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चमोली हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद जांच तेज, खराब मौसम की चेतावनी के बावजूद उड़ान की मंजूरी पर उठे गंभीर सवालउत्तराखंड
31 अक्तू॰ 2026, 4:59 pm (6 दिन पहले)· 0

चमोली हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद जांच तेज, खराब मौसम की चेतावनी के बावजूद उड़ान की मंजूरी पर उठे गंभीर सवाल

चमोली में ट्रांस एविएशन के हेलीकॉप्टर हादसे में 6 लोगों की मौत के बाद डीजीसीए और एएआईबी ने जांच शुरू की है, वहीं 48 घंटे के मौसम अलर्ट के बीच उड़ान की अनुमति देने पर यूकाडा सवालों के घेरे में आ गया है।

उत्तराखंड के चमोली जिले में हुए भीषण हेलीकॉप्टर हादसे के बाद उड्डयन सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक फैसलों की गंभीर समीक्षा शुरू हो गई है। ट्रांस एविएशन द्वारा संचालित इस उड़ान में एक पायलट और पांच यात्रियों सहित कुल 6 लोगों की जान चली गई। यह दुखद घटना ऐसे समय में हुई जब मौसम विभाग ने क्षेत्र में 48 घंटे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया हुआ था और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तेज बर्फबारी दर्ज की जा रही थी। प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उड़ान की मंजूरी मिलने से नियामक निगरानी पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

दुर्घटनास्थल पर तकनीकी विशेषज्ञों की पड़ताल और ब्लैक बॉक्स की तलाश

हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए (DGCA) और विमान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो यानी एएआईबी (AAIB) के विशेषज्ञ शनिवार को मौके पर पहुंचे। चमोली जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर टीमों ने आसपास के बेहद दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों का गहन मुआयना किया। जांचकर्ताओं का प्राथमिक उद्देश्य किसी भी यांत्रिक खराबी या प्रणालीगत विफलता के सुराग जुटाना है।

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हालांकि, दुर्घटनास्थल की छानबीन के बावजूद अब तक विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद नहीं किया जा सका है। ब्लैक बॉक्स का डेटा उड़ान के अंतिम क्षणों की तकनीकी स्थिति और कॉकपिट की बातचीत को समझने के लिए सबसे अहम माना जाता है। विमानन जानकारों का स्पष्ट कहना है कि जब तक यह उपकरण नहीं मिलता और इसका डेटा डिकोड नहीं होता, तब तक हादसे की वास्तविक वजहों को पूरी तरह से साबित करना बेहद मुश्किल होगा।

यूकाडा प्रशासन की ओर से दी गई सफाई

खराब मौसम के बीच परिचालन की अनुमति देने को लेकर उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण यानी यूकाडा (UCADA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन भी सवालों का सामना कर रहे हैं। प्रतीक जैन ने चमोली में खुद मौके पर मौजूद रहकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने परिचालन को सही ठहराते हुए कहा कि उड़ान भरने से पहले मौसम की लगातार निगरानी की जा रही थी।

प्रतीक जैन का कहना है कि प्रतिकूल मौसम को देखते हुए ही सुबह से दोपहर 12 बजे तक किसी भी हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की मंजूरी नहीं दी गई थी। उनके अनुसार, जब दोपहर बाद मौसम में थोड़ा सुधार देखा गया, केवल तभी परिचालन की अनुमति जारी की गई थी। इसके बावजूद, जमीन पर मौजूद भारी बर्फबारी और मौसम विभाग की औपचारिक चेतावनी के कारण इस निर्णय पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

जिम्मेदारी तय करने और सुरक्षा नियमों को सख्त करने की मांग

इस हादसे के बाद तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और व्यावसायिक दबावों के बीच संतुलन को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय स्तर पर यह चिंता जताई जा रही है कि क्या खराब परिस्थितियों में उड़ानों को अनुमति देने में जरूरी एहतियात बरती गई थी। ब्लैक बॉक्स की बरामदगी और जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट आने तक कई पहलुओं पर जांच केंद्रित रहेगी, जबकि प्रशासन से भविष्य में ऐसे जोखिम भरे फैसलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की उम्मीद की जा रही है।

सवाल-जवाब

चमोली हेलीकॉप्टर दुर्घटना में कितने लोगों की जान गई?
इस दुर्घटना में पायलट सहित कुल 6 लोगों की मौत हुई है, जिनमें पांच यात्री शामिल थे।
हादसे के शिकार हेलीकॉप्टर का संचालन कौन सी कंपनी कर रही थी?
हेलीकॉप्टर का संचालन ट्रांस एविएशन कंपनी द्वारा किया जा रहा था।
दुर्घटना के समय इलाके में मौसम की क्या स्थिति थी?
मौसम विभाग ने 48 घंटे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया था और पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो रही थी।
हादसे की जांच कौन सी एजेंसियां कर रही हैं?
डीजीसीए (DGCA) और एएआईबी (AAIB) के विशेषज्ञ दल चमोली प्रशासन के साथ मिलकर जांच कर रहे हैं।
यूकाडा के सीईओ प्रतीक जैन ने उड़ान की अनुमति पर क्या स्पष्टीकरण दिया?
उन्होंने कहा कि सुबह से दोपहर 12 बजे तक उड़ानों पर रोक थी और मौसम साफ होने के बाद ही हरी झंडी दी गई थी।
जांच में अब तक ब्लैक बॉक्स की क्या स्थिति है?
जांच टीमों के व्यापक मुआयने के बावजूद अभी तक ब्लैक बॉक्स बरामद नहीं हो सका है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·5 दिन पहले

मौसम का ऑरेंज अलर्ट होने के बावजूद हेलिकॉप्टर उड़ाने की अनुमति देना बड़ी लापरवाही है। छह बेकसूर लोगों की जान चली गई और अब अधिकारी अपनी गलती छिपाने में लगे हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

मौसम का ऑरेंज अलर्ट होने के बावजूद हेलिकॉप्टर उड़ाने की परमिशन देना बहुत बड़ी लापरवाही है। छह बेकसूर लोगों की जान चली गई, अब सिर्फ सफाई देने से क्या फायदा?

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

रवि जी, बात सही है आपकी, पर दोपहर में मौसम सुधरने की जो बात अधिकारी कह रहे हैं, उसे एकदम से नकारा भी तो नहीं जा सकता।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

केदारनाथ यात्रा के दौरान पिछले साल मैंने खुद मौसम बदलते देखा है, धूप में अचानक कैसे बर्फबारी होने लगती है इसका अंदाज़ा पहाड़ों में रहना वालों को ही होता है। प्रशासन को अगर चेतावनी थी तो इतनी जल्दी उड़ान की अनुमति नहीं देनी चाहिए थी, छह लोगों की जान यूँ चली जाना बहुत दुखद है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

रोहन जी, बिल्कुल सही कहा आपने। जब ऑरेंज अलर्ट था ही, तो दोपहर में थोड़ी सी धूप निकलते ही रिस्क लेना समझ से परे है। छह लोगों की जान बचना ज्यादा जरूरी था।

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