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दिल्ली चिड़ियाघर ने मिस्र के गिद्ध जटायु के लिए शुरू की जीवनसंगिनी की तलाश, पिंजौर संरक्षण केंद्र का दौरा करेगी अधिकारियों की टीमभारत
1 सित॰ 2026, 11:48 pm (13 दिन पहले)· 3

दिल्ली चिड़ियाघर ने मिस्र के गिद्ध जटायु के लिए शुरू की जीवनसंगिनी की तलाश, पिंजौर संरक्षण केंद्र का दौरा करेगी अधिकारियों की टीम

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में दो दशकों से अकेले रह रहे मिस्र के गिद्ध जटायु के लिए साथी की तलाश की जा रही है। चिड़ियाघर प्रशासन अन्य प्राणी उद्यानों और हरियाणा के पिंजौर स्थित संरक्षण केंद्र से संपर्क साध रहा है।

देश की राजधानी स्थित राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में इन दिनों दो दशक से भी अधिक समय से तन्हा जीवन बिता रहे मिस्र के एक विशेष गिद्ध के जीवन में खुशियां लौटाने की तैयारी की जा रही है। जटायु नाम का यह गिद्ध पिछले बीस वर्षों से भी अधिक समय से बिना किसी साथी के अकेला रह रहा है। अब उसकी इस लंबी तन्हाई को समाप्त करने के लिए दिल्ली चिड़ियाघर के अधिकारियों ने नए साथी की तलाश औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। इसके लिए देश के अन्य राज्यों में स्थित चिड़ियाघरों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि इस दुर्लभ पक्षी का अकेलापन दूर किया जा सके।

रेस्क्यू होकर दिल्ली पहुंचा था जटायु

जटायु की इस चिड़ियाघर में आने की कहानी काफी रोचक रही है। कई वर्ष पहले यह पक्षी मौसमी प्रवास के दौरान उड़ता हुआ दिल्ली के क्षेत्र में पहुंचा था। वहां किसी कारणवश संकट में फंसने के बाद वन्यजीव दल ने इसे सुरक्षित रेस्क्यू किया था। इलाज और देखभाल के बाद इसे राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में आश्रय दिया गया। उस समय अधिकारियों को यह उम्मीद नहीं थी कि यह विदेशी मेहमान अगले बीस से भी ज्यादा सालों तक इसी प्राणी उद्यान का स्थायी निवासी बना रहेगा।

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शुरुआती दौर में जटायु के बाड़े में कुछ अन्य गिद्धों को भी साथ रखा गया था। हालांकि समय बीतने के साथ-साथ उम्रदराज होने और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के चलते उन अन्य पक्षियों की एक-एक कर मौत हो गई। इसके बाद जटायु बाड़े में पूरी तरह अकेला रह गया और बीते कई सालों से वह इसी तन्हाई में अपना जीवन व्यतीत कर रहा है।

अन्य चिड़ियाघरों और पिंजौर केंद्र से चल रही बातचीत

अकेले रह रहे जटायु के लिए उपयुक्त जीवनसंगिनी खोजने की प्रक्रिया अब गति पकड़ चुकी है। चिड़ियाघर के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में दो अलग-अलग राज्यों के प्राणी उद्यानों के साथ इस विषय पर बातचीत की जा रही है। चूंकि यह योजना अभी अपने प्राथमिक चरण में है, इसलिए अधिकारियों ने उन विशिष्ट चिड़ियाघरों के नामों का खुलासा करने से परहेज किया है।

इसके अतिरिक्त अधिकारियों का ध्यान पड़ोसी राज्य हरियाणा के पिंजौर में संचालित हो रहे प्रसिद्ध गिद्ध संरक्षण और प्रजनन केंद्र पर भी टिका हुआ है। चिड़ियाघर प्रशासन की एक विशेष टीम छह सितंबर को पिंजौर का दौरा करने वाली है। यह टीम वहां चलाए जा रहे गिद्ध संरक्षण और कृत्रिम प्रजनन कार्यक्रमों की बारीकियों का जायजा लेगी और वहां से जटायु के लिए मादा गिद्ध लाने की संभावनाओं का मूल्यांकन करेगी।

जोड़े में रहने और प्रजनन की प्राकृतिक प्रवृत्ति

पक्षिविदों और अधिकारियों का कहना है कि मिस्र के गिद्धों के जीवन में साथी की मौजूदगी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह प्रजाति आमतौर पर जीवन भर एक ही साथी के साथ जोड़े में रहने के लिए जानी जाती है। चार से पांच वर्ष की आयु में वयस्क होने के बाद ये पक्षी प्रजनन प्रक्रिया शुरू करते हैं।

इन पक्षियों के व्यवहार की खास बात यह है कि नर और मादा दोनों मिलकर अपने कुनबे की पूरी जिम्मेदारी संभालते हैं। अंडे सेने से लेकर नवजात बच्चों के पोषण, सुरक्षा और उन्हें उड़ाना सिखाने तक का पूरा काम नर और मादा गिद्ध आपस में बांटकर करते हैं। ऐसे में इतने लंबे समय तक अकेला रहना जटायु के प्राकृतिक व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बना हुआ था।

दिल्ली चिड़ियाघर में 16 अन्य प्रजातियां भी साथी विहीन

दिल्ली चिड़ियाघर में केवल जटायु ही अकेला जीव नहीं है जो अपने साथी का इंतजार कर रहा है। प्राणी उद्यान के आंकड़ों के अनुसार यहां लगभग 16 ऐसी विभिन्न वन्यजीव प्रजातियां मौजूद हैं जिनके पास अपनी प्रजाति का विपरीत लिंगी साथी उपलब्ध नहीं है। इनमें कई जीव या तो अकेले हैं या फिर एक ही लिंग के बचे हुए हैं।

उदाहरण के तौर पर चिड़ियाघर में दो नर शुतुरमुर्ग बीते कई वर्षों से मादा साथी के बिना रह रहे हैं। इसके अलावा नौ वर्षीय मादा रिया भी काफी समय से तन्हाई झेल रही है। अन्य प्रमुख जीवों में इंडियन ग्रे हॉर्नबिल, ग्रे लंगूर, स्मॉल इंडियन सिवेट और ब्लैक स्वान शामिल हैं, जिनके लिए उपयुक्त साथी तलाशने की कवायद प्रशासन द्वारा जारी है।

सवाल-जवाब

दिल्ली चिड़ियाघर में जटायु कौन है और वह कितने समय से अकेला रह रहा है?
जटायु मिस्र का एक गिद्ध है, जो दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में पिछले 20 साल से भी अधिक समय से बिना किसी साथी के अकेला रह रहा है।
जटायु दिल्ली चिड़ियाघर कैसे पहुंचा था?
कई वर्ष पहले मौसमी प्रवास के दौरान जटायु दिल्ली पहुंचा था, जहां उसे संकट से बचाकर राष्ट्रीय प्राणी उद्यान लाया गया था।
जटायु के बाड़े के अन्य गिद्धों का क्या हुआ?
शुरुआत में जटायु के साथ कुछ अन्य गिद्ध रखे गए थे, लेकिन अधिक उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उनकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद जटायु अकेला रह गया।
जटायु के लिए साथी खोजने की क्या योजना बनाई जा रही है?
चिड़ियाघर प्रशासन दो अन्य राज्यों के चिड़ियाघरों से बातचीत कर रहा है और 6 सितंबर को अधिकारियों की एक टीम हरियाणा के पिंजौर स्थित गिद्ध संरक्षण केंद्र का जायजा लेगी।
मिस्र के गिद्धों के लिए साथी की मौजूदगी क्यों जरूरी मानी जाती है?
मिस्र के गिद्ध आमतौर पर जीवन भर एक ही साथी के साथ रहते हैं और 4 से 5 साल की उम्र में प्रजनन शुरू करते हैं। नर और मादा दोनों मिलकर अंडे सेने और बच्चे पालने की जिम्मेदारी निभाते हैं।
क्या दिल्ली चिड़ियाघर में जटायु के अलावा अन्य जीव भी अकेले रह रहे हैं?
हां, चिड़ियाघर में लगभग 16 ऐसी प्रजातियां हैं जिनके पास विपरीत लिंगी साथी नहीं हैं, जिनमें दो नर शुतुरमुर्ग, एक नौ साल की मादा रिया, इंडियन ग्रे हॉर्नबिल, ग्रे लंगूर, स्मॉल इंडियन सिवेट और ब्लैक स्वान शामिल हैं।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·12 दिन पहले

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में मिस्र के गिद्ध जटायु के लिए साथी खोजने की यह पहल वन्यजीव प्रबंधन और प्रजाति संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण है। हालांकि मिस्र के गिद्धों की घटती संख्या और उनके प्राकृतिक आवासों पर बढ़ते संकट को देखते हुए, यह मामला केवल एक पक्षी के अकेलेपन को दूर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लुप्तप्राय पक्षियों के कृत्रिम प्रजनन और दीर्घकालिक पुनर्वास नीतियों की प्रभावशीलता की भी कड़ी परीक्षा है। पिंजौर केंद्र की आगामी यात्रा यह तय करेगी कि ऐसी संस्थागत साझेदारियां वन्यजीव संरक्षण में कितनी कारगर साबित होती हैं।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·12 दिन पहले

अर्जुन मेहता के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव संरक्षण के संदर्भ में यह स्पष्ट है कि जब कोई प्रवासी पक्षी दशकों तक किसी कृत्रिम माहौल में रहता है, तो उसका पुनर्वास केवल एक साथी मिलने से संभव नहीं होता। पिंजौर संरक्षण केंद्र का यह दौरा और संस्थागत समन्वय इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे लुप्तप्राय प्रजातियों के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए अंतर-एजेंसी सहयोग बेहद आवश्यक होता जा रहा है।

Rohan Verma@rohan-verma·12 दिन पहले

यह पहल वन्यजीव संरक्षण और प्राणी कल्याण की दिशा में एक संवेदनशील कदम है। पिंजौर के संरक्षण केंद्र और अन्य राज्यों के उद्यानों से समन्वय यह दर्शाता है कि केवल प्रदर्शन के बजाय अब बंदी जीवों के मानसिक स्वास्थ्य और प्राकृतिक व्यवहार पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यदि यह प्रयास सफल होता है, तो न केवल जटायु का एकांत समाप्त होगा, बल्कि कैप्टिव ब्रीडिंग के क्षेत्र में भी सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·12 दिन पहले

यह प्रकरण वन्यजीव अभ्यारण्यों में प्रशासनिक उत्तरदायित्व और पशु कल्याण कानूनों के अनुपालन का एक अनूठा उदाहरण है। हालांकि यह मामला आपराधिक नहीं है, परंतु वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत बंदी जीवों के स्वास्थ्य, उचित रख-रखाव और उनके प्राकृतिक व्यवहार को बनाए रखना प्रशासन की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी के अंतर्गत आता है। पिंजौर केंद्र के दौरे और अंतर-राज्यीय समन्वय से यह स्पष्ट होता है कि वन्यजीवों के संरक्षण में संस्थागत सहयोग कानूनी रूप से कितना महत्वपूर्ण हो जाता है।

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