जैसलमेर के रामदेवरा में दीपावली पर अनूठी सजावट, 500 किलो फूलों से महका बाबा रामदेव का दरबारसिरमौर के सराहां में धनतेरस पर दर्दनाक हादसा, खाई में बोलेरो गिरने से बड़े भाई की मौत और नौ घायलहिमाचल के सम्मू गांव में दिवाली पर क्यों पसरा रहता है सन्नाटा, जानिए सात पीढ़ियों से चली आ रही अनूठी परंपराबेंगलुरु में दामाद ने सिलबट्टे से की सात लोगों की हत्या, नंदी हिल्स से चिकबल्लापुर तक फेंके गए शवसुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश की बड़ी जीत, बीबीएमबी विवाद सुलझा, सालाना 1000 करोड़ तक का होगा फायदातकनीकी दबाव में फिसला यूरो, अमेरिकी डॉलर के सामने 1.1200 का अहम स्तर टूटाडायमंड स्टेट समिट 2026: राजस्थान की सियासत में जेनेरेशन जेड की एंट्री, कम उम्र के पार्षदों ने रखा विजनपलामू के किसान संतरे की बागवानी से कमा सकते हैं लाखों रुपये, जानिए एक एकड़ की लागत और कमाई का पूरा गणितमहज 100 रुपये से शुरू किया कारोबार, अब लाखों की कमाई कर रहे हैं मुरादाबाद के मोहम्मद फिरोजओबीसी क्रीमी लेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, केंद्र सरकार की अर्जी खारिज
दरोगा की नौकरी छोड़कर रावण बनाने वाले मोहम्मद वकील की अनूठी कहानीहरियाणा
17 अक्तू॰ 2026, 9:19 pm (20 दिन पहले)· 1

दरोगा की नौकरी छोड़कर रावण बनाने वाले मोहम्मद वकील की अनूठी कहानी

अंबाला में दशहरे के लिए रावण के पुतले तैयार कर रहे मोहम्मद वकील ने अपनी गहरी दोस्ती और पुश्तैनी हुनर को बचाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा की नौकरी छोड़ दी थी।

अंबाला के रामबाग ग्राउंड में जब दशहरे के पावन अवसर पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के विशालकाय पुतलों का दहन किया जाएगा, तो उस क्षण के पीछे एक लंबे समय की कड़ी मेहनत और एक परिवार की पीढ़ियों पुरानी कला समाहित होगी। इन दिनों अंबाला कैंट की कुम्हार मंडी में विजय दशमी के पर्व को लेकर जबरदस्त हलचल और तैयारियां चल रही हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ से आए मुस्लिम कारीगर मोहम्मद वकील अपनी कुशल कारीगरों की टीम के साथ मिलकर इन भव्य पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे खास और दिलचस्प बात यह है कि मोहम्मद वकील ने कभी उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा के पद पर सरकारी नौकरी हासिल की थी, लेकिन गहरी दोस्ती और अपने खानदानी पुश्तैनी काम के प्रति अटूट प्रेम ने उन्हें बिल्कुल अलग राह पर चलने के लिए मजबूर कर दिया। आज लगभग 65 साल पुरानी दोस्ती की खूबसूरत यादें और तीन से अधिक पीढ़ियों से चला आ रहा हुनर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा हिस्सा बन चुका है।

सालों पुरानी परंपरा और कारीगरों की टीम

मोहम्मद वकील ने इस परंपरा के बारे में विस्तार से बात करते हुए बताया कि वह पिछले 27 वर्षों से लगातार दशहरे के खास मौके पर रावण के पुतले बनाने के लिए अंबाला आ रहे हैं। उनके परिवार में यह काम बहुत पहले से चला आ रहा है और उनसे पहले उनके पिता तथा दादा भी इसी पैतृक पेशे से जुड़े हुए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतिशबाजी का सामान तैयार करना और पुतले बनाना उनके पूरे परिवार का पारंपरिक कार्य है। इस बार भी वह करीब 10 से 12 अनुभवी कारीगरों के एक समर्पित दल के साथ अंबाला पहुंचे हैं और दिन-रात काम में जुटे हैं। पिछले 25 दिनों से लगातार पुतले बनाने और आतिशबाजी सेट करने में लगे ये कारीगर अब त्योहार के अंतिम आयोजनों को सफल बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

ये भी पढ़ें

अंबाला में कई स्थानों पर बन रहे हैं पुतले

मोहम्मद वकील के अनुसार, इस बार अंबाला शहर में कुल चार अलग-अलग जगहों पर उनकी टीम के सदस्य रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले तैयार करने का काम कर रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि स्थानीय लोगों को हर साल उनकी कलाकारी और काम बेहद पसंद आता है और यही सराहना उन्हें इस पुरानी परंपरा को लगातार आगे बढ़ाते रहने की प्रेरणा देती है। बड़े आकार के पुतलों को पूरी तरह तैयार करने में अमूमन 20 से 30 दिन का लंबा वक्त लग जाता है। सामान्य परिस्थितियों में बड़े और भव्य रावण के पुतले की कीमत 5 से 10 लाख रुपये या उससे भी अधिक तक जा सकती है, जबकि इस बार अंबाला में तैयार किए जा रहे कुछ चुनिंदा पुतलों की लागत करीब 30 से 40 हजार रुपये आंकी गई है। इस बार के आयोजन के लिए 45 फुट, 50 फुट और 55 फुट तक ऊंचे पुतले विशेष तौर पर तैयार किए जा रहे हैं।

दोस्ती के लिए छोड़ी सरकारी नौकरी

मोहम्मद वकील के जीवन का सबसे अनोखा और प्रेरणादायक पहलू उनकी पक्की दोस्ती से जुड़ा हुआ है। उन्होंने साझा किया कि उन्होंने केवल हाईस्कूल तक की पढ़ाई पूरी की थी, जिसके बाद उनकी उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा के पद पर नौकरी लग गई थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि नौकरी ज्वाइन करने के करीब चार महीने बाद ही उन्होंने उसे अलविदा कह दिया। वकील के मुताबिक, बचपन से ही उनका एक जिगरी दोस्त उनके साथ रहा है और दोनों की मित्रता को अब 65 साल से भी अधिक का समय बीत चुका है। जब वह दरोगा की नौकरी पर चले गए थे, तो उनके दोस्त को काफी अकेलापन महसूस होने लगा था और वह अक्सर उनसे कहता था कि उनके नौकरी पर चले जाने के कारण उसका मन बिल्कुल नहीं लगता है।

रिश्तों को दी करियर से ज्यादा अहमियत

वकील बताते हैं कि उस दौर में उनकी दोस्ती इतनी प्रगाढ़ और गहरी थी कि दोनों एक-दूसरे को अपनी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा मानते थे। अंततः उन्होंने भौतिक सुख और सरकारी नौकरी के मुकाबले अपनी इस अनमोल दोस्ती और पुश्तैनी काम को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का फैसला किया। आज वह उसी खानदानी काम को पूरी निष्ठा और लगन के साथ निभा रहे हैं। उनकी यह दास्तान हमें सिखाती है कि जीवन में हर बड़ा फैसला केवल मोटी कमाई या नौकरी के दायरे में नहीं बंधा होता, बल्कि कई बार इंसान के लिए आपसी रिश्ते और अपनी पैतृक पहचान भी उतनी ही मायने रखती है। साल के बाकी समय में वकील शादियों, फिल्मों और विभिन्न नाटकों के आयोजनों में आतिशबाजी का काम संभालते हैं। उनका कहना है कि जब तक उनका शरीर उनका साथ देगा, वह इस कला को जीवित रखेंगे। हालांकि, उन्हें इस बात का गहरा मलाल जरूर है कि आज की नई पीढ़ी इस पारंपरिक और हुनरमंद पेशे में अब ज्यादा रुचि नहीं दिखा रही है।

सवाल-जवाब

मोहम्मद वकील अंबाला क्यों आते हैं?
वह पिछले 27 वर्षों से हर साल दशहरे पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले बनाने के लिए अंबाला आते हैं।
मोहम्मद वकील ने कौन सी सरकारी नौकरी छोड़ी थी?
उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा के पद पर हासिल की गई नौकरी छोड़ दी थी।
उन्होंने दरोगा की नौकरी क्यों छोड़ी?
अपने बचपन के दोस्त के अकेलेपन और पुश्तैनी काम के प्रति लगाव के कारण उन्होंने चार महीने बाद ही नौकरी छोड़ दी थी।
अंबाला में इस बार कितने बड़े पुतले तैयार हो रहे हैं?
इस बार अंबाला में 45, 50 और 55 फुट तक के पुतले तैयार किए जा रहे हैं।
इन पुतलों की लागत कितनी है?
अंबाला में तैयार किए जा रहे कुछ पुतलों की लागत करीब 30 से 40 हजार रुपये है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·19 दिन पहले

सरकारी नौकरी छोड़कर पुश्तैनी काम को चुनना हर किसी के बस की बात नहीं होती। अंबाला में इन कारीगरों से मिलने का मौका मिला था, तब इनकी मेहनत और लगن देखकर बहुत सम्मान जागा था। अपनी कला के प्रति ऐसी निष्ठा सचमुच अनोखी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·19 दिन पहले

दरोगा की नौकरी छोड़कर पुतले बनाने का फैसला हैरान करने वाला है। क्या उनके दोस्त को कभी इस बात का अहसास हुआ कि उनके लिए इतनी बड़ी कुर्बानी दी गई है?

Ravikash Gupta@ravikash·19 दिन पहले

अर्जुन भाई, नौकरी तो दोबारा मिल सकती है पर ऐसी पक्की दोस्ती किस्मत वालों को ही मिलती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·19 दिन पहले

दरोगा की नौकरी छोड़कर खानदानी हुनर और दोस्ती को चुनना सच में बड़ी बात है। आज के समय में ऐसा जज्बा कम ही देखने को मिलता है।

Rohan Verma@rohan-verma·19 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा। नौकरी से बड़ी दोस्ती और विरासत को मानना हर किसी के बस की बात नहीं होती।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp