुजा, सिर्फ 20 रुपये में 100 ग्राम

जमशेदपुर के काशीडीह चौक इलाके में दस अनाजों से बना एक हल्का भुजा शाम के नाश्ते का नया पसंदीदा बन गया है, जिसे बिना तेल के सिर्फ गर्म नमक में भूनकर तैयार किया जाता है।

जमशेदपुर के काशीडीह चौक इलाके में शाम होते ही एक खास तरह का भुजा बिकने का ठेला ग्राहकों से घिर जाता है। यह आम भुजा नहीं बल्कि दस अलग-अलग अनाजों को मिलाकर तैयार किया गया मिश्रण है, जो हल्का भी है और स्वाद में भी अलग।

दस अनाजों का अनोखा मेल

इस भुजा को खास बनाती है इसमें डाली जाने वाली सामग्री। चूड़ा, बादाम, चना, कॉर्न फ्लेक्स, स्वीट कॉर्न और चावल का चूड़ा जैसी करीब दस चीजें इसमें मिलाई जाती हैं। हर निवाले में अलग बनावट और स्वाद मिलता है, जो इसे बाजार में मिलने वाले सामान्य भुजा से अलग खड़ा करता है।

ये भी पढ़ें

तेल नहीं, गर्म नमक से भुनाई

ठेला लगाने वाले सोनू कुमार गुप्ता के मुताबिक, इसे बनाने की तरकीब सीधी लेकिन दिलचस्प है। पहले कड़ाही में नमक को खूब गर्म किया जाता है, उसके बाद उसी तपते नमक में चूड़ा और बाकी सामग्री डालकर भूनी जाती है। सोनू कुमार गुप्ता के मुताबिक, गर्म नमक में भूनने से तेल की जरूरत ही खत्म हो जाती है, यही वजह है कि भुजा कुरकुरा तो रहता है लेकिन उसमें चिकनाई नहीं आती।

चाय के साथ हल्के नाश्ते का विकल्प

शाम को चाय के साथ कुछ खाने का मन हो तो अक्सर लोग समोसे या पकौड़े की तरफ भागते हैं, लेकिन जिन्हें तला-भुना पसंद नहीं, उनके लिए यह भुजा राहत जैसा है। चना और बादाम इसमें प्रोटीन जोड़ते हैं, जबकि कॉर्न फ्लेक्स और स्वीट कॉर्न कुरकुरापन और मिठास का हल्का टच देते हैं। यही वजह है कि इसे एक संतुलित शाम के नाश्ते के तौर पर देखा जाने लगा है।

जेब पर हल्का, स्वाद में भारी

दाम की बात करें तो यह भुजा 200 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकता है। ज्यादातर ग्राहक एक बार में 100 ग्राम खरीदते हैं, जिसकी कीमत महज 20 रुपये पड़ती है। इतने कम दाम में एक अलग तरह का पौष्टिक नाश्ता मिल जाना ही इसे स्थानीय लोगों के बीच पसंदीदा बना रहा है।

ग्राहक आसिम पात्रा का कहना है कि इस भुजा की पहचान सिर्फ इसके स्वाद से नहीं बल्कि इसे बनाने के तरीके और उसमें शामिल विविध सामग्री से भी बनती है। उनके मुताबिक, यही बात इसे रोज मिलने वाले समोसे-पकौड़े जैसे नाश्तों से अलग बनाती है। काशीडीह चौक के आसपास रहने वाले लोगों के लिए अब शाम की चाय के साथ यह भुजा एक नई और चर्चित पसंद बनता जा रहा है।

सवाल-जवाब

यह भुजा कहां मिलता है?
यह जमशेदपुर के काशीडीह चौक इलाके के पास एक ठेले पर मिलता है।
इसे बनाने में कौन-कौन सी सामग्री इस्तेमाल होती है?
इसमें चूड़ा, बादाम, चना, कॉर्न फ्लेक्स, स्वीट कॉर्न और चावल के चूड़े जैसी करीब दस चीजें मिलाई जाती हैं।
इसे तेल में तला जाता है?
नहीं, इसे तेल की जगह पहले खूब गर्म किए गए नमक की मदद से भूना जाता है।
इसकी कीमत कितनी है?
यह 200 रुपये प्रति किलो बिकता है, और ज्यादातर लोग 20 रुपये में 100 ग्राम खरीदते हैं।
इसे कौन बेचता है?
ठेले पर इसे सोनू कुमार गुप्ता बेचते हैं।
ग्राहकों को यह भुजा क्यों पसंद आ रहा है?
ग्राहक आसिम पात्रा के मुताबिक इसकी बनाने की खास तरकीब और इसमें शामिल विविध सामग्री इसे रोज के समोसे-पकौड़े से अलग बनाती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

यह अनूठा और बिना तेल का नाश्ता केवल एक स्थानीय खान-पान की प्रवृत्ति नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक पाक कला और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता का एक बेहतरीन उदाहरण है। जिस तरह से इस दस-अनाजों के मिश्रण को गर्म नमक में भुना जाता है, वह फास्ट फूड के दौर में स्ट्रीट फूड को एक स्वस्थ विकल्प प्रदान करता है। आने वाले समय में यदि इस तरह के पारंपरिक और किफायती व्यंजनों को छोटे पैमाने पर पैक करके बड़े बाजारों में उतारा जाए, तो यह छोटे विक्रेताओं के लिए आजीविका का एक बड़ा माध्यम बन सकता है और क्षेत्रीय स्तर पर स्वरोजगार को भी बढ़ावा दे सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

रोहन वर्मा की इस रिपोर्ट से एक महत्वपूर्ण आर्थिक और सामाजिक पहलू उभरता है कि कैसे पारंपरिक खाद्य तकनीकें स्थानीय आजीविका का सशक्त आधार बन सकती हैं। जब जमशेदपुर के काशीडीह चौक जैसे इलाकों में केवल बीस रुपये प्रति सौ ग्राम की दर से बिकने वाला ऐसा बिना तेल का नाश्ता लोकप्रिय होता है, तो यह स्पष्ट है कि कम लागत वाले स्वरोजगार के मॉडल शहरी अर्थव्यवस्था में कितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। यदि ऐसे अनूठे उत्पादों को खाद्य सुरक्षा मानकों और बेहतर पैकेजिंग का समर्थन मिले, तो यह छोटे वेंडर्स को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ-साथ उपभोक्ता बाजार में एक स्थायी और स्वस्थ विकल्प के रूप में स्थापित हो सकता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp