पाली स्थित मधुरम माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों को पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने के लिए एक अनूठी पहल की गई। स्कूल प्रांगण में एक विशेष जागरूकता और प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के मन में सांपों को लेकर वर्षों से बैठे खौफ को समाप्त करना था। इस कार्यक्रम के दौरान नन्हे-मुन्ने स्कूली बच्चों ने न केवल सांपों के व्यवहार और उनके जीवन चक्र को समझा, बल्कि अपने डर पर काबू पाते हुए बिना किसी हिचकिचाहट के सांपों को अपने हाथों में भी थामा।
पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र में सांपों की भूमिका
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और पाली के जाने-माने सर्प विशेषज्ञ जावेद भाई पठान ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मानव समाज में सांप को लेकर कई भ्रांतियां और अकारण डर फैला हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सांप हमारी कुदरत और पारिस्थितिकी संतुलन का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे खेतों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचाने वाले चूहों और अन्य नुकसानदेह कीट-पतंगों को खाकर प्राकृतिक तरीके से कीट नियंत्रण करते हैं। यदि पर्यावरण से सांप खत्म हो जाएंगे, तो चूहों की संख्या नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो जाएगा, जिससे सीधे तौर पर कृषि व्यवस्था प्रभावित होगी।
जहरीले और बिना जहर वाले सांपों में अंतर की समझ
जावेद भाई पठान ने छात्रों को सांपों की विभिन्न प्रजातियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रायोगिक तरीके से बच्चों को समझाया कि समाज में पाए जाने वाले अधिकांश सांप जहरीले नहीं होते हैं। लोग जानकारी के अभाव में और डर के मारे बिना जहर वाले सांपों को भी मार डालते हैं, जो कि पर्यावरण के लिहाज से सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि सांप कभी भी इंसानों पर बेवजह हमला नहीं करते। सांप के काटने की घटनाएं अक्सर तब होती हैं जब जीव को अपनी जान का खतरा महसूस होता है या गलती से उस पर पैर पड़ जाता है। काटना उनका हमला करने का जरिया नहीं, बल्कि खतरे के समय अपना बचाव करने का प्राकृतिक तरीका है।
सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार और सावधानियां
विशेषज्ञ ने विद्यार्थियों को सर्पदंश अर्थात सांप के काटने की स्थिति में किए जाने वाले जरूरी प्राथमिक उपचार के तरीकों से भी अवगत कराया। उन्होंने सलाह दी कि यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो घबराने की जगह मरीज को शांत रखना चाहिए और बिना समय गंवाए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि पर्याप्त प्रशिक्षण और विशेषज्ञता के बिना कभी भी खुद से सांप को पकड़ने या उसके पास जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
रेस्क्यू टीम को दें सूचना, न लें निर्दोष जीव की जान
कार्यक्रम के समापन पर सर्प मित्र ने सभी शिक्षकों और बच्चों से अपील की कि अगर घर, स्कूल या आसपास के इलाके में कभी कोई सांप दिखाई दे, तो उसे मारने की गलती न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचित किया जाना चाहिए। सुरक्षित रूप से रेस्क्यू करने के बाद सांपों को उनके प्राकृतिक आवास जैसे जलश्रोतों या घने प्राकृतिक जंगलों में छोड़ दिया जाता है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों में वन्यजीवों के प्रति दया, समझदारी और पर्यावरण संरक्षण की भावना जागृत की गई।



















